राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने पर एनडीए को बिहार में कैसे फायदा मिल सकता है?

भारत को मिल गया उसका द्वितीय नागरिक यानी कि उपराष्ट्रपति,सी पी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति का चुनाव जीत गए हैं,जस्टिस बी.सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार थे,एनडीए के तरफ से सी पी राधाकृष्णन को मिले 452 वोट वहीं विपक्ष की तरफ से सी बी सुदर्शन को मिले 300 वोटhttp://news24hourslatest.in
मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया उपराष्ट्रपति चुनाव का नतीजा:
उपराष्ट्रपति के निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने प्रेस कांफ्रेंस करके मतगणना की जानकारी दी,उन्होंने बताया कि कुल 767 सांसदों ने उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोटिंग की जिसमे की 752 वोट वैलिड करार दिए गए और 15 अमान्य बताए गए,विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले वही एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन को 452 वोट मिले,उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए 98% वोटिंग हुई थी
आईए जानते हैं उपराष्ट्रपति के वोटिंग के बारे में:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 769 सांसदों ने उपराष्ट्रपति के लिए वोटिंग की,उपराष्ट्रपति के चुनाव में 98% वोटिंग हुई,लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं तथा इसमें विप जारी नहीं होता है,यूपी से बीजेपी सांसदों,केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के ऑफिस वाणिज्य भवन और महाराष्ट्र के बीजेपी सांसद भूपेन्द्र यादव के आवास पर जुटे,इस दौरान उपराष्ट्रपति पद पर वोटिंग से पहले बातचीत हुई,केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के घर पर बिहार और झारखंड के सांसद एकत्र हुए,उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य वोट डालते हैं.राज्यसभा के नामित सदस्य भी मतदान के पात्र होते हैं.उपराष्ट्रपति चुनाव को विपक्ष ने वैचारिक लड़ाई बताया है,जबकि संख्याबल सत्तारूढ़ राजग के पक्ष में है
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा:
एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन 452 वोट से उपराष्ट्रपति घोषित हो गए हैं, इस पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि उनका जीवन हमेशा समाज की सेवा गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित रहा,मुझे भरोसा है कि वह एक शानदार उपराष्ट्रपति होंगे,जो हमारे संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा:
कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को बधाई देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते हैं संसद के नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति संसद की सर्वोच्च परंपराओं के आदर्श को बनाए रखते हुए विपक्ष को समान स्थान और सम्मान देंगे और सट्टा रोड दल के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे
आईए जानते हैं कुछ सी पी राधाकृष्णन के बारे मे:
1996 में सी पी राधाकृष्णन को बीजेपी का सचिव नियुक्त किया गया उसके बाद कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए,2004 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी संबोधित किया,2016 में उन्हें कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया,जहाँ उन्होंने चार साल तक काम किया,उनके नेतृत्व में भारत से नारियल रेशा का निर्यात 2532 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया. 2020 से 2022 तक राधाकृष्णन बीजेपी के केरल प्रभारी थे.
उपराष्ट्रपति का कार्य:
उपराष्ट्रपति को भारत का द्वितीय नागरिक कहा जाता है और एक यह संवैधानिक पद है,भारत के उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का सभापति भी कहा जाता है,उपराष्ट्रपति राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं,वे सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुसार चलाते हैं,यदि किसी विषय पर वोटिंग होती है और बराबरी हो जाती है,तो उपराष्ट्रपति का निर्णायक मत (Casting Vote) माना जाता है,अगर राष्ट्रपति का पद खाली हो जाए इस्तीफा के कारण या किसी मृत्यु के कारण तो तो राष्ट्रपति चुने जाने तक उपराष्ट्रपति ही उसे पद को संभालते हैं,कहा जाए तो अधिकतम 6 महीने तक उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद पर बने रहते हैं,कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं,राष्ट्रपति की सलाह के अनुसार अन्य औपचारिक कार्य भी करते है
क्या बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लाभ होगा: एनडीए गठबंधन की तरफ से सी पी राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर नियुक्त हो चुके हैं क्योंकि उन्हें मिला है 452 वोट,बीजेपी ने बहुत सोच समझ के यह कदम उठाया है,आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन गोंडर (कोंगु वेल्लालर गौंडर) समुदाय से आते हैं,जो तमिलनाडु में एक प्रभावशाली ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) जाति मानी जाती है,इससे कहीं ना कहीं भाजपा को बिहार विधानसभा चुनाव में भी लाभ मिलेगा क्योंकि प्रभावशाली ओबीसी वोट बीजेपी के पहले में जा सकते हैं
