SSC-CGL विवाद:गुरु और शिष्य की ताकत

एसएससी सीजीएल यानी स्टाफ सर्विस कमीशन कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्जाम है,एसएससी सीजीएल एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है जो कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों में ग्रुप सी और ग्रुप डी के लिए आयोजित किया जाता है,एसएससी सीजीएल की परीक्षा में अव्यवस्था के खिलाफ छात्र शिक्षक का आंदोलन पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है,दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों और शिक्षकों के प्रदर्शन के दौरान यह सरकार पर आरोप लगाया गया है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को परीक्षा का ठेका दिया गया है जिसकी वजह से परीक्षा में धांधली हो रही हैhttp://news24hourslatest.in
दिल्ली न्यूज़ एसएससी सीजीएल: एसएससी सीजीएल भारत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में,मंत्रालयों में ग्रुप सी और ग्रुप डी के स्तर के लिए एग्जाम कराती है, लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब शिक्षक और छात्र परीक्षा में हो रही अवस्थाओं को लेकर सड़कों पर उतर गए, गुरु और शिष्य दोनों ने सरकार के खिलाफ भी जोरदार आंदोलन जंतर मंतर पर किया, आंदोलन इतना व्यापक स्तर पर पहुंच गया था की लाठी चार्ज करना पड़ा,जिसमें कई शिक्षक छात्र घायल हो गए और कई शिक्षकों को हिरासत में ले लिया गया, शिक्षक और छात्रों का कहना है कि परीक्षा में अव्यवस्थाओं के कारण बच्चों का भविष्य बिगड़ रहा है
Eduquity कंपनी का विवाद क्या है:
छात्रों का कहना है कि एसएससी की सिलेक्शन Post Phage -13 परीक्षा अब नई एजेंसी Eduquity को दे दी गई है, छात्रों का कहना है कि यह जो एजेंसी है ये यह वही एजेंसी है जो पहले भी एग्जाम में जो घोटाले हुए हैं उनमें अपना योगदान दे चुकी है, जैसे व्यापम घोटाला जो पूरा देश जानता है, छात्रों का कहना है कि ऐसी कंपनियां अगर एग्जाम कराएंगी तो धांधली होना निश्चित है और छात्रों का भविष्य अंधकार पूर्ण होना निश्चित है, आपको बता दे की छात्रा और गुरु इसके खिलाफ ही आंदोलन कर रहे हैं
क्या कहना है गुरु और शिष्य का:
एसएससी सीजीएल में भर्ती को लेकर हो रही धांधलि के खिलाफ सैकड़ो छात्र और शिक्षक ने जंतर मंतर पर आंदोलन किया, छात्रों का कहना है कि यह जो eduquity एजेंसी है जो एसएससी की दूसरी परीक्षा करवाने जा रही है जिसमें करीब 30 लाख से ऊपर छात्र बैठते हैं, यह कहना है कि यह परीक्षा में पारदर्शिता नहीं होंगी क्योंकि छोटे परीक्षा में इतनी धांधली हो रही है तो फिर बड़े परीक्षा में भी धांधली हो सकती है, उनका कहना है कि फर्स्ट शिफ्ट में आए सवालों को दूसरे और तीसरे फेस में भी दोहराया जा रहा है,जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रभाव पड़ रहा है, और इसी के खिलाफ गुरु और शिष्य सब आंदोलन की भूमिका में आ गए हैं उनका कहना है कि इस एजेंसी को परीक्षा कराने का कोई हक नहीं है
जंतर मंतर पर हुआ व्यापक आंदोलन:
दिल्ली के जंतर मंतर पर सैकड़ो की संख्या में छात्र और टीचर पहुंचे काली पट्टी बांधकर और विरोध जताया, उनका कहना था कि eduquity जैसे विवादास्पद कंपनियां है उनको एग्जाम का ठेका क्यों दिया जा रहा है, व्यापम घोटाले में 20 कंपनी का नाम आया था, सरकार इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है, छात्रों और टीचरों का कहना है कि जब तक सरकार इस पर कोई कार्यवाही नहीं करेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा
