जातिगत जनगणना पर बोले अखिलेश यादव,पीडीए की सौ फीसदी जीत

केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना करने का फैसला लिया है,बोले केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव,वैष्णव ने ये भी कहा है कि कांग्रेस इस जातिगत जनगणना के विरोध में थी,१९४७ के बाद कांग्रेस की सरकार ने कोई जातिगत जनगणना नही कराई ,उनका कहना है था की कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जातिगत जनगणना कराने के बजाय जातिगत सर्व कराया,
विपक्ष ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि हमने सरकार को बहुत पहले ही जातिगत जनगणना कराने के लिए दबाव डाला था,
इस फैसले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस फैसले को एक राजनीतिक मोड़ देते हुए कहा है कि देश में 10 फीसदी लोग पीडीए के है ये लोग अगर साथ आ जाए तो जीत 100 फीसदी पक्की है,उन्होंने सरकार से सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग की है,सपा अध्यक्ष ने ये भी कहा की केंद्र सरकार सही दिशा में कुछ आगे बढ़ी है,इससे सामाजिक न्याय और बढ़ेगा,उन्होंने सरकार के इस फैसले को इंडिया गंठबंधन की जीत माना,उन्होंने बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में सभी चुनौती एक जैसी है,हमको मशीन समझा जाता रहा है और गरीब लोगों का उत्पीड़न होता रहा है ,अगर सरकार डेटा निकाले तो 10% मजदूर लोग पीडीए के होंगेhttp://news24hourslatest.in
पहलगाम हमले के बाद अब केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है,केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया है की सरकार अब जातिगत जनगणना कराएगी,तमाम विपक्षी दल ने भी इसका समर्थन किया है ,साल के अंत में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की देखते हुए केंद्र सरकार ने ये फैसला लिया है,लंबे समय से अटका ये फैसला अब केंद्र सरकार पूरा करेगी वही विपक्ष का कहना है की लंबे समय से विपक्ष केंद्र सरकार पर दबाव बना रही थी की जातिगत जनगणना कराया जाए,ये एक तरीके से विपक्ष की जीत है की ही केंद्र सरकार ने ये फैसला किया है,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है की सरकार इसकी समय सीमा बताए,राहुल गांधी का कहना है की हम जातिगत जनगणना के माध्यम से नया भारत में नया डेवलपमेंट लाना चाहते है,उन्होंने कहा कि सिर्फ आरक्षण ही नही,जातिगत जनगणना से ये तो पता लग जायेगा की ओबीसी,दलित,आदिवासी इन सबकी भागीदारी देश में कितनी है,हमारे इंस्टीट्यूशन ने ,संस्थाओं में इनकी कहा कहा भागीदारी हैं सब पता करना होगा,
गुजरात के कांग्रेस के दो दिवसीय सम्मेलन में लोक सभा के नेता प्रतिपक्ष ने जाति का मुद्दा उठाया था,और कहा था की देश के सभी नागरिकों को पता रहना चाहिए की दलित,पिछड़े,आदिवासी,अनुसूचित जाति के कितने कितने लोग हैं और तभी पता लगेगा की देश के संसाधनों में उनकी कितनी हिस्सेदारी है
जातिगत जनगणना कराने के केंद्र सरकार के फ़ैसले के एलान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसका श्रेय विपक्षी दलों को दिया.
उन्होंने कहा, “हमने संसद में कहा था कि हम जातिगत जनगणना करवा के ही मानेंगे, साथ ही आरक्षण में 50 फ़ीसदी सीमा की दीवार को भी तोड़ देंगे.”
उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि मोदी जी पहले कहते थी सिर्फ ४ जातियों है,अचानक उन्हे जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की,लेकिन सरकार को इसकी समय सीमा तय करनी होगी,
विपक्ष के कुछ दलों का कहना है कि मोदी सरकार पहले जातिगत जनगणना के विरोध में थी,लेकिन ऐसा क्या हुआ की उन्हे जातिगत जनगणना कराना पड़ा
आपको बता दे 2023 में मोदी सरकार ने ही जातिगत जनगणना कराया था,देश का पहला राज्य बिहार था जहां जातिगत जनगणना हुआ,उसके बाद आंध्र प्रदेश राज्य था,और उससे पता चला कि देश में कितनी पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों की आबादी है,यही कारण है कि मोदी सरकार अब जातिगत जनगणना कराना चाहती है,विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए केंद्र सरकार ने ये फैसला किया हैं
बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडणीस ने कहा है कि मोदी सरकार का जातिगत जनगणना का फैसला आरएसएस की देन है,उनका कहना है कि आरएसएस ने 2024 में ही कह दिया था की जातिगत जनगणना जरूरी है लेकिन इसे लेकर कोई राजनीति नही होनी चाहिए,ये सारे बयान तब आ रहे है जब बिहार में विधान सभा चुनाव होने वाले है ,सभी राजनीतिक दल इसका फायदा उठा रहे है
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