क्या मोदी का मॉक ड्रिल,पाकिस्तान को चेतावनी है?

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है,हमले की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रह है,हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए,चाहते वो सिंधु का पानी हो,या फिर सामानों का आयात निर्यात हो,सरकार ने दोनो देशों में रह रहे लोगों से अपने मुल्क वापस जाने को कहा है,अगर वे नही जाते है तो उनपर ठोस कार्यवाही होगी,http://news24hourslatest.in
अब केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को और केंद्र शासित प्रदेशों को मॉक ड्रिल करने का निर्देश दिया हैं,हमले को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने अपना रूख थोड़ा बदला है,केंद्र सरकार ने अपनी बैठक में निर्णय लिया है की सेना को खुली छुट है की जप कार्यवाही करना चाहे वो करे,और सेना ने भी लगातार आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखा है, भारतीय सेना ने किनते संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया और पूछताछ भी कर रही है,
आइए जानते है क्या होता है मॉक ड्रिल
मॉक ड्रिल दरअसल एक अभ्यास या परिक्षण होता है,जिसका एक मात्र उद्देश्य ये होता है की जब कभी कोई आपातकालीन स्तिथी हो जाए,जैसे बाढ़ आ जाए,भूकंप आ जाए,देश पर हमला हो जाए,बम धमाका हो जाए,उस सिचुएशन में कैसे माहोल को नियंत्रित करे,ऐसी स्तिथि ने सेना लोगों का रिएक्शन और उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश करती है,लोगों के मन से डर का मोहाल हटाना,कैसे लोगों को सही सलामत दूसरे जगह पहुंचाना,उनका खाने का बंदोबस्त करना,दवाइयां उपलब्ध कराना,उनको ये भरोसा दिलाना की आप सुरक्षित है,
इस अभ्यास में हवाई सायरन बजते है,शहरों की लाइटें बंद कर दी जाति है,और अभ्यास किया जाता है,इस ट्रेनिंग में चुनिंदा लोगों को रखा जाता है,
बताया जा रहा है की मॉक ड्रिल ७ मई को होगी,शहर से लेकर गांव तक सरकार ने मॉक ड्रिल कराने का निर्देश दिया है,इसी दौरान आम लोगों और छात्रों को हमलों के दौरान काम की ट्रेनिंग देना शामिल है,और लोगों से ये अपील ली जाती है की वो अपने घरों की लाइटें पूरी तरीके से बंद रखे,ये इसलिए किया जाता है ताकि जब कभी भी आपातकाल इस इस्तीथी और घर की सभी लाइटें बंद हो जाए,तो उस इस्थिति में सेना को.लोगों को क्या करना चाहिए,ऊंची मंजिलों, इमारतों में फंसे लोगों को कैसे बचाया जाए, इस निर्देश के मुताबिक़ मॉक ड्रिल में डिस्ट्रिक्ट कंट्रोलर, ज़िले के अलग-अलग अधिकारी, सिविल डिफ़ेंस के वॉलंटियर्स,एनसीसी, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के वॉलंटियर्स, नेहरू युवा केंद्र संगठन और स्कूल-कॉलेजों के छात्रों की भागीदारी रहेगी,
कब कहा कैसे हुआ मॉक ड्रिल
वैसे तो इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है की मॉक ड्रिल कब हुआ,लेकिन कहा जाता है द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान (1939-1945) मॉक ड्रिल को व्यापक तरीके से आयोजित किया गया,
अमेरिका और यूरोप का नागरिकों को हवाई हमलों से बचने के लिए मॉक ड्रिल कराई गई थी,
वैसे भारत में जब गुजरात में 2001 में भूकंप आया था, तब जाकर स्कूलों, कार्यालयों, और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित मॉक ड्रिल्स की परंपरा शुरू हुई,भूकंप के बाद ही (NDMA – National Disaster Management Authority)जैसे संस्था बनाई गई,
अब लगभग हर राज्यों में सरकार मॉक ड्रिल की ट्रेनिंग करती है,दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे भूकंप संभावित क्षेत्रों में तो नियमित मॉक ड्रिल होती है|
कई बार जब मेट्रो स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी दी जाति है तोउस समय मॉक ड्रिल अभ्यास किया जाता है,
इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (दिल्ली) और छत्रपति शिवाजी महाराज एयरपोर्ट (मुंबई) पर हर साल इमरजेंसी मॉक ड्रिल होती है
बड़ी बड़ी फैक्ट्रियाँ जैसे ONGC, BPCL, IOCL,में अगर कहा गैस के कारण आग लग जाति है तो बचाओ हेतु मॉक ड्रिल की जाति है,
रेलवे स्टेशनों पर आतंकी हमले,भगदड़,जैसे घटनाओं के लिए मॉक ड्रिल की जाति है
यात्राओं में, जैसे की अमरनाथ यात्रा,पूरी की यात्रा,वैष्णो देवी की यात्रा,इन सब यात्राओं के दौरान भगदड़ मच जाए,कही हमला हुआ जाए,उस कंडीशन में मॉक ड्रिल कराई जाती है,
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