ट्रम्प चाचा फिर से एक बार सनक गए

ट्रम्प चाचा को क्या हो गया है यह खुद अमेरिका की जनता नहीं समझ पा रही है,अभी हाल ही में आप लोगों ने देखा कि कैसे 50 लाख लोग उनके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे अमेरिका की गलियों में ऐसा माना जा रहा था कि उनकी सरकार को गिराने की अब कोशिश हो रही है, जिस नीति के साथ ट्रम्प राजनीति कर रहे हैं वह किसी को पसंद नहीं आ रहा,हमेशा किसी न किसी देश पर टैरिफ लगाना,किसी न किसी देश के खिलाफ बोलना यह डोनाल्ड ट्रंप के रक्त में बह रहा है,कभी चीन को धमकी देते हैं,कभी भारत को धमकी देते हैं कभी यह बोल देते हैं कि मैंने अभी तक सात युद्ध रूकवाये,उन्होंने यह भी कहा था कि भारत-पाकिस्तान का जो युद्ध हुआ था वह भी उन्होंने ही रुकवाया,ट्रंप किसी भी नेता की बेज्जती खुले मंच पर करने से बाज नहीं आ रहे हैं आखिर वह क्या चाहते हैं यह कोई नहीं जान पता है,बस उनको समूचे विश्व में सुर्खियों में बने रहना हैhttp://news24hourslatest.in
रूस के तेल पर लगाया प्रतिबंध:
आपको बता दे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियां जिसका नाम है रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाया है,और इस कारण वैश्विक तेल की कीमतों में 5% की वृद्धि हो गई है, आपको बता दे कि भारत 17 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन रूस से आयात करता है,अब लगता है कि अमेरिका के इस निर्णय के बाद भारत को रूसी तेल के आयात में कटौती करने पर विचार करना चाहिए लेकिन भारत सरकार ने अभी तक अमेरिका के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया और रिलायंस ने भी साफ-साफ कह दिया कि वह सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार काम करेगी
युद्ध को रोकने की वजह से लगाया प्रतिबंध:
जैसा कि हम सबको पता है रूस और यूक्रेन में युद्ध चल रहा है ऐसे में अमेरिका ने कहा है कि अगर युद्ध को रोकना है तो रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा,ट्रंप का कहना है कि उन्होंने रूस को चेतावनी भी थी कि अगर वह युद्ध समाप्त नहीं करेगा तो अमेरिका उसके खिलाफ बड़ा एक्शन ले सकता है अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट में कहा है कि अमेरिका रूस की उस वित्तीय क्षमता को निशाना बना रहा है जिससे वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बड़े भू युद्ध को वित्त पोषित कर रहा है,अमेरिका का कहना है कि अगर तेल की आयात निर्यात में कमी आएगी तो रूस के ऊपर आर्थिक अर्थव्यवस्था का प्रभाव पड़ेगा जिसकी वजह से रूस युद्ध समाप्त भी कर देगा
यूक्रेन का क्या कहना है:
यूक्रेन के राष्ट्रपति जैलेंसकी ने रूस के खिलाफ जो निर्णय अमेरिका ने लिया है उसकाे धन्यवाद उन्होंने किया और कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाया है अमेरिका ने साथ ही कहा कि रूस को युद्ध विराम के लिए सहमत कराने के लिए उस पर और दबाव बनाने की आवश्यकता होगी
रूस का क्या कहना है:
रूस के नए अमेरिकी प्रतिबंधों को अनुत्पादक बताया और चेतावनी विधि की यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की उसकी कोई शर्तों में बदलाव नहीं होगा,रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ने प्रतिबंध से संभावित प्रभाव के सवाल पर नजरअंदाज कर दिया और कहा कि रूस ने ऐसे प्रतिबंधों के प्रति मजबूत प्रतिरक्षा विकसित किया है,आपको बता दे कि रूस का तेल और गैस राजस्व से वर्तमान में साल दर्शन 21% कम हो गया है जो उसके बजट का एक चौथाई हिस्सा है,कुल मिलाकर रूस का कहना कि अमेरिका कुछ भी कर ले,रूस अपनी बातों पर अडिग रहेगा,अमेरिका के किसी भी प्रतिबंधों का रूस पर कोई गहरा असर नहीं पड़ेगा
भारत पर इसका क्या असर पड़ा:
आपको बता दे कि भारत औसतन 17 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन रूस से आयात करता है,अमेरिका के इस प्रतिबंध के मध्य नजर अब भारत को रुसी तेल के आयात में कटौती पर विचार करना पड़ेगा,आपको बता दे की इस कारण वैश्विक तेल की कीमतों में 5% की वृद्धि भी हो गई है लेकिन अमेरिका के इस फैसले से भारत सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं किया ना ही किसी मंत्रालय से कोई आधिकारिक बयान आया है हालांकि भारत में निजी क्षेत्र की तेल कंपनी रिलायंस ने कहा है कि वह सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार काम करेगी
