
सनातन धर्म के सर्वश्रेष्ठ गुरु अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को तोड़ दिया गया,इस अपमान की शंकराचार्य को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी है,मौनी अमावस्या पर बिना स्नान किए शंकराचार्य को वापस जाना पड़ा,प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से रोक दिया गया और उनकी पालकी को तोड़ दिया गया और उनके भक्तों को घसीट के बाहर का रास्ता दिखाया गया प्रशासन द्वारा यह भारत की संस्कृति के खिलाफ है और भारत की आत्मा पर सनातन धर्म का अपमान का प्रहार है,इस घटना के बाद शंकराचार्य ने सरकार पर साधु संतों का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया है,अपनी मुखर बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहने वाले शंकराचार्य इस बार खुद के शिकार होते हुए दिख रहे हैं
आईए जानते हैं पूरी कहानी क्या है:
प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से रोका गया,उनके शिष्यों को भी रोका गया,उनकी पालकी को भी प्रशासन द्वारा तोड़ा गया, उसके बाद शंकराचार्य ने अनशन की शुरुआत कर दी, भाजपा की सरकार पर साधु संतों के अपमान की उंगली उठने लगी है,आपको बता दे कि शंकराचार्य की पालकी को स्नान के स्थान तक जाने से रोक रही थी उसके बाद शंकराचार्य नें पैदल चलने की इच्छा प्रकट किया लेकिन उनके शिष्यों ने उन्हें जाने से मना कर दिया और इसी बात को लेकर शिष्य और पुलिस में झड़क हो गए उसके बाद प्रशासन ने शंकराचार्य के शिष्यों को पीटना शुरू कर दिया,आपको बता दे कि जब बात आगे बढ़ने लगी तो पुलिस ने कैंप में घुसकर शिष्यों के बाल को पकड़ के घसीटा,उसके बाद शंकराचार्य बिना स्नान किए लौट गए उसके बाद धरने पर बैठ गए
आईए जानते हैं शंकराचार्य ने क्या कहा:
शंकराचार्य का कहना है कि प्रशासन ने जब मना किया तो वोे रुक गए,उसके बाद प्रशासन से उनकी बातचीत हुई उन्होंने आश्वास्थ किया कि जो सहयोग चाहिए प्रशासन को वोे सहयोग हम देने के लिए तैयार हैं,हम 100 से 125 लोग हैं जो साथ में स्नान करने के लिए जा रहे हैं अगर प्रशासन चाहेगा तो हम एक पंक्ति में जा सकते हैं इससे किसी प्रकार की कोई भगदड़ नहीं बचेगी लेकिन अधिकारी नहीं माने फिर जब उन्होंने लौटने का निर्णय लिया तो देखा कि बड़े-बड़े अधिकारी संतो को शिष्यों को मार रहे हैं,पीट रहे हैं,घसीट रहे हैं,शंकराचार्य ने यह भी कहा कि प्रशासन को ऊपर से आदेश होगा की शंकराचार्य के शिष्यों को मारा जाए,यह सारा सरकार के इशारे पर हो रहा है और यह इसलिए हो रहा है कि जब महाकुंभ में भगदड़ मची थी तो हमने सरकार को जिम्मेदार ठहराया इस का बदला लिया जा रहा है हमसे और सरकार को खुश करने के लिए प्रशासन हमारा अपमान कर रही है
आखिर कौन है अविमुक्तेश्वरानंद:
अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में ब्रह्मानपुर गांव में हुआ था,वे एक ब्राह्मण परिवार से आते है,प्रतापगढ़ में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद गुजरात चले गए और वहां राजनीति और धर्म मे समान रुचि रखने वाले स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य राम चैतन्य के संपर्क में आए,उसके बाद शंकराचार्य ने संस्कृत की पढ़ाई शुरू की,पढ़ाई पूरी होने के पश्चात 1990 के दशक में उन्होंने संन्यास ले लिया और स्वामी करपात्री जी के बीमार होने पर उनकी सेवा में लग गए,करपात्री जी महाराज के निधन के बाद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के संपर्क में आए,उसके बाद उन्होंने संस्कृत विद्यालय से आचार्य की पढ़ाई पूरी करी उसके बाद 15 अप्रैल 2003 को उन्हें दंड संन्यास की दीक्षा दी गई,उसके बाद इनका नाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रखा गया,अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्हें ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बनाया गया,आपको बता दे की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत में स्नातक (BA) और स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की, इसके बाद उन्होंने वेद,पुराण,ज्योतिष,शास्त्र में भी विशेषज्ञता प्राप्त की,1996 में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य बने,आपको बता दे की ज्योतिषपीठ जोशीमठ (उत्तराखंड) में स्थित है जो आदि शंकराचार्य की चार प्रमुख पीठों में से एक है
हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं अविमुक्तेश्वरानंद महाराज:
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं,कभी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर तो कभी राम मंदिर के धार्मिक मामलों को लेकर,हाल ही में जब विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया गया तो कई मंदिरों को तोड़ा गया जिस पर शंकराचार्य ने विरोध जताया था और कहा था कि यह हिंदू परंपराओं का अपमान है और आज उन्हें प्रयागराज में अपमानित किया गया,अब देखते हैं कि उनका अनशन कब तक चलता है धन्यवाद
