बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़:SSC CGL

आपको बता दे कि पिछले कुछ दिनों में SSC के 32 एग्जाम कैंसिल होने की खबर आई है,सरकार पक्ष की हो या विपक्ष की हो किसी ने अभी तक इस मुद्दे पर जमकर नहीं बोला है, सब चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्यों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है,केंद्र सरकार क्या कर रही है? क्यों प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं या फिर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं क्या कारण है पेपर रद्द होने का:
मीडिया और अन्य खबरों के माध्यम से यह बताया गया है कि जो SSC के पेपर रद्द हुए हैं उनका मुख्य कारण है
1-कंप्यूटर में दिक्कत होना, सॉफ्टवेयर में दिक्कत होना
2-जो भी परीक्षा केंद्र नियुक्त किए गए हैं उनकी तैयारी पूरी नहीं थी
3-परीक्षा केंद्रों का समय पर व्यवस्था न हो पाना
4-कुछ परीक्षा केंद्रों में जो उपकरण इस्तेमाल होते हैं पेपर के लिए वह पुराने थे जिसकी वजह से बहुत दिक्कत आई
5-मैनेजमेंट की बहुत बड़ी लापरवाही हुई है जैसे की परीक्षा केंद्र बदल जाना,छात्रों के प्रवेश में बाधा उत्पन्न होना
एसएससी ने क्या प्रतिक्रिया दी:
एसएससी के अध्यक्ष ने बताया कि अधिकांश केंद्रों पर परीक्षा सुव्यवस्थित हुई है लेकिन एसएससी ने यह कहते हुए अपना पड़लाझाड़ दिया कि जो भी पेपर रद्द हुए है उनको नए तरीके से करने की तैयारी हो रही है, एसएससी का मानना है कि कुछ तकनीकी खराबी के वजह से पेपर रद्द हुए हैं लेकिन उसका निवारण जल्द ही होगा और फिर पेपर भी होंगे,प्रभावित विद्यार्थियों को पुनःपेपर करने की व्यवस्था की जा रही है
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़:
किसी भी देश की तरक्की उसके भविष्य से होती है यानी की युवाओं से, अगर युवा चाहे तो देश के हर सिस्टम को हिला सकता है,और उसका सबसे बड़ा हथियार है पढ़ाई,शिक्षा,जी हां मैं बात कर रहा हूं एसएससी सीजीएल में हो रहे बाधा की जिसके वजह से बच्चे पेपर दे नहीं पा रहे हैं,आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में एसएससी ने अपने 32 शिफ्ट कैंसिल किए हैं कहीं परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था न हो पाना कहीं, मशीनों की खराबी,तो कभी केंद्रों का पता ना लगना, अब आप सोचिए कि आखिर मीडिया, सरकार, विपक्ष इस मुद्दे को बड़ा क्यों नहीं बना रही है क्योंकि इसमें उनका कोई उतना लाभ नहीं है, लाभ है बिहार विधानसभा चुनाव में जहां प्रचार प्रसार निरंतर हो रहा है, जिस देश के भविष्य को सरकार अंधेरे में रख रही है वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता,नेताओं का क्या है वह पढ़े हो या ना पढ़े हो चुनाव लड़के मंत्री, विधायक बन जाते हैं उसके बाद वह उन पर शासन करते हैं जो पढ़ के अपने दम पर IAS बनते हैं,एसपी बनते हैं या बड़े प्रशासनिक अधिकारी होते हैं,इतने लड़कों के भविष्य के साथ मजाक करना किसी भी देश के लिए भारी पड़ सकता है,बच्चे दिन-रात मेहनत करके उस परीक्षा की तैयारी करते हैं जिसे वनडे एग्जाम कहा जाता है उसके बाद सेंटर दे दिया जाता है,दूर इलाके में,अपना पैसा खर्च करके, समय बर्बाद करके भीड़ में धक्के खाते हुए बच्चे सेंटर तक पहुंचाते हैं और उसके बाद जब पता चलता है की शिफ्ट कैंसिल हो गई है तो आप सोचिए उसके दिल पर क्या गुजरी होगी?क्या वह अपनी सरकार को अच्छा कहेगा? क्या अपनी सरकार का समर्थन करेगा एक्चुअली सिस्टम कब सुधरेगा परीक्षाओ वाला जिसमें बच्चे खुद यह कह सके की सरकार ने हमारे लिए बहुत अच्छी व्यवस्था की है और हम पेपर देने जा रहे हैं, यह आज तक किसी के मुख से सुनाई नहीं दिया,ऐसा हो ही नहीं सकता कि किसी साल कोई पेपर के लिए आंदोलन ना हो,एसएससी का इतना बड़ा आंदोलन हो रहा है लेकिन इस पर मीडिया,सरकार इतनी खामोश है कि उस पर कोई चर्चा करना ही नहीं चाहते,क्योंकि उनको लगता है कि अगर उस पर चर्चा करेंगे तो उनकी सरकारी चली जाएगी,वोट प्रतिशत कम हो जाएगा, क्योंकि यह तो युवा है, युवा सब समझते हैं,आप चले जाइए विदेश में कई देश ऐसे हैं,जब पेपर होता है तो सरकारी वाहन का रास्ता बंद कर देती है कि यहां से सिर्फ विद्यार्थी गुजरेंगे और अपने यहां जब प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जी शहर में आते हैं वह पूरा शहर डायवर्ट कर दिया जाता है,ठीक है आप अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी जाते हैं तो कम से कम इस देश में रहने वाले युवाओं के लिए भी आपको सोचना चाहिए क्योंकि उन्होंने भी आपको वोट देकर गद्दी पर बैठाया है,उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आपका कोई हक नहीं है,और मैं तो यह कहना चाहता हूं कि भारत के हर नागरिक को इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए क्योंकि कल को इस व्यवस्था में कोई भी आ सकता है, आपका लड़का भी आ सकता है,आपका कोई रिश्तेदार भी आ सकता है इसलिए जहां तक हो आप इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई,आंदोलन करिए सरकार को घेरिए,ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार पूर्ण ना हो
कुमार विश्वास की दो पंक्तियां याद आती है:
“स्वर-लय-ताल छीन लो चाहे, प्राणों से भैरव गाएँगे;
हम भी अगर नहीं बोले तो ख़ुद को क्या मुँह दिखलाएँगे।”