GST के पीछे का खेल समझिये

GST का खेल बहुत निराला है,जैसा कि हम सबको पता है कि भारतीय जनता पार्टी ने भारत में जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया था,जिसमें चार स्लैब बनाए गए थे 5%,12%, 18% और 28% लेकिन 2025 में बीजेपी गवर्नमेंट ने 4 स्लैब से हटाकर 2 स्लैब में कर दिया है,12% और 18 परसेंट वाले स्लैब को हटा दिया गया है यानी कहने का तात्पर्य है कि अब चीजे ग्राहकों को सस्ते दाम पर मिलेंगे,क्योंकि जो सामान 28% पर था वह घटकर 12% पर आ गया और जो 12% पर था वह घटकर 5% पर आ गया यानी केंद्र सरकार ने इस दिवाली और दशहरा पर आपको जीएसटी घटाकर एक बड़ा तौफा दिया है,लेकिन इसके पीछे की सच्चाई क्या है आईए जानते हैंhttp://news24hourslatest.in
जैसा कि हम सबको पता है कि जीएसटी के दो स्लैब केंद्र सरकार ने सितंबर में हटा दिया लेकिन क्या इससे चीजे सस्ती होगी या फिर इसके पीछे कोई और कारण है आईए जानते है
जीएसटी के विपक्ष में:
आपको पता होगा की नोटबुक पर जीएसटी 12% से घटकर 0% कर दिया गया है फिर भी नोटबुक महंगी होती नजर आ रही है इसका कारण है कि सरकार ने कागज पर जीएसटी 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया, उदाहरण के तौर पर समझिए कि पहले जो जीएसटी लागू था उस पर एक नोटबुक वाला पेपर 12% में खरीदा था और नोटबुक को भी 12% पर ही बेचता था, आप ऐसे समझिए की एक नोटबुक बनाने वाले ने ₹100 में पेपर खरीदा और 12% सरकार को जीएसटी दी कुल राशि हो गई ₹112 रुपए जिसमें लागत थी मात्र ₹100 अब उस नोटबुक पर ₹5 एक्स्ट्रा रख के उसे मार्केट में बेचा गया तो ₹105 होंगे,अब उस पर 12% का जीएसटी यानी अब होगा वह ₹12.60 पैसे यानी की नोटबुक बनाने में जो लागत आई होती ₹105 रुपए और यह नोटबुक अगर बेची गई तो 12% जीएसटी के साथ होते हैं ₹117.60 पैसे यह तो था पुराना जीएसटी का खेल अब नए जीएसटी में देखीये क्या होता है एक नोटबुक बनाने वाला ₹100 में पेपर खरीदता है और उस पर 18% जीएसटी देता है,अब उसकी लागत हो जाएगी ₹118 अब समझिए जो पुराने जीएसटी थी उसमें लागत ₹100 की थी और नए वाले में वह बढ़ाकर ₹118 हो गई है अब वह कॉपी बनाएगा उस पर अपना अतिरिक्त शुल्क जोड़ेगा और मान ले कि वह ₹5 जोड़ता है तो उस नोटबुक की कीमत ₹123 रुपए हो गई,आप सोचिए पुराने जीएसटी पर थी तो 105 रुपए थी अब नए जीएसटी पर आई है तो 123 रुपए हो गए यह है नोटबुक और कागज के ऊपर जीएसटी का फर्क
जीएसटी के पक्ष में:
आप कपड़े पर जीएसटी का खेल समझिए सरकार ने कपड़े पर जीएसटी 12% से घटकर 5% कर दिया है लेकिन जिस धागे से कपड़ा बनता है उस पर जीएसटी 12% से बढ़कर 18% कर दिया है लेकिन एक व्यापारी ने जीएसटी के अंदरूनी हिस्से को समझाया तो ऐसा लगा कि सरकार का पक्ष सही है लिए इस चीज को समझते हैं,कपड़े पर 5% जीएसटी, जिस धागे से कपड़ा बना उस पर 18% जीएसटी उसके बाद कुछ लोगों का कहना है कि 23% जीएसटी है लेकिन असलियत यह है कि ऐसा नहीं है कि दोनों जीएसटी सीधा जोड़ दिए जाते हैं,जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का सिस्टम होता है मतलब की धागा बनाने वाली कंपनी ने जब सरकार को 18% जीएसटी दिया तो कपड़ा बनाने वाला वही जीएसटी सरकार से एडजस्ट कर लेता है और जब कपड़ा बाजार में बिकेगा तो वह 5% जीएसटी के साथ बिकेगा ना की 23% पर,उदाहरण के तौर पर समझिए कि एक धागे की कीमत ₹100 है उस पर 18% जीएसटी है, कपड़ा बनाने वाले ने धागे वाले से खरीद ₹118 में कपड़ा वाला,वही धागा यूज़ करके कपड़ा बनाएगा और मान लीजिए ₹200 में बेचेगा और कपड़े पर जीएसटी कितना है 5% यानी की ₹10% अब कपड़ा बनाने वाला सरकार को ₹10 जीएसटी देगा और जो पहले वाले धागे पर 18 परसेंट दिया था वह इनपुट क्रेडिट में एडजस्ट हो जाएगा किसने सरकार को पूरा 23 प्रतिशत नहीं देना पड़ेगा
यानी कुल मिला-जुला कर कहीं फायदा है तो कहीं नुकसान है,विपक्षी पार्टियों का कहना है कि 10 साल जीएसटी से जनता को लूट लिया उसके बाद जीएसटी में राहत देने से क्या फायदा है,बिहार के चुनाव को देखते हुए यह जीएसटी का स्लैब 4 से 2 कर दिया गया है,अब बीजेपी वाले इसको जश्न के तौर पर देख रहे हैं, वही विपक्षी पार्टी इस बीजेपी का फायदा बता रही है,कांग्रेस वालों का कहना है कि जब भी चुनाव आता है बीजेपी कोई ना कोई ऐसा मुद्दा लेकर आ ही जाती है जिससे लोग का ध्यान भटक जाता है,अब देखना है कि इस जीएसटी से जनता को राहत मिलता है या फिर बीजेपी को राहत मिलती है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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