परीक्षाएं आखिर क्यों रद्द हो रही है:
आखिर सरकार चाहती क्या है सबसे बड़ा सवाल यह है लड़के साल भर मेहनत करते हैं,दिन-रात एक करते हैं परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए और सरकार आसानी से परीक्षा रद्द कर देती है वह भी बिना किसी पूर्व सूचना के, छात्रों का कहना है कि हम इतना मेहनत करते हैं, घर से बाहर रहते हैं, पैसे खर्च होते हैं,समय जाता है और सरकार बिना किसी पूर्व सूचना के एग्जाम रद्द कर देती है तो इस पर आंदोलन नहीं करें तो क्या करें,आपको बता दे की कितने छात्रों का जो परीक्षा केंद्र वह भी गलत तरीके से आवंटित किया गया था, छात्रों ने अलग-अलग आरोप लगाए,कई जगह पेपर बीच में रुक गया,सरवर काम नहीं कर रहा था,कंप्यूटर खराब हो गया था ऐसे में सरकार के ऊपर आरोप लगे हैं परीक्षा के दौरान जो कि मेरे समझ से भारत के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, प्रशासन की इतनी बड़ी लापरवाही आखिर यह छात्रों के भविष्य को कहां ले जा रही है कि छात्र किस उम्मीद से आए थे, और किस उम्मीद पर जा रहे हैं
शिक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं:
भारत एक ऐसा देश है जहां बेरोजगारी और शिक्षा पर निरंतर सवाल होते रहते हैं,कोई भी सरकार हो वो ये दावा करती है कि अगर उनकी सरकार बनी तो शिक्षा और बेरोजगारी पर ज्यादा फोकस करेंगे,जबकि ऐसा नहीं होता इतनी सरकारे आई और गई लेकिन शिक्षा और रोजगार का मसला अभी तक हल नहीं हुआ, आपको बता दे कि एक आंकड़े के मुताबिक देखा जाए तो हर विभाग में कोई न कोई पोस्ट खाली है,सरकार इनकी नियुक्तियां क्यों नहीं कर रही हैं यह तो वही जाने, लेकिन अगर लड़के एग्जाम की तैयारी कर एग्जाम दे रहे हैं तो कम से कम वह व्यवस्था तो सरकार को मजबूत करनी चाहिए ताकि कोई धांधली ना हो,ऐसी कंपनियों को ठेका दिया जा रहा है जिनका शिक्षा से कोई मतलब नहीं है, जिनके कारण शिक्षा में अनेक धांधली सामने आ रही है, जिस शिक्षा के नीव पर भविष्य का निर्माण हो रहा है आज उसी को सरकार ध्वस्त करना चाहती है, यह तो सर्व विदित है कि नेता बनने के लिए कोई शिक्षा की आवश्यकता नहीं है, आप 8वी पास हो, हाई स्कूल पास हो, तो आप विधायक,सांसद मंत्री बन सकते हैं, लेकिन भारत को विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षा का होना बहुत जरूरी है क्योंकि शिक्षकों से ही भारत तरक्की कर सकता है ना कि नेताओं के अनर्गल प्रयासों से और अनर्गल बयानों से, यह देश का दुर्भाग्य ही है कि एक जिले का मालिक जिसको DM कहा जाता है जो अपनी आधी जिंदगी पढ़ाई करके मेहनत करके उस पद को हासिल करता है उसको कौन गाइड करता है जो आठवीं पास मंत्री है, जो हाई स्कूल पास मंत्री हो,यह ही भारत की सबसे बड़ी विडंबना है, अगर इसे सही किया जाएगा तो सब सही हो जाएगा
बहराल यह आंदोलन का रूप आने वाले समय में कितना उग्र होगा,शिक्षक और टीचरों का आंदोलन कब तक जारी रहेगा और सरकार इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है या नहीं या फिर बच्चों का भविष्य निगलती है, जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल