बिहार में कांग्रेस की हार के बाद कौन सी चुनौती बढ़ गई

बिहार में कांग्रेस का इस बार का प्रदर्शन बहुत ही बेकार रहा कांग्रेस मात्र 6 सिट ही जीत पाई 61 सीटों में से जिसका असर यह हुआ कि राष्ट्रीय जनता दल भी धराशाही हो गया,राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप तो लगा रहे हैं लेकिन 2010 से देखिए तो लगातार कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला रहा है,कारण है राहुल गांधी जनता से कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं,बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन शर्मनाक रहा,कांग्रेस ने इतने प्रदर्शन किया,रैलियां की, भाषण दिया,वोट चोरी का आरोप इलेक्शन कमीशन और भाजपा पर लगाया उसके बाद भी जनता ने उन्हें नकार दिया इसका मतलब कि कांग्रेस के नेतृत्व में कहीं ना कहीं कोई कमी हैhttp://news24hourslatest.in
नेतृत्व हो रहा है कमजोर:
वोट चोरी,SIR, सीमा खत्म करना,जाति जनगणना सहित तमाम मुद्दे भी बेअसर साबित हो गए परिणाम में जहां कांग्रेस पर रणनीति बदलने का दबाव बड़ा है वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के लिए चुनौती भी बढ़ गई है कांग्रेस ने बिहार में चुनावी रणनीति का ताना बाना राहुल की तरफ से उठाए जा रहे हैं मुद्दों के इर्द-गिर्द बना था मतलब की जो राहुल गांधी मुद्दा उठा रहे है वही कांग्रेसियों के लिए एक मुद्दा बन गया बाकी उनके अंदर कोई आत्म शक्ति नहीं थी कि वह कोई और मुद्दा उठा ले, उनके करीबी माने जाने वाले कृष्णा अल्लावरु को चुनाव से कुछ महीने पहले ही प्रभारी नियुक्त किया गया थे,इस आदमी ने अपने अंदाज से टिकट फटा सोचिए बिहार में टिकट बांटने की प्रक्रिया कितनी टॉप होती है और इसने आसानी से टिकट वितरण कर दिया
शकील अहमद का क्या कहना है:
पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद का कहना कि कांग्रेस के हार का समीक्षा टिकट बंटवारे को लेकर आरोपोे की जांच भी करनी चाहिए टिकट बटवारा और चुनाव प्रचार को नजरअंदाज किए जाने से शकील अहमद ने पार्टी छोड़ दी थी उनका कहना था सिर्फ 5 लोग पूरा चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए पार्टी को सिर्फ 5 सिट मिला उनका कहना था कि पार्टी के कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व की बात नहीं सुन रहा है,अपने हिसाब से रैलियां कर रहे थे,अपने हिसाब से बातें कर रहे थे इसलिए प्रदेश के तमाम बड़े नेता चुनाव से दूर रहे
प्रदेश के नेता किशोर कुमार ने क्या कहा:
प्रदेश के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार ने कहा कि कांग्रेस को ती जातिवादी होने का नुकसान उठाना पड़ रहा है,राहुल गांधी को चुनावी रणनीति में बदलाव करना चाहिए वही पार्टी के नेता अनवर ने कहां है कि कांग्रेस को हर की समीक्षा करनी चाहिए और इसकी जवाबदही देते हुए सख्त कदम उठाना चाहिए पार्टी अगर खुद में बदलाव नहीं करेगी तो आगे कुछ नहीं हो सकता
बड़ी रैलियां हुई लेकिन वोट कब मिले:
राहुल गांधी ने सासाराम में वाेटर अधिकार यात्रा के जरिए चुनाव प्रचार की शुरुआत की वोट चोरी का मुद्दा पूरे देश में लेकर घूमे,पूरे बिहार में वोट चोरी वोट चोरी का मुद्दा राहुल गांधी ने पहुंचाया यहां तक की चुनाव आयोग और बीजेपी सरकार पर भी वोट चोरी का आरोप लगाया उनके रेलियाे में भीड़ तो जुटी लेकिन वह भीड़ वोट मे कन्वर्ट नहीं हो पाई,आपको बता दे कि कांग्रेस बूथ स्तर पर अपने चुनाव को मजबूत करने में विफल रही मतदान के वक्त उनके कार्यकर्ता जिलों के बूथ स्तर पर नहीं थे कांग्रेस अपने स्थानीय मुद्दों से भी भटक गई जो मुद्दा बिहार की जनता को चाहिए था उस मुद्दे पर राहुल गांधी ने फोेकस नहीं किया वह केवल एक ही मुद्दे लेकर बिहार चुनाव उतरे थे होते वोट चोरी लेकिन बिहार की जनता को वोट चोरी से कोई मतलब नहीं था उन्हें रोजगार,डेवलपमेंट,राशन यह सभी मुद्दों पर बिहार की जनता फोकस कर रही थी आपको बता दे की महागठबंधन में घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी टकराव हुआ था जिसकी वजह बिहार चुनाव में देखने को मिली,मुकेश साहनी को मुख्यमंत्री बनाया गया जिनका वोट प्रतिशत मात्र ढाई पर्सेंट है और मुसलमान का वोट प्रतिशत 19% है उस पर कोई चर्चा तेजस्वी यादव ने नहीं किया था,आपको बता दे कि वोट चोरी का आरोप पर असर नहीं हुआ, SIR के मुद्दे को भी राहुल गांधी ने उठाया जिसका कोई असर नहीं हुआ इसका मतलब की बिहार की जनता के असली मुद्दा जो था वह राहुल गांधी पकड़ नहीं पाए और बीच में रैली करके वह चले गए मलेशिया घूमने,2 महीने बाद जब चुनाव में 5 या 10 दिन बचे थे तो राहुल गांधी फिर डेरा डाले बिहार में,राहुल गांधी जब लोगों से मिलते थे तो उनसे पूछते थे आपका वोट कटा या नहीं कटा,अब आप बताइए यह कोई मुद्दा नहीं है बिहार के लिए,आप उनसे पूछिए कि क्या आपको रोजगार मिला या नहीं मिला, लेकिन राहुल गांधी ऐसा कुछ पूछते भी नहीं थे,इस वजह से लोगों ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी और नतीजा यह हुआ की मात्रा 6 सीटों में कांग्रेस से सीमट गई,अब देखते हैं आगे राहुल गांधी अपने कांग्रेस में कितना बदलाव करते हैं,जानने के लिए पढ़ते रहिये मेरा न्यूज़ चैनल
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