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इधर नेता व्यस्त है अपने चुनाव में,उधर भगवान का कहर जारी है

इधर नेता व्यस्त है अपने चुनाव में,उधर भगवान का कहर जारी है

इधर नेता व्यस्त है अपने चुनाव में,उधर भगवान का कहर जारी है
इधर नेता व्यस्त है अपने चुनाव में,उधर भगवान का कहर जारी है
जी हां दोस्तों एक तरफ बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं,जिसको मद्देनजर रखते हुए सारी पार्टियां कांग्रेस को, भाजपा हो,आरजेडी हो सपा हो,बसपा हो,सब बिहार में लगे हुए हैं वोट बैंक इकट्ठा करने में,कभी राहुल गांधी इलेक्शन कमीशन और बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं तो कभी भाजपा उनके वोट अधिकारी यात्रा को घुसपैठिया बचाव यात्रा बता रही है, तो कभी मोदी की मां को गाली देने का मुद्दा तुल पकड़ रहा है, लेकिन इसी बीच इन नेताओं को यह समझ में नहीं आ रहा है कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश,हरियाणा किस स्थिति से गुजर रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
बाढ़ बारिश और तबाही से परेशान उत्तर भारत:
उत्तर भारत और पहाड़ी राज्यों में इस समय जनजीवन अस्त-व्यस्त चल रहा है,जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड, हरियाणा,पंजाब, उत्तर प्रदेश के लोग बाढ़ से परेशान है,हरियाणा के कई जिलों में पिछले दो दिन से लगातार बारिश हो रही है,पंजाब में लोग त्राहि त्राहि मचा रहे हैं,सड़के धस गई है,घर बह गए, ट्रेन स्थगित हो रही है,वैष्णो देवी माता का दर्शन भी बंद कर दिया गया है, कितने तीर्थ यात्री जो दर्शन करने को निकले हैं वह फस गए हैं,लेकिन हमारी सरकार क्या कर रही है?विपक्ष क्या कर रहा है?केवल जो गैर सरकारी संगठन है वह मदद के लिए आगे आ रहा है, लोगों की भावनाओं को समझ रहा है,बाकी सरकारी एजेंसियां कहां है?
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सरकार व्यस्त है चुनाव प्रचार में:
इधर बाढ़ से लोग बेघर हो रहे हैं उधर सरकार और अन्य पार्टियां प्रचार में लगी हुई है बिहार विधानसभा चुनाव मे, क्या पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है,जहां चुनाव होता है वह राज्य सबसे बढ़िया हो जाता है और चुनाव खत्म होते ही उसे भूल जाया जाता है,केंद्र सरकार हो,विपक्ष की पार्टियां हो,सारे नेता लगे हुए बिहार के विधानसभा चुनाव में जनता को लुभाने में, और बाढ़ ग्रसित इलाकों को कौन देख रहा है गैर सरकारी संगठन? सरकार सो रही है, विपक्ष सो रहा है और जनता की नींद उड़ चुकी है,आखिर यह बाढ़ जब आता है उसके बाद ही सरकार कुछ सोचती है इसका प्रबंधन पहले से क्यों नहीं किया जाता है? बाढ़ से कैसे बचना है इसका संसाधन सरकार क्यों नहीं जुटा पाती हैं?जब बाढ़ आता है तो कुछ एजेंसी एक्टिव हो जाती हैं तब सब कुछ तबाह हो चुका होता है उसके बाद केवल एक चीज बचती है वह है संतावना,या कुछ आर्थिक लाभ मिल जाता है क्या इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा? कैसे आने वाली भविष्य की परेशानी सॉल्व हो जाएगी? हम वोट देते हैं,सरकार बनाते हैं,ताकि कोई ऐसी आपातकाल स्थिति भी आए तो उसके लिए सरकार हमारे लिए खड़ी रहे लेकिन वोट मिलने के बाद सब कुछ बदल जाता है, आपदा में फंसे लोगों को थोड़ी बहुत राहत दे दी जाती,है उसके बाद उसे भुला दिया जाता है जबकि हर सरकार को पता है कि यह आपदा हर वर्ष आने वाली है तो उसका निवारण की प्रक्रिया क्यों न पहले ही ढूंढ ली जाए? लेकिन नहीं ऐसा नहीं हो सकता
अटल जी ने क्या कहा था:
भारतीय जनता पार्टी को खड़ा करने वाले,भारत रत्न पुरस्कृत,दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने सदन के पटल पर खड़े होकर कहा था की सरकार आएंगी जाएंगी लेकिन यह देश रहना चाहिए,मैं पूछना चाहता हूं उनके पार्टी के अनुयायियों से क्या ऐसे ही देश को सुरक्षित रखेंगे?आपदा कहीं आती है तो हेलीकॉप्टर से सफर करके नीचे का हाल जान लेते हैं,कभी ऐसा नहीं हुआ कि उसम बाढ़ मे उतरे तो पता चलेगा आपदा में अवसर क्या होता है,क्या अटल जी की यह दो लाइन है को कोई नेता हो चाहे वह केंद्र का हो,चाहे वह विपक्ष का हो,चरितार्थ करता है जरा सोच के आप बताइए
केवल भाषण और थोड़ी आर्थिक मदद जनता खुश:
भारत की यही खूबसूरती है कि जब कोई विपत्ति आती है तो सरकार थोड़ी बहुत भाषण देती हैं, आर्थिक मदद देती है और जनता खुश हो जाती है उसका निवारण पूर्ण रूप से कैसे हो,ना तो सरकारी बताती हैं और ना ही जनता पूछती है,शायद इसीलिए भारत का हाल अब तक ऐसा रहा और फिर भी अगर हम नहीं सुधरेंगे तो आगे भी ऐसे ही रहेंगे,हम सरकार से सवाल पूछने में डरते हैं और घर में सरकार की बुराई करते हैं,हमें हमारा लोकतंत्र, हमारा संविधान यह इजाजत देता है कि अगर आपको असुविधा हो रही है तो आप उसके खिलाफ आंदोलन करो और यह जनता को करना पड़ेगा अगर विपत्ति से बाहर आना है तो,वरना सरकार केवल वोट लेंगी और आपका कुछ भला नहीं होगा,बाढ़ से लोग प्रभावित होते हैं लेकिन किसी नेता का बेटा या नेता नहीं फसता उस बाढ़ में,आम जनता फस्ती है,और फिर यह पार्टी के जो कार्यकर्ता है वह क्या करेंगे,पार्टियों के कहने पर बिस्किट, दूध का पैकेट, वितरण करेंगे उसके बाद फेसबुक पर फोटो लग जाएगा गरीबों की मदद करते हुए,और उसमें भी घोटाला हो जाएगा,पैसा आएगा सरकार से और उसमें भी बचा लिया जाएगा मंत्री द्वारा, अभी भी वक्त है संभल जाइए,सोचिए, समझिए और अपने हक की लड़ाई खुद लड़ीये
पंडित गोविंद दास की दो पंक्तियां मुझे याद आ गई:
“फुर्सत तो मुझे भी बहुत थी देश के लिए,
जब पेट भर गया तो मुझे नींद आ गई”

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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