कितना प्रभावित करेगा वंदे मातरम बंगाल चुनाव को

राष्ट्रगीत वंदे मातरम पर संसद में चर्चा की शुरुआत हो चुकी है और इस गीत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने खड़ी हो गई है,यहां तक की समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी बीजेपी पर प्रहार करते हुए बहुत कुछ सदन में बोला है,बीजेपी अब लगातार कांग्रेस से यह सवाल पूछ रही है कि वंदे मातरम के अन्य लाइनों को जिसमें दुर्गा जी का गुणगान है उसे क्यों हटाया गया,वहीं कांग्रेस का कहना है कि बंगाल चुनाव नजदीक आ रहा है इसलिए बीजेपी और वंदे मातरम को लेकर चर्चा कर रही है ताकि लोग मूल मुद्दों से भटक जाएhttp://news24hourslatest.in
आखिर क्यों वंदे मातरम पर चर्चा हो रही है:
कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी बंगाल चुनाव को देखते हुए वंदे मातरम पर चर्चा कर रही है वहीं बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस की वजह से वंदे मातरम के अन्य बोल हटाए गए ताकि इसमें एक पक्ष की भावना आहत ना हो,आखिर ऐसा क्या है वंदे मातरम में कि मुस्लिम पक्ष उसे गाने से इनकार करते हैं,बीजेपी वंदे मातरम को लेकर लगातार हमलावर है कांग्रेस पर,बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस हर कदम पर झुकी है जिसकी वजह से देश का विभाजन हुआ अगर कांग्रेस झुकती नहीं तो आज देश विभाजित नहीं होता
पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या कहा:
एक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को काटा छाटा,पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम के जरूरी हिस्से को हटा दिया और यही से विभाजन के बीज बो दिए गए थे, प्रधानमंत्री आरोप लगाते हुए यह कहे की वंदे मातरम को टुकड़ों में बांटा गया और उसकी मूल भावना से खिलवाड़ किया गया,पीएम मोदी का कहना है कि कांग्रेस देश के बंटवारे के आगे झुक गई अगर कांग्रेस वंदे मातरम को पूरी तरीके से स्वीकार करती तो विभाजन की नौबत नहीं आई होती
कांग्रेस ने क्या जवाब दिया:
पीएम मोदी के आरोपों का कांग्रेस ने खंडन करते हुए कहा 1937 में वंदे मातरम के दो पद इसलिए चुने गए क्योंकि बाकी पदों में धार्मिकता का प्रतीक है जिससे कुछ लोग असहमत थे,आगे कांग्रेस ने यह भी कहा कि यह फैसला किसी विभाजन के हेतु नहीं लिया गया था बल्कि सभी के भावनाओं का कद्र करते हुए लिया गया था,कांग्रेस ने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मूल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं और वंदे मातरम का मुद्दा इसलिए बीजेपी लाई है क्योंकि बंगाल में अब चुनाव होने वाले हैं
वंदे मातरम की रचना कैसे हुई:
1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना की 1881 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंद मठ में वंदे मातरम को प्रकाशित किया गया और इस उपन्यास में माँ को भारत माता के रूप में दर्शाया गया,उसमें यह भी कहा गया है कि एक ऐसी भूमि जो बहुत शक्तिशाली थी लेकिन अब पीड़ित है और बाद में फिर शक्तिशाली होगी,लेकिन आलोचकों का कहना है कि गाने के कुछ हिस्सों में हिंदू देवी देवताओं के वर्णन है जो सामान्य रूप से सभी धर्म स्वीकार नहीं कर पाएंगे
आजादी के आंदोलन का सबसे बड़ा क्रांतिकारी गीत था:
आपको बता दे की 1905 में बंगाल विभाजन के बाद यह गीत आजादी के आंदोलन का सबसे बड़ा क्रांतिकारी गीत बना,हर जगह वंदे मातरम की गूंज होने लगी, आपको बता दें कि 1906 के आसपास हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग इस गाने को गाते थे,उस समय कोई भी इस गाने को सम्प्रदायिकता की नजर से नहीं देखा जाता था,बल्कि पूर्ण रूप से देशभक्ति के तौर पर इसे गया जाता था युवाओं में जोश भरने का सबसे बड़ा क्रांतिकारी गीत था वंदे मातरम,और आपको बता दे कि इस गाने को लोकप्रिय बनाने वालों में रविंद्र नाथ टैगोर,बिपिन चंद्र पाल जैसे महान लोग शामिल थे
इस गाने से ब्रिटिश हुकूमत काँपती थी:
वंदे मातरम इतना लोकप्रिय हुआ कि उस समय सारी जाति के लोग इस गाने को गाते थे जिससे कि उनके अंदर जोश पैदा होता था,इस गाने में इतनी एनर्जी होती थी कि अंग्रेजों ने इस गाने को हर तरीके से बंद करना चाहा लेकिन सब के जुबान पर यह गाना पूरी तरीके से बैठ चुका था और अंग्रेजों का मनोबल इस गाने से पूरी तरीके से टूट जाता था
बीजेपी और कांग्रेस दोनों वंदे मातरम को लेकर आमने-सामने हैं बीजेपी ने यह साफ कह दिया है की वंदे मातरम को कमजोर करने के पीछे कांग्रेस का पूरा हाथ है जबकि कांग्रेस बार-बार यह कह रही है कि बंगाल चुनाव नजदीक है इसलिए भारतीय जनता पार्टी वंदे मातरम के मुद्दे को उछाल रही है,खैर अब आगे देखते हैं की वंदे मातरम का बंगाल चुनाव पर क्या असर पड़ता है धन्यवाद
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