सावन महीना क्यों खास है मां पार्वती के लिए

सबसे पहले आप सभी पाठकों को मेरी तरफ सावन की अनंत अनंत शुभकामनाएं,11 जुलाई से सावन का पवित्र महीना आरंभ होने वाला है,देश भर में जहां जहां भगवान भोलेनाथ विराजित है वहां तैयारियां धूम धाम से हो रही है,श्रद्धालु भी बड़े आस से इस महीने का इंतजार करते है,11 जुलाई से भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने दूर दूर से दर्शन करने के लिए निकला पड़ते हैं,सावन का महीना तो भगवान भोलेनाथ के लिए खास तो है ही परंतु ये महीना माता पार्वती के लिए भी खास हैhttp://news24hourslatest.in
आइए जानते है क्यों खास है मां पार्वती के लिए ये महीना:
जैसा की हम सब जानते है की सावन के महीने में भगवान भोलनाथ को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु ना जाने क्या क्या करते है,बाबा धाम तो श्रद्धालु पैदल चल कर भगवान भोलेनाथ के पास जाते है,और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है,ऐसा कहा जाता है की माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप की थी,और यही कारण है की भगवान भोलेनाथ मां पार्वती के अदम्य तप से प्रसन्न होकर,इसी सावन के भोलेनाथ ने माता पार्वती ने संग विवाह संपन्न किया था इसलिए ये सावन का महीना शिव के लिए बल्कि मां पार्वती के लिए भी खास है.
आइए जानते है सावन क्यों मनाते है:
पौराणिक कथाओं में उल्लेख है की एक बार राजा दक्ष(सती के पिता) ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया,इस अवसर पर राजा दक्ष ने तमाम मेहनीय राजाओं को आमंत्रित किया परंतु महादेव को इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया और जब इस बात की जानकारी माता पार्वती को हुई तो उन्होंने इस यज्ञ में जाने की जिद की परंतु भोलेनाथ इस यज्ञ में जाने से इंकार कर दिया,महादेव की बात को अनसुना करते हुए माता पार्वती निकल पड़ी यज्ञ में शामिल होने,माता पार्वती का हृदय कुंठित हो गया ये देखकर की सभी मेंहनीय जनों के स्थान है लेकिन महादेव के लिए वहां स्थान नहीं है,क्रोधित होकर माता पार्वती उस समिधा में कूद और अपने प्राण त्याग दिया,और उसी समय ये प्रण भी लिया की अगले जन्म में महादेव को ही अपने पति के रूप में स्वीकार करेंगी,और जब महादेव को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने अपने उग्र रूप वीरभद्र को भेज कर राजा दक्ष के यज्ञ को विध्वंश करने का आदेश दिया और वीरभद्र ने यज्ञ को विध्वंश कर राजा दक्ष का सिर धड़ से अलग कर उसी यज्ञ में डाल दिया और इस कृत्य से सेरे आकाशलोक में हाहाकार मच गया तब सभी देवताओं ने शिव जी को मनाने को बहुत कोशिश की और अंत ब्रह्माजी ने शिव जी को दक्ष को क्षमादान करने का आग्रह किया तब शिव जी ने दक्ष को क्षमा तो कर दिया परंतु संकट ये था की राजा दक्ष का सिर तो हवनकुंड में जलकर राख हो गया था तब भगवान शिव ने एक एक बकरे के सिर को काटकर राजा दक्ष के सिर पर लगा दिया और राजा दक्ष को जीवित कर दिया,और राजा दक्ष जब जीवित हो गए तो उन्होंने शिव जी क्षमा याचना की और दक्ष के आग्रह पर शिवजी ने वही पर शिवलिंग को स्थापित कर दिया और पूरे मास यही पर रहने का वचन भी राजा दक्ष को दिया और जिसे आज दक्षेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है और ये स्थान हरिद्वार के पास कनखल में स्थिति है और तभी से सावन के पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ इस धरा पर आकर पृथ्वी का संचालन करते है,और जब माता पार्वती दूसरे जन्म में हिमालय की पुत्री और माता सती के रूप में जन्म लिया और महादेव को पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की जिसके फलस्वरूप महादेव प्रश्न हुए और माता पार्वती को अपनी अर्धनगणी के रूप स्वीकार किया यही कारण है की सावन का माह बहुत पवित्र होता है श्रद्धालुओं के लिए,मान्यता के अनुसार अगर श्रद्धालु सच्चे मन से महादेव की आराधना करते है तो उनकी सारी ईच्छा पूर्ण होती है,ऐसा कहा जाता है की पूरे सावन मास भोलेनाथ अपने श्रद्धालुओं पर पूरे माह कृपा बरसाते है
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