क्या साल भर पहले ही मोदी की आंखों में मैथिली बस गई थी

भाजपा ने अली नगर विधानसभा सीट से मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है,करीब एक डेढ़ साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम में मैथिली ठाकुर को सम्मानित किया था शायद तब से मैथिली ठाकुर प्रधानमंत्री मोदी की प्रिय हो गई थी और आज दिन यह है कि मैथिली ठाकुर को बिहार विधानसभा सीट अली नगर से बीजेपी ने प्रत्याशी घोषित किया है हालांकि वहां के जो स्थानीय लोग हैं वह इस फैसले का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है की की जो कार्यकर्ता 20 साल से मेहनत किया है,जनता के बीच में गया है,खून-पसीना बहाया है पार्टी के लिए उनका टिकट काटकर भाजपा ने एक ऐसी गायिका को टिकट दिया है जिसका अनुभव राजनीति में शून्य के बराबर हैhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते है क्यों मैथिली ठाकुर को भाजपा ने टिकट दिया:
आपको बता दे लोग गायिका मैथिली ठाकुर का जन्म बिहार के मधुबनी जिले में हुआ है,सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स,फेसबुक,इंस्टाग्राम पर अपनी गायकी को पोस्ट करके काफी प्रचलित हुई,मैथिली ठाकुर को लोग गायिका में बहुत सारे अवार्ड मिले हैं,यहां तक की प्रधानमंत्री मोदी से भी सम्मानित हो चुकी है,युवाओं में उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है,कंटेंट क्रिएटर की एक प्रोग्राम में प्रधानमंत्री मोदी ने मैथिली ठाकुर को सम्मानित किया और ऐसा कहा जा रहा है की तब से प्रधानमंत्री मोदी ने यह ठान लिया था कि बिहार के चुनाव में मैथिली ठाकुर को टिकट देना है,प्रधानमंत्री मोदी ने मैथिली ठाकुर को अली नगर से टिकट दिलवाया,राजनीति का यही खेल है जिसको राजनीतिक अनुभव शून्य है लेकिन वह अन्य क्षेत्रों में अपना नाम कमा चुका है तो आसानी से चुनाव लड़ सकता है
आईए जानते हैं कौन-कौन सी चुनौतियां हैं मैथिली ठाकुर के सामने:
1-जातीय समीकरण:दरअसल लोक गायिका मैथिली ठाकुर का राजनीतिक ज्ञान लगभग शून्य के बराबर है, जैसा कि हम सबको पता है कि बिहार की राजनीति जाति समीकरण पर टिकी हुई है,अगर कोई उम्मीदवार यादव,मुसलमान,दलित इन सब का समीकरण नहीं समझता है तो वह जनादेश इकट्ठा नहीं कर पाएगा और जैसा कि हम सबको पता है कि मैथिली ठाकुर अभी ऐसे समीकरण में अनभिज्ञ है इसलिए उन्हें ज्यादा चुनौती है कि पहले वहां के समीकरण को समझें
2-विरोध प्रदर्शन:आपको बता दें की अलीनगर से मिश्रीलाल यादव विधायक थे जिनका टिकट काटकर बीजेपी ने मैथिली ठाकुर को दिया है इसलिए जमीनी स्तर पर भाजपा के कार्यकर्ता इसका जमकर विरोध कर रहे हैं उनका कहना है की जो व्यक्ति 20 साल से राजनीति कर रहा है,लोगों को समझ रहा है,उनके सुख-दुख में भाग लेता है ऐसे आदमी को टिकट न देकर एक ऐसी गायिका को टिकट दिया गया जो अभी यहां के लोगों को ठीक से जानती भी नहीं है,बिहार के जातीय समीकरण को ना के बराबर समझती है
3-वोट समीकरण:मैथिली ठाकुर को यह समझना होगा कि किस समूह के लोग,किस वजह से उन्हें वोट देंगे,उन्हें समझना होगा कि हर वर्ग के लोगों को किस आधार पर जोड़ा जाए,कैसे मुस्लिम,ओबीसी,यादव को एक करके चला जाए
4-अनुभव की कमी:लोक गायिका मैथिली ठाकुर को गायकी मे तो बहुत अच्छा अनुभव है लेकिन राजनीति के दृश्य से देखा जाए तो उनका अनुभव शून्य दिखता है, भले ही उनका राजनीतिक लोगों से संबंध है परंतु राजनीतिक ज्ञान नहीं है मात्र 25 साल की उम्र में उन्हें विधायक का टिकट देना यह भी बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा करता है क्योंकि मैथिली ठाकुर बिहार में पैदा हुई है लेकिन बिहार की राजनीति को समझने में उन्हें अभी समय लगेगा
लोग गायिका मैथिली ठाकुर की सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं को जोड़ना,जी हां दोस्तों अगर कार्यकर्ता ही उनका साथ नहीं देंगे तो फिर वह जीत नहीं सकती है क्योंकि कार्यकर्ता भाजपा के इस फैसले से बेहद नाराज है,कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो अपनी मेहनत लगन से पार्टी को आगे बढ़ाया,पार्टी के लिए दिन-रात काम किया,पार्टी ने उनका टिकट न देकर एक ऐसी लोक गायिका को टिकट दे दिया जो यहां के दुख दर्द को समझती भी नहीं है,मैथिली ठाकुर अपनी गायकी से लोकप्रिय तो हैं परंतु उनकी लोकप्रियता राजनीति में कितनी सक्सेस होगी यह कहा नहीं जा सकता,बीजेपी जैसे बड़ी पार्टी से टिकट मिलने का मतलब यह है कि उनको पार्टी के कार्यकर्ता,संगठन,पार्टी की विचारधारा सबको साथ लेकर चलना होगा,बहुत सारे ऐसे लोकप्रिय लोग हैं जो गैर राजनीतिक हैं जिन्हें पार्टियां वोट के लिए टिकट दे देती हैं और जब वो चुनाव हार जाते हैं तो फिर ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे चोर चोरी करके,जाहिर सी बात है भाजपा ने मैथिली ठाकुर को टिकट सिर्फ और सिर्फ वोट इकट्ठा करने के लिए दिया है,अब देखना है कि क्या वहां के कार्यकर्ता उनका समर्थन करते हैं या नहीं जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
