राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम का खुलासा

राहुल गांधी ने पहला एटम बम फोड़ा जिसमें भाजपा और इलेक्शन कमीशन पर वोट चोरी का इल्जाम लगाया उसके बाद अब उन्होंने फाइनली हाइड्रोजन बम फोड़ दिया है लेकिन इस बार बीजेपी का नाम न लेते हुए इलेक्शन कमीशन को बदनाम किया है ,उनका कहना है की वोटर का नाम इलेक्शन कमीशन ने डिलीट करवाया अपने वेबसाइट,आईए जानते हैं सत्य क्या है?http://newds24hourslatest.in
हाइड्रोजन बम:
राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जिसमें पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन उन्होंने दिया,उनका कहना है कि कुछ लोगों ने इलेक्शन कमिशन की वेबसाइट लोगिन करके वोटर लिस्ट है नाम हटा दिया,और कर्नाटक सीआईडी इस मामले की जांच करती है और इलेक्शन कमीशन को 18 चिट्ठी लिख कर देती है जिसका जवाब इलेक्शन कमीशन ने नहीं दिया, लेकिन यह वोट डिलीशन का जो कारनामा है वह 2018 में तेलंगाना में भी हो चुका है
कैसे डिलीट होता है नाम वेबसाइट से:
आपको बता दे कि जो वोट डिलीट किया जाता है इलेक्शन कमिशन की वेबसाइट से उसमें सबसे पहले आपको फॉर्म 7 देखना पड़ता है, मतलब कि आपकी पूरी डिटेल फॉर्म 7 में फिल अप करके इलेक्शन कमिशन की वेबसाइट पर डाली जाएगी और फिर वहां से आपके मोबाइल पर एक ओटीपी जाएगा,और अगर आप उस ओटीपी को वेबसाइट पर डालते हैं तो आपका फॉर्म ऑटोमेटिक डिलीट हो जाएगा, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि यहां सिर्फ एक आदमी, दो आदमी या 10 आदमी की बात नहीं है यहां लाखों लोगों की बात है तो क्या ऐसे में प्रोसेसिंग करना आसान है?
BLO और ERO के पास सारी डिटेल्स होती है:
लाखों नाम को वेबसाइट से डिलीट करना आसान नहीं है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है की BLO और ERO के जरिए यह काम आसानी से हो सकता है,BLO और ERO बिना ओटीपी द्वारा वेबसाइट से आपका नाम डिलीट कर सकते हैं, और यह दोनों स्टेट गवर्नमेंट के एम्पलाई होते हैं,और जब यह स्टेट गवर्नमेंट के एम्पलाई होते हैं तो जाहिर सी बात है कि स्टेट गवर्नमेंट को यह बात पता होनी चाहिए कि हमारा BLO कौन है हमारा ERO कौन है?
क्या कांग्रेस को पता है कि डिलीशन के बारे में:
BLO और ERO यह दोनों स्टेट गवर्नमेंट के एम्पलाई होते हैं तो जाहिर सी बात है कि स्टेट गवर्नमेंट को पता होना चाहिए कि नाम डिलीट हुए हैं या नहीं और जहां तक बात करें कांग्रेस की और तेलंगाना सरकार की तो यह बात कांग्रेस की सरकार को पता थी कि नाम डिलीट हुए हैं, अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार सेंट्रल गवर्नमेंट को जिम्मेदार ठहराए रही है और और सेंट्रल गवर्नमेंट कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराह रही है, मतलब की दोनों पार्टियों एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही है वह डिलीशन के मामले मे
सीआईडी को सौंप गई थी रिपोर्ट:
ऐसा कहां जा रहा है की सीआईडी ने 18 चिट्ठियां लिखी है इलेक्शन कमीशन को लेकिन इलेक्शन कमीशन ने इसका जवाब नहीं दिया यह पूर्णत: सत्य नहीं है,लेकिन इलेक्शन कमीशन ने काफी डाटा सीआईडी को पहले ही दे चुका है,लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इलेक्शन कमीशन ने सीआईडी को कोई रिपोर्ट नहीं किया और इसके जिसके कांग्रेस ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी,लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी जांच की और इस पूरे वोट चोरी के प्रोपेगेंडा को भी बुनियाद बताया,और मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका करता पर ₹100000 का जुर्माना भी लगाया
राहुल गांधी ने जो यह आप एक के बाद एक सेंट्रल गवर्नमेंट और इलेक्शन कमीशन पर लगाए हैं इसका कोई खास सबूत नहीं मिल रहा है क्योंकि जहां-जहां आरोप लगे हैं वहां वहां कांग्रेस की भी सरकार रही है और जिस सीट पर इन्होंने आरोप लगाया वहां भी कांग्रेस की सरकार है तो यह कैसे मान लिया जाए कि वोट चोरी हुई है अगर राहुल गांधी को लगता है कि सचमुच में इलेक्शन कमीशन और बीजेपी गवर्नमेंट मिलकर वोट चोरी किए हैं तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए वैसे भी इलेक्शन कमीशन ने यह कह दिया है कि राहुल गांधी अगर हलफनामा लिख कर देते हैं तो इस पूरी प्रक्रिया की जांच होगी अन्यथा नहीं होगी लेकिन राहुल गांधी ने अभी तक कोई हलफनामा लिखकर नहीं दिया और ना ही राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं क्योंकि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दो बार फर्जी एलिगेशन लगाने पर माफी मांग चुके हैं जैसे राफेल पर माफी मांगे, उसके बाद मोदी सरनेम पर माफी मांगे, सावरकर पर माफी मांगे इसलिए उनको डर है कि कहीं सुप्रीम कोर्ट में फिर इस वह चोरी पर माफ़ी ना मांगना पड़े क्योंकि अगर इस बार वह माफी मांगते हैं तो पूरी देश की जनता उनको नाकार देगी, और अगर वह इस वोट चोरी के आप पर सत्य सिद्ध होते हैं तो फिर देश की जनता भाजपा को भी पलट देगी,आगे की खबर के लिए जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
