उपराष्ट्रपति का समर्थन नहीं करने का कारण क्या है विपक्षी दल का:Vice President

देश को मिलने जा रहा है उनका उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार,जी हां दोस्तों एनडीए के तरफ से उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित हो चुका है जिसका नाम है सी पी राधाकृष्णन, महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन को एनडीए ने अपना उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया है,पर उपराष्ट्रपति का समर्थन विपक्षी दल करेगा या नहीं करेगा,वैसे भी प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दल को समर्थन करने की अपील की हैhttp://news24hourslatest.in
उपराष्ट्रपति की खबर:
अक्सर आपने यह देखा होगा कि विपक्ष अपनी कोई भी रणनीति बनाता है उसको लेकर आगे बढ़ता है,लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी-कभी ऐसा करते हैं कि विपक्ष की रणनीति फेल हो जाती है,मतलब विपक्ष की रणनीति के बीच में एक ऐसा जाल बिछा देते हैं कि विपक्ष उसी में उलझ जाता है,अब एनडीए के तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन जो कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भी हैं,अब यह मास्टर स्टॉक जो प्रधानमंत्री मोदी ने चला है अब देखते हैं इसका क्या लाभ होता है
विपक्षी दल क्या करेंगे:
महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन को एनडीए ने अपना उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया है,ऐसा कहा जा रहा है कि विपक्ष दल के जो गद्यावर नेता है उनको भी प्रधानमंत्री मोदी ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के जरिए साध लिया है,साथ ही दक्षिण के जो भी नेता हैं वह भी कहीं ना कहीं पीएम मोदी के इस चक्र के शिकार हो सकते हैं
क्या उद्धव ठाकरे पर यादव भारी पड़ेगा:
एनडीए ने जब अपना उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को चुना था तब आपको पता होगा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी असहज हो गई थी,क्योंकि ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री थी और जगदीश धनखड़ उस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हुआ करते थे, उसके बाद ममता बनर्जी ने जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का ऐलान कर दिया,अब कहां जा रहा है कि यही दुविधा एमके स्टालिन जो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं और उद्धव ठाकरे को लेकर आ गई है,आई समझते हैं समीकरण क्या है अगर उद्धव ठाकरे राधाकृष्णन को वोट नहीं देते हैं तो यह सीधा मैसेज जाएगा महाराष्ट्र में की उद्धव ठाकरे ने उनका समर्थन नहीं किया जिससे उनकी राजनीतिक छवि और खराब होगी,अब उद्धव ठाकरे के पास फिलहाल दो ही विकल्प है या तो वह मौन रहे या फिर समर्थन दे अन्य कोई विकल्प नहीं है,इसी कारण संजय रावत ने भी बयान दिया है कि राधाकृष्णन बहुत अच्छे इंसान है और उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के लिए सही है
एमके स्टालिन की मुश्किलें क्यों बढ़ गई:
दक्षिण के दिग्गज नेता है एमके स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इनकी भी मुश्किलें मोदी ने बढ़ा दिए,कारण यह है की सी पी राधाकृष्णन तमिलनाडु के हैं और एक कट्टर आरएसएस समर्थक भी हैं,अब सामने बात आई स्टालिन समर्थन किसको देंगे अगर उपराष्ट्रपति को स्टालिन समर्थन देते हैं तो फिर डीएमके मे एक अलग संदेश जाएगा उनके वोटरों पर प्रभाव पड़ेगा कि आखिर उन्होंने कैसे एनडीए को समर्थन दिया,और अगर विरोध करते हैं तो भी मैसेज जाएगा कि उन्होंने तमिलनाडु के बेटे को सपोर्ट नहीं किया,यानी कि स्टालिन के लिए भी यह चुनाव बहुत असमंजस का कारण बना है,मेरा मानना यह है की एमके स्टालिन को ज्यादा प्रभाव पड़ेगा सपोर्ट करने का क्योंकि एक तो यह तीसरी उपराष्ट्रपति हैं दक्षिण की तरफ से तो जनता चाहेगी कि इनका अधिक से अधिक सपोर्ट हो,फिलहाल देखना है बाकी है कि क्या रड़नीति करते हैं
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी क्या करेंगे:
विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस समय विपक्ष और उनके गठबंधन साथी के सबसे बड़े नेता के रूप में उभर रहे हैं, सबको पता ही है कि चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी का सिलसिला अभी चल ही रहा है,जिसमें राहुल गांधी को काफी हद तक फायदा मिलता दिख रहा है, अब राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वह सी पी राधाकृष्णन की राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन करेंगे क्योंकि किसी तरह वोट चोरी को लेकर SIR के मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने विपक्ष के जितने भी गठबंधन के साथी हैं उनको एकजुट किया है,और अगर डीएमके, उद्धव ठाकरे यह उपराष्ट्रपति का समर्थन करेंगे तो फिर एक विपक्षी दल में और उनके गठबंधन के साथियों में फूट पड़ सकती है,आपको पता होगा कि 2022 में जब बीजेपी ने जगदीश धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया था तो ममता बनर्जी को विपक्ष में होकर भी समर्थन करना पड़ा,कारण साफ साफ दिख रहा है कि अगर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन करते हैं तो यह साफ मैसेज जाएगा कि कांग्रेस विपक्षी गठबंधन को एकजुट नहीं कर पा रही है,अब जाहिर सी बात है जब राहुल गांधी एनडीए का सपोर्ट कर देंगे तो यह मैसेज तो जाएगा ही कि राहुल गांधी बार-बार विपक्षी गठबंधन में फूट लाने की कोशिश करते हैं, एकत्रित नहीं कर पाते हैं
खैर अब यह देखना है कि मोदी ने जो यह मास्टर स्ट्रोक चला है सी पी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करके उस पर कितने विपक्षी दल इनका समर्थन कर रहे हैं और कितना विरोध कर रहे हैं, विपक्षी दालों का हाल ऐसा हो गया है कि उनके एक तरफ कुआं है और एक तरफ खाई है,समझ में नहीं आ रहा होगा कि करना क्या है अगर वह समर्थन करते हैं तो उनके राजनीतिक प्रभाव पर भी असर पड़ेगा अगर विरोध करते हैं तो जनता के बीच में असर पड़ेगा,देखते हैं अब आगे क्या होता है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल