क्या संजय यादव की वजह से टूटा था अखिलेश का भी परिवार

बिहार विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद,एक तरफ एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन मात्र 35 सीटों में सिमट गई,जो पार्टी हारी सब आत्म मंथन करने में लग गए कि आखिर उनकी बात जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाई,हालांकि तेजस्वी यादव बिहार में 174 रैलियां की थी किए थे फिर भी हार गए, ऐसे में लालू यादव के परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई एक तरफ तेजस्वी अपनी पार्टी को जीता नहीं पाए दूसरी तरफ उनके घर में काफी दरार पैदा हो गईhttp://news24hourslatest.in
राजनीति की वजह से घर में पड़ी दरार:
लालू परिवार के घर में सबसे पहले उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को निकाला गया उसके बाद उन्होंने अपनी एक अलग पार्टी बना ली जिसका नाम है जनशक्ति जनता दल,बिहार विधानसभा में चुनाव भी लड़े लेकिन एक भी सीट नहीं मिली उसके बाद रोहिणी आचार्य को घर से निकाला गया,रोहिणी आचार्य का कहना था कि हारने की वजह ढूंढो की कैसे हम जनता तक अपनी बात नहीं पहुंच पाए उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और रमीज़ पर उंगलियां उठाई तो तेजस्वी यादव रोहिणी आचार्य के ऊपर गुस्सा हो गए जिससे कि रोहिणी आचार्य घर छोड़कर चली गई और बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि घर में संजय यादव और रमीज़ का नाम लेना गुनाह है अगर आप उन दोनों का नाम ले रहे हैं तो आपके ऊपर चप्पल बरसाई जाएगी,आपको गालियां दी जाएंगी,आपकोे घर से बाहर निकाला जाएगा
आखिर कौन है यह संजय यादव:
संजय यादव मूल रूप से हरियाणा के हैं उसके बाद वह अखिलेश यादव के मुख्य सलाहकार हुए उसके बाद तेजस्वी यादव के मुख्य सलाहकार हुए और जब अखिलेश यादव के मुख्य सलाहकार थे तो अखिलेश यादव और उनके पिता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव में झगड़ा हुआ उनके परिवार में फूट पड़ी और आज देखिए अखिलेश यादव की पार्टी कितनी टूट गई जनता में उसका विश्वास कम हो गया और आज तक अखिलेश यादव इस विश्वास को जोड़ने में लगे हैं,कहां जा रहा है कि लालू यादव का घर बिगाड़ने का आरोप संजय यादव के ऊपर है,इन्हीं की वजह से तेज प्रताप यादव भी घर से बाहर हुए और आज रोहिणी आचार्य भी घर से बाहर हो गयी,खबर यह भी आई है कि संजय यादव पहले अखिलेश यादव जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं उनके मुख्य सलाहकार रह चुके हैं,और जब संजय यादव मुख्य सलाहकार थे अखिलेश यादव के तभी अखिलेश यादव और उनके स्वर्गीय पिता मुलायम सिंह यादव में लड़ाई हो गई जिसके वजह से पार्टी में दरार पैदा हो गई, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर संजय यादव लालू यादव के परिवार में ना होते तो राष्ट्रीय जनता दल की 35 नहीं कम से कम 100 सीटे आई होती,तेजस्वी यादव के अंदर यह अहंकार हो गया था कि वह बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे,जनता उनको बहुत प्यार दे रही है लेकिन तेजस्वी यादव को हराने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके करीबी ही था संजय यादव
रोहिणी आचार्य ने लिया था संजय यादव का नाम:
अपने घर से निकलने के बाद रोहिणी आचार्य ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि संजय यादव के वजह से यह सारा खेल हो रहा है रोहिणी आचार्य से कुछ जो भी पूछा गया उन्होंने यही उत्तर दिया जाकर संजय यादव से पूछिए,कहीं ना कहीं तेज प्रताप यादव भी संजय यादव को ही जयचंद कहके संबोधित करते हैं,जहां-जहां उन्होंने जयचंद बोला लोगों को अब यही लग रहा है कि वह संजय यादव ही है जिसके वजह से तेज प्रताप यादव बाहर हुए है
लालू यादव क्या बोले:
बिहार विधानसभा चुनाव में कई जगह लालू यादव को तेजस्वी के साथ देखा गया,लालू यादव तेजस्वी यादव के नामांकन में भी गए थे,एक दो बार उन्होंने लालू तेजस्वी यादव के साथ मंच भी शेयर किय,लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वह ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं कर पाए और जब चुनाव हार गए,घर के लोग अलग होने लगे तब लालू यादव का बयान आया की घर में जो दरारें पैदा हुई है वह घर के लोग ही सुलझाएंगे,जनता इससे परेशान ना हो, लालू यादव तेजस्वी यादव पर पूरा भरोसा कर रहे हैं,पूरी कमान लालू यादव ने तेजस्वी यादव को सौंप दी है और तेजस्वी यादव भी अपने पार्टी के लिए जी जान से लगे रहते हैं,हम सब ने देखा कि कैसे तेजस्वी यादव अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे,बिहार में शायद ही ऐसा कोई नेता होगा जो एक 174 रेलिया किया होगा पिछले कुछ महीनो में
लालू यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव से ज्यादा भरोसा तेजस्वी यादव पर कर रहे हैं क्योंकि लाlu यादव चाहते हैं कि उनके जीते जी उनका लड़का एक बार बिहार का मुख्यमंत्री जरूर बने और इसके लिए तेजस्वी यादव दिन रात मेहनत भी किए थे लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला उम्मीद से कम सिट आई,अब लालू यादव और राबड़ी देवी दोनों अपने परिवार को सुलझाने में लगे हुए हैं,अब आगे देखते हैं कि परिवार में क्या-क्या होता है जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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