ये क्या बोल गए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जातिगत जनगणना को लेकर

जैसा की हम सबको पता है की केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है,केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजनीतिक मामलों पर कैबिनेट कमेटी की बैठक में लिए गए सरकार के इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि जातियों की गिनती जनगणना के साथ की जाएगी,वही अश्वनी वैष्णव ने कहा है की कांग्रेस नही चाहती थी जातिगत जनगणना कराना,वो केवल जाति आधारित सर्वे कराई, सन 1931 में अंग्रेजों के शासन काल जातिगत जनगणना हुआ था उसके बाद 1951 में हुआ,अभी तक जातिगत आधारित जनगणना में ओबीसी को बाहर रखा गया था,लेकिन 1990 में वी पी सिंह के सरकार ने मंडल कमीशन लागू किया जिसमे ओबीसी को आरक्षण मिला,उस समय देश में ओबीसी की संख्या 52% थी,
जातिगत जनगणना से लाभ ये होगा की देश को ये पता चल जाएगा की किस किस जाति के कितने लोग है,खासकर ओबीसी के जाति की,क्योकि ओबीसी को जातिगत जनगणना में शामिल नहीं किया गया था,जिससे ये पता नही चल पाया की ओबीसी की प्रतिशत कितनी है देश,जातिगत जनगणना अगर हुआ तो जातियों की आर्थिक,सामाजिक स्थिति का भी पता चल जाएगा,सरकार फिर अपनी योजनाएं में फेरबदल भी कर सकती है और इससे जातियों को लाभ भी मिल सकेगा।http://news24hourslatest.in
जैसा की हम सबको पता है की साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले है,इसको मद्देनजर रखते हुए सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया है,इस फैसले का विपक्षी दल ने भी समर्थन किया,बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस फैसले का खुलकर स्वागत किया,नीतीश ने कहा है कि इससे जाति के आधार पर लोगों की संख्या का पता लगेगा और उनके लिए योजनाएं बनाने में सरकार को मदद मिलेगी,हालाकि आपको बता दे की बिहार में बीजेपी ने जातिगत जनगणना की सिफारिश की थी जिससे 2023 में जातिगत जनगणना हुआ और पता चला कि किसकी कितनी हिस्सेदारी है,बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36 फीसदी है और वहीं पिछड़ा वर्ग 27 फीसदी है जबकि अनुसूचित जाति के 19 फीसदी हैं,और इस तरह बिहार जातिगत जनगणना करने वाला पहला राज्य बन गया उसके बाद आंध्र प्रदेश दूसरा राज्य बना जातिगत जनगणना कराने वाला,कहा जाता है की बीजेपी भी जातिगत जनगणना को लेकर अलग अलग बयान देती रही है,कहा ये भी जाता है की बीजेपी शुरू से ही ऊंची जाति की है,ब्राह्मण और बनिया वर्ग बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहता है,जब केंद्र में मोदी सरकार आई तब आर्थिक रूप से पिछड़ी ऊंची जातियों की लिए सरकार ने 10% आरक्षण की व्यवस्था की तब जाकर बीजेपी को ओबीसी का वोट भी मिलने लगा और पार्टी को मजबूत किया,
पहलगाम हमले के बाद अब केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है,केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया है की सरकार अब जातिगत जनगणना कराएगी,तमाम विपक्षी दल ने भी इसका समर्थन किया है ,साल के अंत में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की देखते हुए केंद्र सरकार ने ये फैसला लिया है,लंबे समय से अटका ये फैसला अब केंद्र सरकार पूरा करेगी वही विपक्ष का कहना है की लंबे समय से विपक्ष केंद्र सरकार पर दबाव बना रही थी की जातिगत जनगणना कराया जाए,ये एक तरीके से विपक्ष की जीत है की ही केंद्र सरकार ने ये फैसला किया है,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है की सरकार इसकी समय सीमा बताए,राहुल गांधी का कहना है की हम जातिगत जनगणना के माध्यम से नया भारत में नया डेवलपमेंट लाना चाहते है,उन्होंने कहा कि सिर्फ आरक्षण ही नही,जातिगत जनगणना से ये तो पता लग जायेगा की ओबीसी,दलित,आदिवासी इन सबकी भागीदारी देश में कितनी है,हमारे इंस्टीट्यूशन ने ,संस्थाओं में इनकी कहा कहा भागीदारी हैं सब पता करना होगा
इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान आया है की सरकार का फैसला सबके हित में है लेकिन इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तमाल नही किया जाना चाहिए,आरएसएस ने इस मुद्दे पर अपनी सतर्कता और संवेदनशीलता जाहिर की है। बताया जा रहा है की इस फैसले में संघ की सहमति देखी जा सकती है,क्योंकि इस फैसले के कुछ दिन पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और पीएम मोदी की मुलाकात हुई थी,इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है की इस फैसले में आरएसएस का कुछ रोल भी है,आरएसएस हमेशा देश के हिंदुओं को एकजुट करने का काम किया है,सामाजिक समरसता बनाए रखने का काम लिया है,आरएसएस का कहना है कि ये कदम न केवल सामाजिक समरसता और सौहार्द को बढ़ावा देगा बल्कि देश की उन्नति में अहम योगदान भी देगा बसरते इसका राजनीतिक उपयोग ना हो,सही आंकड़े देश को बताया जाए,
आपको बता दे की बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जहां २०२३ में जातिगत जनगणना हुआ है और दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश हैं
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