आखिर प्रयागराज में क्यों मनाया जाता है माघ मेला

दोस्तों माघ मेला का आगमन अब होने वाला है,साधु सन्यासी,धार्मिक गुरुओं को इस माघ मेला का इंतजार हर साल रहता है,पूरे भारतवर्ष से नहीं बल्कि दुनिया से लोग यहां आते हैं और प्रमुख दिनांक को स्नान करते हैं और मोक्ष की प्राप्ति के लिए दुआ करते हैं,सरकार करोड़ों करोड़ रुपए खर्च करती है श्रद्धालुओं के व्यवस्था के लिए,उनके रहने के लिए,उनके खाने के लिए,नहाने के लिए ताकि कोई श्रद्धालुओं को हानि न पहुंचे,वैसे भी माघ मेला जो प्रयागराज में हो रहा है उसमें कम से कम 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु आ सकते हैं,एक माह तक चलने वाला माघ मेला पूरी दुनिया का आकर्षण का केंद्र बना रहता है,माघ मेला साधना,संयम का महापर्व भी कहा जाता हैhttp://news24hourslatest.in
क्यों मनाया जाता है माघ मेला:
कहा जाता है इस माघ मेले में जो स्नान करता है वो अपने तमाम पापों से मुक्त हो जाता है,हिंदुओं का सर्वाधिक प्रिय पर्व माघ मेला पूरी दुनिया में प्रख्यात है, एक महीने चलने वाला यह पर्व में पूरी दुनिया से श्रद्धालु आते हैं और स्नान करते हैं,त्रिवेणी संगम गंगा,जमुना, सरस्वती का अदभुत मिलन माघ मेले में देखा गया है कहा जाता है पौराणिक कथाओं में ऋषि,मुनि भी इसी मांग मेले में आकर स्नान करते थे तब से माघ मेला प्रचलित हो गया,आपको बता दे की बहुत सारे श्रद्धालु या धर्मगुरु एक महीने के लिए कल्पवास में रहते हैं इस मार्ग मेले के दौरान
कल्पवास का मतलब क्या होता है:
कल्पवास का मतलब नदी किनारे अपनी छोटी सी कुटिया बनाकर साधना,तप,संयम,स्नान ध्यान करना होता है,रोज ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना,उसके बाद जब संतों की संगति में रहना,नियंत्रित और सादा भोजन करना,नियम से रहना पूरे 1 महीने तक,उसी कुटिया में स्नान,ध्यान करना और सबसे बड़ी बात ईश्वर की भक्ति निरंतर करते रहना,भगवान राम ने भी कहा है
“प्रथम भक्ति संतन कर संगा
दूसरी भक्ति कथा प्रसंगा”
यानी की पहली भक्ति यह है कि आप संतो के सानिध्य में रहे,ईश्वर की भक्ति,मोक्ष की प्राप्ति,अपने आप को संयम में रखना नियंत्रण रखना,पांचो इंद्रियों को नियंत्रित करना यह सब आपको संतों की संगति से मिलता है, उसके बाद दूसरी भक्ति है कथा सुनना,प्रसंग सुनना
धार्मिक मान्यताएं क्या-क्या है:
माघ मेला माघ के महीने में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि हिंदू धर्म और ज्योतिष के अनुसार माघ महीना सबसे पवित्र महीना होता है,इस महीने में ही सूर्य उत्तरायण की ओर रहते हैं,और हमारे ग्रंथो में पुराणों में लिखा गया है कि उत्तरायण के समय जो स्नान ध्यान तप तपस्या करता है उसको उसका फल अवश्य मिलता है, माघ मेले के दौरान जो गंगा का जल है अत्यंत शुद्ध और निर्मल माना जाता है,कहा जाता है कि इस अवधि में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और तमाम पापों से मुक्ति मिलती है
देवता भी इस माघ मेले में स्नान करते हैं:
हमारे पुराणों में धर्म ग्रंथो में यह लिखा हुआ है की माघ मेले के दौरान ऋषि मुनि भी,देवता भी आकर स्नान करते हैं क्योंकि माघ ही सबसे पवित्र समय होता है स्नान करने का,तप करने का,ध्यान करने का,माघ मेले के समय मौसम भी आपका अनुकूल रहता है,वातावरण शुद्ध रहता है,साधना और तप में आपका मन आसानी से लीन रहता है
हजारों साल पुरानी परंपरा है:
स्कंद पुराण,पद्म पुराण,महाभारत जैसे तमाम पवित्र ग्रंथ में हमारे इस माघ में लेकर वर्णन है,माघ मेले का समय ही तप,ध्यान,स्नान भक्ति का सही समय बताया गया है, अगर आप इस 1 महीने के दौरान निर्धारित दिनांक पर स्नान करते हैं,भक्ति करते हैं तो आपकोे तमाम पापों से मुक्ति मिलती है
एक महीने तक लगने वाला यह माघ मेला हिंदुओं का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है,भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व से लोग इस माघ मेले का आनंद लेने आते हैं, आपको भारत की सांस्कृतिक धरोहर देखने को मिलती है,भोलेनाथ के अनन्य भक्त जो कहीं पहाड़ों में रहते हैं, वह भी दर्शन देने इस माघ मेले में आते हैं,धर्मगुरु छोटी सी कुटिया बनाकर संगम के तट पर एक महीने तक कल्पवास में रहते हैं सोचिए इस विहंगम दृश्य को अगर आपने अपने नजरों में कैद कर लिया तो मरते दम तक ही आप नहीं भूल सकते,आपने देखा होगा कैसे महाकुंभ अभी बीता है जिसमें करोड़ों करोड़ों श्रद्धालु आए थे,जो हमारे हिंदू धर्म का एक ब्रह्मास्त्र पर्व है,वैसे ही अब माघ मेला की शुरुआत हो चुकी है राज्य सरकार ने तमाम व्यवस्थाएं की हैं,अपने श्रद्धालुओं के लिए अपने धर्म गुरुओं के लिए अगर आपको किंचित समय भी मिले तो इस माघ मेले में जाकर अपने तमाम पापों से मुक्ति पा सकते हैं,धन्यवाद
