
UGC के किस नियम पर लगा रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है,पूरे देश भर में विरोध प्रदर्शन के चलते सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पहुंचा था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है लोगों का कहना है कि यूजीसी का नया कानून पूरी तरीके से भेदभाव से पूर्ण है,हर शहर में लोग यूजीसी का जमकर विरोध कर रहे थे,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह का जमकर विरोध हो रहा था यहां तक की प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पुतला तक भी जलाया गया,जनरल कैटेगरी में आने वाली सभी लोग इस बिल का जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे,उनका कहना था कि यह बिल जनरल कैटेगरी के अधिकारों को छीनने वाला बिल है इसलिए इसका विरोध जायज है
अब लागू नहीं होंगे नए नियम:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी प्रमोशन ऑफ़ इक्विटी रेगुलेशन 2026 मेजर प्रावधान दिए गए हैं उसका दुरुपयोग होने की आशंका है,इसलिए यूजीसी के इन नियमों को फिलहाल रोक लगा दिया गया है,और यह सुझाव भी दिया है कि विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए और यूजीसी के खामियों पर विचार करे,आपको बता दे की भारत में कॉलेज और विश्वविद्यालय मे भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे,जिसका हर जगह जमकर विरोध हो रहा था,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह का पुतला भी फूंका गया,आपको बता दे कि भाजपा के कितने मंत्रीयों भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया था इसी बल के चलते
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने:
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यूजीसी के नए नियम में भेदभाव की आशंका है इस पर रोक लगाई गई है फिलहाल 2012 के जो नियम है वह लागू रहेंगे,सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ संवैधानिक और कानूनी सवालों की जांच की जानी बाकी है,मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का कहना है कि यह जो नए नियम है वह पूरी तरीके से और स्पष्ट है और भेदभाव की स्थिति है जिससे इसका दुरुपयोग भी हो सकता है,आगे मुख्य न्यायाधीश ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह अदालत को विशेषज्ञों की एक समिति का सुझाव दें जो यह बैठकर विचार करें कि इस बिल में क्या खामियां रह गई है,आगे उन्होंने यह भी कहा कि नए बिल का मसौदा तैयार करने में कुछ चीजों को नजरअंदाज किया गया है जिससे कि इस बिल का जमकर विरोध हो रहा है,इस बिल की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और सबसे खास बात यह है कि इस सुनवाई में रोहित वेमुला की मां की ओर से 2012 के यूजीसी नियमों को चुनौती देने के साथ सुना जाएगा
क्या था नया नियम:
2012 में जहां भेदभाव की बात की गई थी वहीं 2026 में इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ दिया गया,नए नियम के अनुसार जाति आधारित भेदभाव का मतलब जनजाति या फिर जाति के आधार पर अनुसूचित जनजाति,अनुसूचित जाति,अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध किया जाने वाला भेदभाव है,इसने नियम के अनुसार विश्वविद्यालय और कॉलेजों को नया इक्विटी केंद्र स्थापित करना होगा और इस केंद्र का काम होगा कि वंचित समुदाय से जुड़ी योजनाओं पर नजर रखना, पैसे से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना,परिसर के सभी सदस्यों को साथ लेकर चलना,विविधता में एकता बनाए रखना और राज्य की कानूनी सेवा संस्थाओं की मदद से कहानी सहायता उपलब्ध कराना,यही नहीं नए नियम में यह भी लिखा गया है कि प्रत्येक संस्थाओं को एक समता हेल्पलाइन चलानी होगी जो की 24 घंटे खुली रहेगी,क्योंकि अगर किसी छात्र को कर्मचारियों को ऐसा लगे कि उसके साथ भेदभाव हुआ है तो वह ऑनलाइन,हेल्पलाइन या फिर ईमेल के जरिए अपना शिकायत दर्ज कर सकता है,शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी
खुशी की लहर जनता में:
जब से यूजीसी के नए कानून आए हैं तब से विरोध प्रदर्शन लगातार हो रहे हैं,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह और तमाम भाजपा के ऐसे मंत्री जिनका जमकर विरोध हो रहा है उनके पुतले फुके जा रहे हैं, लोगों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी संबंधों के प्रति भेदभाव करना चाहती है इसलिए यह बिल लेकर आई है तमाम जनरल कैटेगरी के लोग इसका विरोध कर रहे थे मामला बढ़ता देख जब सुप्रीम कोर्ट में गया तब सुप्रीम कोर्ट ने इसे संज्ञान में लेते हुए इस नए कानून पर रोक लगा दिए और आदेश दिया की जांच कमेटी बैठाया जाए और नए नियम पर कुछ संशोधन करके विचार करें, सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम रोग पर विरोध करने वालों के चेहरे पर थोड़ी बहुत खुशी दिखी आप देखते हैं कि 19 मार्च को जो सुनवाई होगी उसे पर सुप्रीम कोर्ट अपना क्या निर्णय लेता है
