मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी बरी हुए तो फिर असली आरोपी कौन?

23 अक्टूबर 2008 मालेगांव ब्लास्ट, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई,100 से अधिक लोग घायल हो गए, करीब 17 साल बाद मुंबई के एक विशेष अदालत ने बीजेपी के पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ कोई विश्वाशनीय सबूत नहीं मिलेhttp://news24hourslatest.in
मुंबई न्यूज़: बात 17 साल पहले की है,23 अक्टूबर 2008 महाराष्ट्र के नासिक शहर के मालेगांव जिले की, रमजान का महीना था, रात का समय था, बाजारों में भीड़भाड़ थी, लोगों का आना-जाना लगा था, तभी अचानक एक मस्जिद के पास एक बाइक पर जोरदार ब्लास्ट हुआ, बाइक थी एलएमएल फ्रीडम, धमाके के बाद अफरा तफरी मच गई, कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई और हमले में 6 लोगों की मृत्यु हो गई, जिनके नाम थे फरहिन उर्फ़, शगुफ्ता शेख लियाकत, शेख मुश्ताक यूसुफ, शेख रफीक मुस्तफा, इरफान जियाउल्लाह खान, सैयद अजहर सैयद निसार और हारून शाह मोहम्मद शाह, इस ब्लास्ट में 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे
मामले की जांच ATS को मिला:
इस दुर्घटना की जांच का जिम्मा एटीएस को मिला, एटीएस की जांच में “अभिनव भारत संस्था” का नाम सामने आया, और इस मामले में बीजेपी की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिवनारायण,श्याम साहू, कर्नल पुरोहित साहित्य 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, एटीएस के अनुसार अभिनव भारत नाम के संस्था के सदस्यों ने इस पूरी घिनौनी कृत्य की संरचना की थी, इन अपराधियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) लगाया गया, अभिनव भारत संस्था के सदस्यों पर विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाई कोर्ट के फैसले को बदलाव कर मकोका हटा दिया, इसके बाद मुंबई हाई कोर्ट ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सशर्त जमानत दे दी
325 का गवाहों ने गवाही दिए इस केस में:
आपको बता दे की 2018 में इस मामले की सुनवाई हुई, जिनमें 325 गवाहों ने गवाही दी थी, जिनमें से 40 गवाह अपने बयानों से मुकर गए, उसके बाद साध्वी प्रज्ञा ने एटीएस पर जबरन गवाही दिलवाने का आरोप लगाया, उसे समय एटीएस चीफ थे हेमंत करकरें
क्या हुआ 31 जुलाई 2025 को:
31 जुलाई 2025 को NIA की विशेष अदालत ने सभी सात आरोपी जिनके नाम है बीजेपी की पूरे सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी, रमेश उपाध्याय अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, जिनके खिलाफ कोई विश्वसनीय सबूत न मिलने के कारण इन्हें बरी कर दिया गया, कोर्ट का कहना है कि अभियोजन पक्ष सबूत इकठ्ठा नहीं कर पाया की मोटरसाइकिल पर बम था
ATS/NIA की तीन खामियां क्या पाई गई:
1- मामले की जांच में एटीएस का कहना है की जिस मोटरसाइकिल पर बम बांधा गया था वह प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी, वह मोटरसाइकिल इतनी बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो गई थी की पहचान पाना भी मुश्किल था, मोटरसाइकिल पर कोई नंबर भी नहीं मिला, चेचिस नंबर भी नहीं मिला जिसे पता चल सके कि यह कोई ठोस सबूत है,लेकिन किसी तरह जाँच में पता चला की मोटरसाइकिल प्रज्ञा सिंह की थी
2- एटीएस ने कर्नल पुरोहित पर आरोप लगाया था कि कि कर्नल ने कश्मीर से 80 किलोग्राम आरडीएक्स खरीदा, उसके बाद सुधाकर चतुर्वेदी के आवास पर बम को असेंबल किया गया, परंतु जस्टिस लाहोटी का कहना है कि आरडीएक्स की खरीद और ट्रांसपोर्टेशन के कोई सबूत नहीं मिले हैं, जस्टिस का कहना है कि बम किसने बांधा, कौन लाया इसका कोई सबूत नहीं मिला
3- अभिनव भारत संगठन पर आरोप लगा:
एटीएस द्वारा यह कहा गया कि अभिनव भारत संगठन के तहत आरोपी कम कर रहे थे, एटीएस का कहना है कि जो हथियार, बम,बारूद आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किए गए थे वह इसी संगठन के तहत हुआ था, एटीएस का यह भी कहना है कि धन एकत्रित करना और बम बारूद खरीदना इसी संगठन के सदस्यों द्वारा किया गया था, लेकिन न्यायाधीश का कहना है पुरोहित ने राशि का उपयोग व्यक्तिगत कामों के लिए किया था, जैसे कि घर निर्माण,LiC पॉलिसी, न्यायाधीश का कहना है कि ऐसी कोई ठोस सबूत नहीं मिली जिससे यह साबित किया जा सके कि धान का उपयोग बम और बारूद के लिए किया गया था
तमाम जांचों के बाद 17 साल बाद सात आरोपी इस घटना के बाद बरी किए गए, कोर्ट को कोई विशेष सबूत नहीं मिला, एटीएस की तरफ से कई सबूत कोर्ट में पेश किए गए लेकिन कोर्ट ने एटीएस के सारे सबूत को भी बुनियाद ठहरा दिया, निराधार बताया और जिसकी वजह से सात आरोपी बरी किए गए,अब सवाल यह उठता है कि जो आरोपी बरी किए गए हैं उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है लेकिन घटना तो हुई है, तो आखिर कौन है इस घटना का जिम्मेदार, वह कौन आरोपी हैं जिन्होंने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया वह कब गिरफ्तार होंगे सवाल यही पैदा होता है, ताजा अपडेट के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल