पद्मश्री शिवानंद बाबा का 128 की उम्र में निधन

पद्मश्री शिवानंद बाबा एक प्रसिद्ध योग गुरु है,भारत सरकार ने इन्हे 2022 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया,बताया जाता है की शिवानंद बाबा का जन्म बंगाल के श्रीहट्टी जिले में 8 अगस्त 1896 में हुआ था,बाबा बहुत गरीब परिवार से आते थे,उनके माता पिता भिक्षा मांग कर अपना जीवन यापन करते थे,और जब मुश्किल बढ़ने लगी,तो उन्होंने बाबा को श्री ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया गया, ताकि वहां उनकी देखभाल हो सके. साल 1977 में उन्होंने वृंदावन में आश्रम की दीक्षा ली। 2 साल वृंदावन में रहने के बाद 1979 में काशी में अधिवास करने लगे। फिर अंतिम सांस तक गंगा किनारे काशी में ही वास किया,बाबा योग गुरु के साथ ही एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे,उन्होंने अपना जीवन ही मानव सेवा में लगाया,गरीबों को,असहाय लोगों को अपना जीवन समर्पित कर दिया,योग और उनके सामाजिक सद्भाव के कारण ईश्वर ने उन्हे एक लंबा जीवन प्रदान किया,128 की उम्र में दिवंगत हुए बाबा का शव वाराणसी में दुर्गाकुंड स्थित आश्रम पर लाया गया. यहां उनके शिष्यों ने बताया कि शिवानंद बाबा का अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर आज (रविवार) किया जाएगा,बाबा दशकों से योग, आयुर्वेद का प्रचार कर रहे थे,उनका जीवन बहुत ही सादा जीवन था,वो जमीन पर सोते थे,साधारण जीवन यापन करते थे, वे हमेशा सफेद धोती और कुर्ता पहनते हैं।http://news24hourslatest.in
21 मार्च 2022 को जब शिवानंद बाबा को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना था,उस दिन बाबा सफेद कुर्ता और धोती पहने हुए जब राष्ट्रपति के दरबार हाल में पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने पीएम मोदी को झुककर प्रणाम किया और मोदी ने भी उन्हें झुककर प्रणाम किया,वनारस के दुर्गा कुंड में इनका आश्रम है जहां वो हमेशा योग करते रहते थे,गीता का पाठ करते रहते थे,बताया जाता है किया 2019 में उनका चेक अप हुआ तो पता चला की वो बिलकुल स्वस्थ थे,उन्हे कोई बीमारी नहीं थी वो एकदम फिटफाट रहते थे,
उनके आहार के बारे में बताते है की वो सिर्फ उबला हुआ खाना ही खाते थे,जिसमे नमक की मात्रा काफी कम रहती थी,वो फल और दूध का सेवन नहीं करते थे,
इस आधुनिक दुनिया में जहां लोग तकनीक के सहारे क्या भाई कर देते वही बाबा साधारण जीवन शैली अपनाते थे,और जब जब चुनाव हित बाबा अपने मत का प्रयोग करना नही भूलते थे,
128 के उम्र में उन्होंने महाकुंभ में जाकर डुबकी भी लगाई,जहां बड़े बड़े लोग घबरा जाते थे जाने में,पद्मश्री पाने वाले देश के सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे बाबा शिवानंद,योग की वजह से काशी ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में पहचाने जाते थे,
सैयम और सादगी भरा जीवन हर किसी के बस की बात नहीं,शिवानंद बाबा का जीवन इतना संतुलित था की आज के दौर में जब मनुष्य पूरा मशीन बन चुका है वैसा जीवन जीना सबके बस की बात नहीं,ऐसा वही मनुष्य कर सकता है जिसका अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण हो,बाबा की दिनचर्या और खानपान ही उनकी उम्र का राज था। वह नियमित रूप से तड़के तीन बजे उठ जाते थे और योग करते थे। वह अपना सारा काम खुद करते थे। वह केवल उबला हुआ भोजन करते थे और चटाई पर सोते थे
एक योगी को एक योगी ही समझ सकता है,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीनाथ ने अपने पोस्ट पर लिखा है की योग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान देने वाले काशी के प्रख्यात योग गुरु ‘पद्मश्री’ स्वामी शिवानंद जी का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!’’मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आपकी साधना एवं योगमय जीवन संपूर्ण समाज के लिए महान प्रेरणा है। आपने अपना पूरा जीवन योग के विस्तार में समर्पित कर दिया। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं उनके शोकाकुल अनुयायियों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें
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