
तहव्वुर राणा पर राजनीती,,मास्टरमाइंड नहीं “मास्टर”
तहव्वुर राणा भारत आ चुका, अमेरिका से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लाया गया , जहां उसे NIA की टीम ने उसे पटियाला हाउस कोर्ट ले कर गई ,उसके बाद उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल रखा जाएगा वो भी कड़ी सुरक्षा के बीच,भारत एक ऐसा देश है जहां खूंखार आतंकवादियों को भी हीरो जैसा दिखाया जाएगा, तहव्वुर राणा एक आतंकवादी है,उसे स्पेशल सुरक्षा दी जा रही है,आखिर एक आतंकवादी को इतनी सुरक्षा क्यों दी जा रही ही,आंतकवादी की तरह नहीं,बल्कि की नेता,अभिनेता की तरह ट्रिटमेंट किया जाता है जबतक कोर्ट किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेगी तब तक उसे मास्टरमाइंड से हीरो बना देगी मीडिया,उसपर इतना खर्चा आखिर क्यों,वो तो जेल में ही रहेगा,2008 में कुछ ऐसा ही हाल था अजमल कसाब को 2008 में गिरफ्तार किया गया और 21 नवंबर 2012 को अजमल कसाब को यरवदा जेल में फांसी दी गई,छोटू चाय वाला जो 2008 के हमले का चश्मदीद था , उसे 26 नवंबर 2008 का वह भयानक मंजर अभी भी याद है जब आतंकी मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर निहत्ते मासूम लोगों पर गोलियां बरसा रहा था ,तकरीबन 166 लोग मारे गए थे,इस आतंकी हमले में छोटू ने कई लोगों की जान बचाई थी 26 नवंबर 2008 हमें आपको मालूम है 21 नवंबर 2012 को से फांसी दे दी गई और, छोटू का कहना है कि उसने वह मंजर बहुत करीब से देखा है इसलिए उसे आज भी बहुत कष्ट होता है, 2008 में उसकी गिरफ्तारी हुई और 2012 में उसकी फांसी हुई तब तक के लिए सरकार उसको अपने अधीन रखी थी जेल में था और करोड़ों करोड़ों रुपए खर्च हुए उसके ऊपर और हाई सिक्योरिटी में था, उसका कहना है कि तोर राणा को इतनी सिक्योरिटी इतना पैसा इसके ऊपर ना खर्च हो जल्दी से कार्रवाई हो और एक महीने के अंदर इसे फांसी दे दी जाए उस पर करोड़ों करोड़ रुपए खर्च किए गए,आतंकवादी के ऊपर सरकार इतना पैसा खर्च कर करती है जैसे वो देश का कोई बड़ा हीरो हो,नेता हो,अभिनेता होhttp://news24hourslatest.in
ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने कैसे मारा
आपको याद होगा कि अमेरिका में WTC पर हमला 9/11,2001 को हुआ था , अलकायदा आतंकवादियों ने चार जेट विमान का अपहरण किया उनमें से दो विमान को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के साथ टकरा दिया जिसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ध्वस्त हो गया, जिसमें हजारों लोग मारे गए कितने लोग घायल हो गए बेघर हो गए, इस पूरे हमले का में मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन एक खूंखार आतंकवादी था, वह एक हिंसा का आतंकवादी और हत्यारा था जिसने एक संगठन बनाया था अलकायदा उसके बाद उसने कई देशों पर हमला किया कितने नागरिकों को मारा,उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे,इतने बड़े हमले के बाद भी अमेरिका इसे हीरो की तरह नहीं दिखाया उसने दुनिया को पता भी नहीं लगने दिया कि ओसामा बिन लादेन कहां है, अमेरिका की खुफिया एजेंसी एफबीआई, जिसका पूरा नाम फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन है, एसबीआई संयुक्त राज्य अमेरिका के जो न्याय विभाग है उसकी एक प्रमुख जांच शाखा है, एसबीआई विभिन्न संघीय अपराधों की जांच करता है जैसे आतंकवादी हमला हुआ कोई भी अपना संगठित अपराध हुआ या फिर वित्तीय अपराध हुआ साइबर अपराध हुआ नागरिक के ऊपर जो अपराध हुआ उसकी जांच करता है, बराक ओबामा ने एसबीआई को ओसामा बिन लादेन के पीछे छोड़ रखा था उसकी हर गतिविधियों को पकड़ने के लिए एसबीआई ने अपनी पूरी मेहनत के साथ यह पता किया कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा हुआ था, जो कि उत्तरी पाकिस्तान में बसा हुआ है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बात सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति और अमेरिका की एजेंसियों को ही पता था पूरी दुनिया में किसी को नहीं पता था कि ओसामा बिन लादेन कहां छुपा हुआ है ऐसे अमेरिका की खुफिया एजेंसी जांच करती हैं, काफी मस्कट करने के बाद 2 मई में 2011 को राष्ट्रपति ओबामा के आदेश पर एक विशेष अभियान चलाया गया जिसका नाम था ऑपरेशन नेप्चून स्पीयर और 2 मई 2011 को अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन को अमेरिका की जांच एजेंसियों ने मार गिराया और सबसे खास बात यह है कि पाकिस्तान को छापे के बारे में पता भी नहीं चल आना बताया गया, आतंकवादियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए यह अमेरिका से सीखे,
मीडिया राणा की पूरी जीवनी बता रहा है,कहां पढ़ा,कहा रहता है,कहा उसका जन्म हुआ कैसे आतंकवादी बना, कहां पढ़ाई की,जनता को इसकी क्या जरूरत है,ये सबको पता है भारत की कानून व्यवस्था थोड़ी लंबी,लेकिन जब गुनहगार खुद कुबूल करता है कि मैने गुनाह किया है,तो सरकार तो तुरंत जांच कर के उसे सजा दे देनी चाहिए,अब तकरीबन 17 साल बाद अमेरिका ने उसे भारत को दे दिया है, आपको बता दें कि तहबुर राणा को 2009 में एसबीआई जिसे फैऊदल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन नाम से जाना जाता है यह अमेरिका की एक खुफिया एजेंसी है इसने ही तैमूर राणा को 2009 में गिरफ्तार किया था, और वह लॉस एंजेलिस के एक डिटेंशन सेंटर में बंद था, 26/11 को मुंबई में जो हमला हुआ वह चार दिन तक चला इसमें आतंकवादी संगठन लाश करें तौबा के तकरीबन 10 आतंकवादियों ने हमले किए डेढ़ से 200 लोग भी मारे गए 300 से ज्यादा लोग घायल हुए, तकरीबन 20 सुरक्षा कर्मी हमारे भारत के और 26 विदेशी नागरिक भी मारे गए थे,राणा ISI का भी मेंबर है,11 अप्रैल को ,NIA के टीम राणा से पूछताछ करेगी, राणा के जांचकर्ताओ और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात CSIF के जवानों से तहव्वुर राणा को निकालकर पूछताछ वाले कमरे में ले जाया गया है,जहां NIA के अधिकारियों के एक टीम आतंकी हमले से जुड़े कई सवाल पूछेगी.tahawwur Rana case
तहव्वुर राणा पर राजनीति:-
आतंकी राणा पर सियासत तेज हो चुकी है,भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि उसे अमेरिका से भारत लाना एकतिहासिक उपलब्धि है,उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की बड़ी जीत बताया,पूनावाला ने कहा है कि,’ चाहे की भी अपराधी पाताल में ही क्यों न छिपा हो,भारत अब उसे ढूंढकर न्याय के कटघरे में लाने की ताकत रखता है, कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए पूनावाला ने कहा है कि UPA शासन में आतंकवादी पर सख्त कार्यवाही की बजाय वोट बैंक की राजनीति करती है,धर्म का हवाला देते हुए बोला कि आतंकी खास धर्म के थे इसलिए छोड़ दिया गया,वही कांग्रेस का कहना है कि कांग्रेस पहले ही सारे दस्वावेज अमेरिका को सौंप दिए थे जिसमें राणा को 26/11 मास्टरमाइंड बताया गया

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