क्या जल्दी ही BRICS देश अपनी नई करेंसी बनाएगा:World News

आपको पता है कि BRICS देश में ब्राज़ील,रूस,इंडिया चीन और साउथ अफ्रीका हैं,अगर यह देश अपनी खुद की करेंसी बनाने लगे तो विश्व पर इसका क्या असर पड़ेगा यह भी सोचने वाली बात है,क्योंकि ऐसी खबर आई है कि BRICS देश अपनी एक करेंसी भी बना सकते हैं,हालांकि ब्रिक्स देश में अमेरिका नहीं है फिर फिर भी ब्रिक्स देश अगर अपनी करेंसी बनाने लगे तो विश्व के व्यापार पर बहुत बड़ा प्रहार होगाhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं क्या होगा अगर BRICS अपनी करेंसी बनाने लगे:
ब्रिक्स में आने वाले देश ब्राजील, रूस, इंडिया चीन और साउथ अफ्रीका है,अगर यह देश अपनी एक अलग करेंसी बनाने लगे तो इसका सबसे बड़ा असर जो पड़ेगा वह पड़ेगा डॉलर पर,क्योंकि हम सबको पता है कि दुनिया की 80 से 50% व्यापार डॉलर में ही होती है, और आपको बता दे कि ब्रिक्स देश दुनिया की 40% आबादी और पूरे विश्व की 32% जीडीपी कंट्रोल करते हैं, यानी की सोचीये अगर यह देश अपनी करेंसी बना ले तो विश्व में इसका क्या असर पड़ेगा,अमेरिका यह बखूबी जानता है कि डॉलर से ही अधिकतम व्यापार होते हैं अगर BRICS देश अपनी करेंसी बनाता है तो अमेरिका बैक फुट पर आ सकता है
क्या प्रभाव पड़ेगा अमेरिका पर:
अगर BRICS अपनी अलग करेंसी बनाता हैं तो सबसे बड़ा प्रभाव डॉलर पर पड़ेगा मतलब, डॉलर बहुत तेजी से गिरने लगेगा,और पूरे विश्व में डॉलर की जो वैल्यू है वह घटने लगेगी,और जब डॉलर की वैल्यू घटने लगेगी तो उसकी अर्थव्यवस्था भी डगमगा जाएगी,फिर अमेरिका की सारी तानाशाही खत्म हो जाएगी,आज जैसा कि हम सबको पता है कि अमेरिका अपनी ताकत का नाजायज फायदा उठाता है,जैसा की हाल ही में भारत को झेलना पड़ा,हम सबको पता है कि अमेरिका ने 50 प्रतिशत का टैक्स भारत पर लगाया है,और अगर ब्रिक्स करेंसी सर्कुलेट करने लगी विश्व में तो अमेरिका की पावर धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी
क्या BRICS की करेंसी डॉलर को खत्म कर देगी:
ब्रिक्स देश अगर अपनी करेंसी तैयार करते हैं तो जाहिर सी बात है डॉलर की कीमत गिरेगी और जब डॉलर की कीमत गिरेगी तो अमेरिका की व्यापार करने की शक्ति भी कमजोर होगी और उसकी अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी,जैसा कि हमको पता है कि डॉलर को ग्लोबल रिज़र्व करेंसी माना जाता है,और अगर ब्रिक्स की करेंसी मजबूत होती है तो कई देश जो हैं वह डॉलर की बजाय BRICS की करेंसी से व्यापार करना चाहेंगे,जिससे डॉलर की वैश्विक मांग है वह घटने लगेगी
ब्रिक्स की करेंसी से भारत को क्या फायदा होगा:
अगर BRICS देश अपनी करेंसी विश्व में लाते हैं तो इससे भारत को यह फायदा होगा कि गैस, तेल, खाने पीने के आइटम्स, केमिकल्स जो ईरान सऊदी अरब से आता है वह ब्रिक्स करेंसी से आना शुरू हो जाएगा,और हमें डॉलर की जरूरत पड़ेगी नहीं,और सबसे खास बात की भारत की विदेशी मुद्रा भंडार भी सुरक्षित रहेगा, हालांकि भारतीय रुपए में भी इसका प्रभाव पड़ेगा
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा:
अगर BRICS अपनी करेंसी की शुरुआत करते हैं तो शायद एशिया अफ्रीका जैसे देश ब्रिक्स की करेंसी को अपनाने लगेंगे,क्योंकि उनको डॉलर की समस्या आए दिन सताती है और इस यह समस्या BRICS करेंसी दूर कर सकती है
आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा:
ब्रिक्स अगर अपनी करेंसी लाता है तो विदेशी व्यापार सस्ता हो सकता है और महंगाई पर नियंत्रण भी हो सकता है और जाहिर सी बात है डॉलर से भरोसा धीरे-धीरे उठता जाएगा,विदेश में पढ़ाई करना, इलाज करवाना या पैसा निवेश करना यह सब चीज सस्ती हो जाएंगे,जिससे विकासशील देशों को भी बहुत फायदा मिलेगा
ब्रिक्स देश को करेंसी बनाने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
सबसे बड़ा सवाल तो यही है अगर ब्रिक्स देश अपनी करेंसी बनाता है तो सबसे बड़ा चुनौती का प्रश्न यह है कि चीन उस पर दबाव भी डाल सकता है जो कि भारत को पसंद नहीं होगा,क्योंकि BRICS देश में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन है और वह चाहेगा कि उस करेंसी पर उसका दबदबा हो,इसीलिए करेंसी की वैल्यू तय करना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि सबकी अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं हैं
खैर हमने तो बता दिया कि ब्रिक्स देश अगर अपनी करेंसी निकालता है तो उसका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा, विश्व के व्यापार पर क्या असर पड़ेगा, भारत पर क्या असर पड़ेगा,जैसे भारत की अर्थव्यवस्था सुधरेगी,परंतु ऐसा कब होगा यह तो भविष्य पर निर्भर करता है,वैसे भी ब्रिक्स देशों का काम है आपसी आर्थिक सहयोग, व्यापार को बढ़ाना निवेश करना, डॉलर पर निर्भरता कम करना, वैसे भी आपको बता दे कि ब्रिक्स देश ने न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाया है जो विकासशील देशों को सस्ती दरों पर कर्ज देता है, ब्रिक्स वैश्विक मंच(जैसे UN, WTO, IMF) पर मिलकर विकासशील देशों के लिए आवाज उठाता है विज्ञान में सहयोग देना तकनीक में सहयोग देना और भी बहुत कुछ चीज हैं आगे क्या होता है फिलहाल ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल