
प्रदूषण समस्या का कैसे हो निदान
आपको बता दे कि प्रदूषण की समस्या दिन प्रतिदिन गहरी होती जा रही है,हर आदमी प्रदूषण से जंग लड़ रहा है जितना आदमी को सिगरेट पीने से नुकसान नहीं हो रहा है उससे अधिक नुकसान प्रदूषण से हो रहा है, कितने ऐसे लोग हैं जो इस बात से अनभिज्ञ है कि प्रदूषण बढ़ने से क्या-क्या समस्याएं पैदा होती हैं,दिल्ली जैसे राजधानी वाले शहर का हाल बहुत बुरा है अक्सर प्रदूषण का मुद्दा संसद में उठता है लेकिन किसी सरकार को इसका कोई टेंशन नहीं होता चाहे वह आम आदमी पार्टी की सरकार हो,कांग्रेस की सरकार हो या फिर भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकारों कोई भी गेस्ट अगर बाहर से आता है तो उसके लिए हवा को प्यूरीफायर करने वाली मशीन लगा दी जाती है लेकिन आम लोगों के लिए यह सुविधा नहीं है आम लोगों से लिए केवल वोट लेने की सुविधा है,सही बात है आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है
अब प्रदूषण हर शहर में हो गया है:
अब यह धारणा हम सबको बदलनी चाहिए कि वायु प्रदूषण सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं है बल्कि छोटे शहरों में भी यह व्यापक रूप ले चुका है,आपको बता दे कि ऐसे कई शहर है जो दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिए हैं प्रदूषण के मामले में श्रीगंगानगर,फरीदाबाद,ग्रेटर नोएडा,मुजफ्फरनगर यह उन शहरों में शामिल है जो दिल्ली को भी प्रदूषण के मामले में पीछे छोड़ दिए हैं मतलब कि जहां वायु प्रदूषण का स्तर खतरे के पार ही बना रहता है धीरे-धीरे यह प्रदूषण गांव की तरफ भी हावी हो रहा है
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े क्या कहते हैं:
आपको बता दे कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े तस्दीक करते हैं कि हमारे छोटे शहर में भी अब हवा दूषित होती जा रही है वहां सांस लेने में भी दिक्कतें आ रही है लोगों को फेफड़े की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है एक रिपोर्ट में चौंकाने वाली खबर आई है वह रिपोर्ट यह बताती है कि वायु प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट बर्नीहॉट जैसे छोटे शहर बनने लगे हैं और ऐसे मामलों में दिल्ली कई शहरों से पीछे हो गया है
वायु गुणवत्ता सूचकांक का इस्तेमाल नहीं होता भारत में:
आपको बता दे की पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण को मापने के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक का इस्तेमाल होता है,यह इस बात का सूचक होता है कि वायु कितना दूषित है उसके बाद इस पर कार्रवाई की जाती है लोगों को पता होता है कि उन्हें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और हमारे प्रशासन को प्रदूषण से कैसे निपटना चाहिए और क्या-क्या उचित कदम उठाने चाहिए इसीलिए कई देशों में रेड अलर्ट होने के बाद स्कूल बंद हो जाते हैं बड़ी-बड़ी गाड़ियों की आवागमन पर प्रतिबंध लग जाता है लेकिन भारत मैं ऐसा नहीं होता है हमारे पास ऐसी सुविधा नहीं है जो असली खतरे के बारे में बता सके,आपको बता दें कि हमारे पास 966 मैन्युअल स्टेशन है जो सैंपल इकट्ठा करते हैं और विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला में भेजते हैं और आपको बता दे कि यह स्टेशन करीब 24 घंटे के बाद रोजाना का औसत आंकड़ा दे सकते हैं वह भी तब जब उसे पर जानकारी इकट्ठा हो सके उसके विश्लेषण को साझा किया जा सके लेकिन ऐसा कर पाना भारत के लिए कठिन हो जाता है,इसलिए पुराने आंकड़ों से ही काम चलता है
गाड़ियों पर भी हो नियंत्रण:
देश में गाड़ियों की कमी नहीं है जितने लोग नहीं है उससे अधिक कहीं गाड़ियां दिखती है इसलिए गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर भी जागरूकता बरतनी चाहिए,आप किसी भी शहर को देख लीजिए गाड़ियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है,भले ही वहां इंसान की आबादी कम हो लेकिन गाड़ियों की आबादी ज्यादा रहेगी और यह राज्य सरकारों का फेलियर है कि लोग प्राइवेट गाड़ियों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उस स्तर की नहीं कर पाती जिस स्तर की लोगों को चाहिए इसलिए लोग प्राइवेट गाड़ियां खरीद रहे हैं और आजकल गाड़ियां भी आसानी से फाइनेंस कर के मिल जाती है,सार्वजनिक परिवहन जैसे-जैसे सुविधा घटाई है वैसे-वैसे लोग दोपहिया और कारों की तरफ रुख किये है,सरकार अगर चाहे तो इन परिवहन विभाग को प्राइवेट सेक्टर के हाथों सौंप सकती है ताकि कुछ सुविधा हो सके क्योंकि राज्य सरकारों ने ही परिवहन को बर्बाद किया है,सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए जो निवेश जरूरी है उसे नहीं किया आप अभी भी चले जाइए बड़े से बड़े शहर में उसका परिवहन का हाल देखिए ऐसा लगेगा जैसे सबसे पीछे परिवहन विभाग है इसलिए छोटे शहरों पर भी अब ध्यान देना बहुत जरूरी है क्योंकि दुनिया की 5 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत भी शामिल है तो भारत को हर तरीके से मजबूत होना होगा आखरी में,आपको बता दे की वायु प्रदूषण से देश में हर साल 15 से 17 लाख लोगों की जान जाती है
