UNSC का पाकिस्तान प्रेम,बनाया आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष

आतंकवाद का जड़ कहे जाने वाले पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)ने तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बना दिया और यही नहीं पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष भी बना दिया,वो देश जो आतंकवाद का संरक्षण करता है,वो देश जिसने भारत पर आतंकवादी हमला किया,उसको संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष बना दिया और आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष भी बना दिया|http://news24hourslatest.in
जानिए तालिबान प्रतिबंध समिति क्या है?
तालिबान प्रतिबंध समिति उन समूह,संस्थाओं की आर्थिक संपत्ति को जब्त करने का काम करती है जो जो अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते हैं.
जानिए पाकिस्तान क्या काम करेगा?
अब जो भी तालिबान प्रतिबंध समिति की बैठक होगी उसकी अध्यक्षता करेगा,सदस्यों के बीच सहमति बनाने में मदद करेगा।आपको बता दे की तालिबान प्रतिबंध समिति अल-कायदा से जुड़े आतंकियों की निगरानी करती थी।बाद में इसे UNSC के प्रस्ताव 1988 के तहत 2011 में फिर से अलग तौर पर संगठित किया गया, ताकि इसे तालिबान पर फोकस किया जा सके,पाकिस्तान अगर तालिबान के खिलाफ कोई एक्शन लेता है तो इससे उसके संबंधों पर भी आंच आएगा जबकि अभी पाकिस्तान अपना तालिबान के प्रति संबंध सुधारने में लगा है
आतंकवाद विरोधी समिति में पाकिस्तान क्या काम करेगा?
पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी समिति (1373 काउंटर टेररिज्म कमेटी) का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है,आपको बता दे की समिति की अध्यक्षता हर साल बदलती है और यह भूमिका किसी सदस्य देश को दी जाती है। 2025 में इस समिति की अध्यक्षता अल्जीरिया को मिली है, जबकि पाकिस्तान समेत 3 देशों को उपाध्यक्ष बनाया गया है।भारत ने 2022 में इस समिति की अध्यक्षता की थी। यह अध्यक्षता भारत को 2021-2022 के लिए अस्थायी सदस्य चुने जाने के बाद मिली थी।
आपको बता दे की ये दोनो समितियां (आतंकवाद रोधी समिति और तालिबान प्रतिबंध समिति) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की समितियां हैं,जिनके काम अलग अलग है,तालिबान प्रतिबंध समिति का काम केवल अफगानिस्तान की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले आतंकियों पर प्रतिबंध लगाना है लेकिन तालिबान प्रतिबंध समिति का काम पूरी दुनिया में आतंकवाद से लड़ने में मदद करती है
क्यों भारत को कोई असर नहीं पड़ा?
भारत बार बार ये मुद्दा उठाया रहा है की पाकिस्तान यूनाइटेड नेशन के नामित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को सबसे अधिक संख्या में पनाह देता है,यहां तक की पाकिस्तान अपने खुद के बजट में से आतंकवाद को बढ़ावा भी देता है,पाकिस्तान 2025-26 के कार्यकाल के लिए 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है।सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं – चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका। पाकिस्तान के अलावा, वर्तमान गैर-स्थायी सदस्य अल्जीरिया, डेनमार्क, ग्रीस, गुयाना, पनामा, दक्षिण कोरिया, सिएरा लियोन, स्लोवेनिया और सोमालिया हैं
आखिर इतना विरोध के बावजूद भी पाकिस्तान को यूएनएससी ने समिति का अध्यक्ष बना दिया,भारत में पीएम मोदी की सरकार ने भारत को विश्वगुरु घोषित कर दिया था,बीजेपी के नेता पीएम मोदी को दुनिया के सबसे ताकतवर नेता माना था,ऐसा कहा जाता था की भारत की बात दुनिया सुनती है,पीएम मोदी का विश्व में डंका बजता है लेकिन ये क्या हुआ सब उल्टा हो गया,जिस पाकिस्तान का विरोध भारत के नेता दुनिया के हर कोने में जाकर आए है उसी पाकिस्तान को आज UNSC ने आतंकवाद रोधी समिति का अध्यक्ष और तालिबान प्रतिबंध समिति का उपाध्यक्ष बना दिया
भारत की विदेश नीति पर सवाल
बीजेपी कहती है की भारत की विदेश नीति पीएम मोदी के आने के बाद बदल गई है,भारत की विदेश नीति बहुत मजबूत हो गई है,विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था की हमारी विदेश नीति पर कोई सवाल नही उठा सकता,लेकिन आज सवाल ये उठ रहा है की आखिर कहां गई भारत की विदेश नीति,आपको पता ही होगा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही आईएमएफ ने पाकिस्तान को एक बिलियन डॉलर का कर्ज दिया था वो भी अमेरिकी मदद से
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