सत्य आखिर इतना कड़वा क्यों होता है:Premanand Maharaj

दोस्तों कुछ दिनों से प्रेमानंद जी महाराज का जो बयान आया वह चर्चा का विषय बना हुआ है, जो इस बयान का समर्थन कर रहें हैं उनका कहना है कि प्रेमानंद जी महाराज ने जो बातें कहीं वह शत प्रतिशत सही है, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि प्रेमानंद जी महाराज ने जो बातें कहीं वह सही है लेकिन उनके बोलने का तरीका गलत थाhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा:
अक्सर आपने देखा होगा कि रील्स पर, व्हाट्सएप पर यूट्यूब पर प्रेमानंद जी के महाराज का कृपा वचन चलता रहता है, वृंदावन में अपना पूरा जीवन समर्पण करने वाले प्रेमानंद जी महाराज राधा के प्रति कितना प्रेम है यह पूरी दुनिया जानती है, बड़े-बड़े सेलिब्रिटी से लेकर क्रिकेटर से लेकर उद्योगपति सब उनके चरणों में नतमस्तक हो चुके हैं, आपको बता दे की विराट कोहली, आशुतोष राणा और भी बड़े-बड़े नामचीन लोग एक साधारण तरीके से प्रेमानंद जी महाराज से मिलते हैं और नीचे बैठते हैं और उनका प्रवचन सुनते हैं वहां कोई भी VIP व्यवस्था नहीं है, प्रेमानंद जी की सारी बातें लोगों को,बच्चों को,बहुत प्रभावित करती हैं, आपने देखा होगा कि जब प्रेमानंद जी महाराज दर्शन देने लिए निकलते हैं तो 8 साल,10 साल, 5 साल के बच्चे राधा रानी का रूप धारण करके उनसे मिलते हैं,लेकिन कुछ दिनों में उनकी बातों को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई है, अपने संबोधन में प्रेमानंद जी महाराज ने यह कहा की जो लड़कियां चार जगह मुंह मार कर आती है वह कभी पतिव्रता नारी नहीं हो सकती है, इसमें क्या गलत है क्या सही है यह आपके ऊपर छोड़ देते हैं लेकिन जहां तक मेरा मानना है तो प्रेमानंद महाराज ने कुछ गलत नहीं कहा क्योंकि वह सब लड़कियों को नहीं टारगेट किया वह केवल कुछ लड़कियों को बोले जो ऐसा घिनौना कृत्य करती हैं, जो लोग प्रेमानंद जी के इस बयान से आहत हुए हैं और जिनको लगता है कि प्रेमानंद जी ने विवादित बयान दिया है चाहे वह पुरुष वर्ग हो चाहे वह महिला वर्ग हो तो मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से यह पूछना चाहता हूं कि जब आपको पता चलता है कि आपका लड़का या लड़की जो कक्षा आठ में पढ़ रहे हैं,9 में पढ़ रहे हैं और उनका अफेयर चल रहा है तो सबसे पहले आप क्या करते हैं उनको समझाते हैं अगर वह फिर भी नहीं समझते हैं तो आप उनको मारते हैं उल्टा सीधा आपके मुंह से भी निकलता है,क्यों निकलता है क्योंकि यह आपका अपना लड़का है,अपनत्व का भाव उस लड़के के प्रति है इसलिए आप गुस्से में कुछ भी बोल जाते हैं, तो वह आपको गलत नहीं लगता क्योंकि वह आप अपने लड़के के लिए बोल रहे हैं और जब समाज की बात आती है तो आपको लगता है कि वह गलत है, प्रेमानंद जी महाराज का उद्देश्य यही था उनके बोलने का कि वह हर बच्चे को भगवान का रूप मानते हैं चाहे वह लड़का हो या लड़की तो उन्होंने जिस आवेग में यह बात कही वह दिल से निकली थी युवाओं के लिए इसमें कोई गलत बात नहीं है
लोगों की अलग-अलग राय क्या है:
कुछ लोगों का कहना है कि यह बयान गलत तरीके से दिए हैं लेकिन आप खुद समझो जब आप के ऊपर यह पड़ती है जब आपका लड़का या लड़की किसी अफेयर में पड़ जाता है तो सबसे पहले आप उसको मारते हो गाली देते हो घर से बाहर निकालने की धमकी देते हो तो वह आपको बर्दाश्त हो जाता और जब प्रेमानंद जी महाराज ने जो बात कहीं वह भी उन लड़के और लड़कियों के लिए जो ऐसा घिनौना कृत्य करते हैं तो वह आपको बर्दाश्त नहीं है,आप संविधान की बात करते हैं, भाई तो संविधान से देश चलता है यह बात सत्य है लेकिन संस्कार भी कोई चीज होती है जो आपको अपने बच्चों में डालनी होती है, यह भारत देश है यहाँ हर कोई चाहता है कि भगत सिंह पैदा हो लेकिन दूसरे घर में अपने घर में ना हो
अश्लीलता पर यही नकारात्मक सोच वाले चुप क्यों हो जाते हैं:
यह जो प्रेमानंद महाराज के विरोध में बातें कर रहे हैं उनसे मैं ही पूछना चाहता हूं जब पिक्चरों में अश्लील दृश्य दिखाई जाती हैं और बच्चे इसको शहर्ष स्वीकार करते हैं तब आपकी संविधान और संस्कार कहां चले जाते हैं तब उसको तो आप ताख पर रख देते हैं और बच्चे को सुधारने में लग जाते हैं, तब आप नहीं कहते की संविधान बच्चों को जीने की इजाजत देता है, हर कोई चाहता है कि अपना बच्चा ठीक रहे दूसरों का भले बेकार हो या कैसा भी हो हमें उससे कोई मतलब नहीं, प्रेमानंद जी महाराज का यह यह कथन सबके लिए लागू होता है और इसमें कोई गलत बात नहीं कही गई है
रील्स के चक्कर में बर्बाद हो रहे हैं:
यह जो आधुनिक युग में रील्स चल गया है जो 10-10 सेकंड लेकर पूरी जिंदगी को बर्बाद कर रहा है और उसमें युवा फसते जा रहे हैं यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है युवाओं का, यह समय है जब हम अपने देश, अपने परिवार और खुद को परिपक्व बना सकते हैं और विश्व में अपना नाम भी रोशन कर सकते हैं कुछ करके,लेकिन हम क्या कर रहे हैं हम बर्बाद हो रहे हैं इंस्टाग्राम देखकर, फेसबुक देखकर ररील्स देखकर, हां मैं यह नहीं कहता कि यह रील्स या इंस्टाग्राम या फेसबुक बेकार है यह एक नजरों में देखा जाए तो सही है लेकिन उसका प्रयोग सार्थक रूप में किया जाए तो, अधिकतम लड़के इसका प्रयोग गलत तरीके से करते हैं, बहुत कम ही प्रतिशत के लड़के हैं जो इसका प्रयोग सार्थक तरीके से करते हैं और आगे बढ़ते हैं
मेरा मानना है कि अगर कोई आपको सीख दे रहा है सही राह दिखा रहा है, चाहे उसकी जबान कड़वी क्यों ना हो आपको उसे स्वीकार करना चाहिए इसी में आपकी भलाई है, क्योंकि सबको पता है सत्य कड़वा होता है, झूठ को छुपाया जा सकता है सत्य को नहीं
एक कवि की दो पंक्तियां हैं:
“आदमी अपनी संस्कृति से इतना क्यों ऊब जाता है,
अरे पश्चिम की तरफ मत भागो उधर तो सूरज भी जाकर डूब जाता है”
