आजादी से लेकर अब तक वोट चोरी का सच:Vote Chori

जैसा कि हम सबको पता है राहुल गांधी इस समय चुनाव आयोग और बीजेपी को लेकर आक्रमण है, महाराष्ट्र में हुए चुनाव धांधली को पूरे देश के सामने लाकर खड़ा कर दिया,उनका कहना है कि चुनाव आयोग 1 लाख वोटो की चोरी की है, जिसमें फर्जी मतदाता, नकली वोट, कितने ऐसे नाम है जो हजारों बार आए हैं ऐसे कोई सगीन आरोप लगाए,अब राहुल गांधी 17 अगस्त से SIR के मुद्दे को लेकर बिहार में रैली कर रहे हैं बीजेपी और चुनाव आयोग पर बरस रहे हैं,जबकि आरोपो का सवाल का जवाब देने के लिए चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कि राहुल गांधी जो आरोप लगा रहे हैं, उनके लिए वह एफिडेविट दे या 7 दिन में देश से माफी मांगे क्योंकि जो भी वो आरोप लगा रहे हैं सब निराधार है,लेकिन कांग्रेस और उनके साथियों का कहना है की मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं, बीजेपी के प्रवक्ता बने है,इसलिए हम उनके खिलाफ महाभियोग लाएंगेhttp://news24hourslatest.in
अब जानिए वोट चोरी का मतलब क्या है:
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगाया है,2014 के पहले कांग्रेस की सरकार थी 2014 के बाद भाजपा की सरकार आई,भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी 282 सिट मिली थी, उसके बाद भाजपा को 2019 में और भी प्रचंड बहुमत मिला 303 सिट मिला,लेकिन जब 2024 का लोकसभा का चुनाव हुआ तो भाजपा को बहुमत से भी कम सिट मिला यानी की 240 सिट मिली थी,और भाजपा को अपने अन्य गठबंधन के साथियों के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी,अब आप सोचिए अगर चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिला रहता तो 240 के बजाय 440 सिट आ जाती,यह स्पष्ट है कि 2024 में भाजपा की सीट घट गई और गठबंधन के साथ सरकार बनी यह कैसे माने की वोट चोरी हुई है,अगर वोट चोरी हुई होती तो और प्रचंड सीट आनी चाहिए,कई राज्यों में भाजपा को विधानसभा में हार का सामना करना पड़ा,यहां भी स्पष्ट है अगर वोट चोरी की जा रही है बीजेपी के द्वारा तो यहां भी उन्हें जितना चाहिए वह हार क्यों गए
डेमोक्रेसी को क्यों बदनाम किया जा रहा है:
दोनों पार्टियों चाहे वह बीजेपी हो या कांग्रेस एक दूसरे पर यह वोट चोरी का आरोप लगा रहे है,बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस अब तक वोट चोरी करती थी तो कोई नहीं देखा और हम साफ है कोई चोरी नहीं करते हैं तो सबको वोट चोरी दिख रहा है, तो एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो चलता रह रहा है,अगर कांग्रेस को पूरा विश्वास है कि वोट चोरी हुई है तो उनको हाई कोर्ट में जाना चाहिए,अगर वह हाई कोर्ट में जाते और अपील करते तो चुनाव आयोग का डाटा सेफ रहता जो 45 दिनों तक वैलिड रहता है,चुनाव आयोग ने पहले ही कह दिया राहुल गांधी आरोपो की जाँच के लिए हलफनामा लिखकर दीजिए और फिर आरोपो की जांच होगी,वहीं बीजेपी चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए राहुल गांधी के सब आरोपो को निराधार बता रही है, सवाल पूछा जा रहा है मुख्य चुनाव आयुक्त से और जवाब में बीजेपी खड़ी है,अरे भाई आप अगर बीजेपी को लगता है की वोट चोरी नहीं हुई है हुई है तो चुनाव आयोग को इसका जवाब देने दीजिए,आप चुनाव आयोग बनाकर जवाब देंगे तो जाहिर सी बात है जनता के बीच में यह मैसेज जाएगा की दाल में कुछ काला है
1952 के चुनाव में क्या हुआ था:
1952 में स्वतंत्र भारत का पहला इलेक्शन हुआ जिसमें प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री हुए जबकि उनको जीरो वोट मिले थे,सबसे अधिक जो वोट मिले थे वो सरदार वल्लभभाई पटेल को,एक वाक्या है 1952 का ही है, आप सब ने पढ़ा होगा कि रामपुर से मौलाना आजाद चुनाव में उतरे थे और चुनाव के नतीजे आए तो वह हार गए,और जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पता चला तो उन्होंने मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को फोन किया और कहा कि मौलाना हारना नहीं चाहिए और वो हार गए,तब उस समय के जो ऑफिसर थे उनका कहना था कि रिजल्ट घोषित हो गया विपक्ष का उम्मीदवार जीत गया अब कैसे परिवर्तन होगा, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने गोविंद बल्लभ पंत जो मुख्यमंत्री थे उनको कहा कि अगर मौलाना नहीं जीते तो तुमको मुख्यमंत्री पद से हटना होगा,तब मुख्यमंत्री पंत ने दबाव में DM से बात कि और रिजल्ट को बदलवा दि और उस समय के डीएम ने कहा कि अब रिजल्ट कैसे बदल सकता है हमने उम्मीदवार घोषित कर दिया है,और उसे समय चुनाव की प्रक्रिया यह थी की अलग-अलग बक्से होते थे उम्मीदवारों के, कोई मोहर वगैरा नहीं होता था जिसमें ज्यादा पेपर पड़े वहीं जीत जाता था,और उसके बाद जो हुआ वह अकल्पनीय था जो कैंडिडेट वहां से जीता था उसके बक्से में से वह पेपर निकाल कर मौलाना आजाद के बक्से में डाल दिया गया और उन्हें बाद में विजेता घोषित कर दिया गया,उस समय के जो डायरेक्ट इनफॉरमेशन थे उन्होंने अपनी किताब में इस पुरे प्रकरण का जिक्र किया है
तो वोट चोरी का सिलसिला ऐसे होता था की कैसे एक प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री को धमकता है और मुख्यमंत्री डीएम को धमकता है और डीएम जीते हुए उम्मीदवार को हारा घोषित कर देता है,अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है, बनारस में कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी पहले तीन-चार- पांच चरणों में पीछे चल रहे थे और अजय राज उनके प्रतिद्वंदी थे वह आगे चल रहे थे, बाद में प्रधानमंत्री को किसी भी तरीके से जिताया गया वरना आज वहां के सांसद अजय राय होते,कांग्रेसियों ने उन्हें संसद भी घोषित कर दिया है की अजय राय चुनाव जीत चुके थे प्रधानमंत्री को गलत तरीके से चुनाव में जिताया गया,तो आरोप लगाना बहुत आसान है लेकिन अगर आप भूल जाते हैं कि उस आरोप की शुरुआत आपसे ही रही है तो यह भी गलत है, पहले अपने अंदर भी झांक कर देखिए की क्या गलत है क्या सही है,उसके बाद किसी पर आरोप लगाइए,और ताजा खबरें पढ़ने के लिए मेरा न्यूज़ चैनल पढ़ते रहिए