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Hindu Raksha Dal

Hindu Raksha Dal:नॉन वेज पर फिर बवाल

Hindu Raksha Dal:नॉन वेज पर फिर बवाल
Hindu Raksha Dal:नॉन वेज पर फिर बवाल

मामला गाजियाबाद के वसुंधरा का है जहां हिंदू रक्षा दलों ने एक नॉनवेज रेस्टोरेंट केएफसी को बंद करने की मांग की और प्रदर्शन भी किया,जैसा कि हम सबको पता है कि 11 जुलाई से हमारा पावन महीना भगवान भोलेनाथ का महीना सावन शुरू हो चुका है, भक्तगढ़ कावड़ लेकर महादेव के चरणों में आशीर्वाद लेने जाते हैं, ऐसे में हिंदू रक्षा दलों का कहना है कि सावन में नॉनवेज रेस्टोरेंट बंद हो क्योंकि इससे हिंदू आस्था को ठेस पहुंचती हैhttp://news24hourslatest.in

हिंदू रक्षा दलों ने क्या किया:
मामला गाजियाबाद के वसुंधरा का है जहां एक केएफसी रेस्टोरेंट पर हिंदू रक्षा दल के दर्जनों कार्यकर्ता ने नॉनवेज रेस्टोरेंट को बंद करने की मांग किया और जमकर हंगामा भी किया, इस दौरान वह केएफसी रेस्टोरेंट में भी घुस गए और नारेबाजी की, इसी बीच हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता ने कहा कि जो हिंदू चाहेगा वही होगा यह हिंदुस्तान है, उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की की कावड़ के मार्ग में आने वाले सभी मांसाहारी रेस्टोरेंट को सावन माह के दौरान बंद कर दिया जाए, और धमकी भी दी अगर मांस की बिक्री बंद नहीं की गई इस सावन के महीने में तो और उग्र आंदोलन भी किया जा सकता है

लोगों को क्या विचार है इस पर:
देखिए जहां तक बात आती है त्योहारों की चाहे वो नवरात्र हो चाहे वह सावन का महीना हो चाहे वह जन्माष्टमी हो चाहे कोई भी हिंदू का पवित्र त्योहार हो, हर पावन पर्व पर मांस पर रोक लगा देनी चाहिए, ठीक है अपनी-अपनी आस्था है कुछ दिनों के लिए बंद कर देनी चाहिए लेकिन जो कार्यकर्ता ,चाहे वह बजरंग दल के हो या हिंदू रक्षा दल के हो या हिंदू संगठन से तालुकात रखते हो क्या उनको यह नहीं सोचना चाहिए कि कि हिंदू भी इस मांश का सेवन करते हैं ,पहले हम अपनों को तो सुधारे,और वैसे भी हिंदू धर्म में मांस तो वर्जित है तो क्या केवल त्योहारों में इसे बंद करना चाहिए या पूर्णता समाप्त कर देना चाहिए, आज के दौर में देखा जाए तो सबसे अधिक हिंदू ही मांश का सेवन करते हैं तो क्या वह गलत नहीं है क्या केवल त्योहारों में ही आंदोलन होना चाहिए कि मांस बंद हो आप त्योहारों के बाद भी इसका आंदोलन करते तो बात समझ में आती की मांस बिल्कुल बंद होना चाहिए लेकिन केवल त्योहारों में बंद हो बाकी उसके बाद आप खाएं तो यह तो न्याय संगत नहीं है, आप चले जाइए जहां मांश काटते हैं चाहे मांस की दुकानें हैं जहां मीट मुर्गा काटते हैं वहां आज भी सबसे अधिक हिंदु ही इसका सेवन करते हैं तो उस पर रोक लगाने के लिए कौन आएगा, कावड़ यात्रा के मार्ग पर एक रेस्टोरेंट पर अपने जबरन हंगामा किया उसे बंद करने की मांग की ठीक है लेकिन आप अपने हिंदू रक्षा दल से यह गुजारिश कीजिए कि इस भारत में ऐसे बहुत सारे केएफसी रेस्टोरेंट है जिसे बंद करना चाहिए, और एक बात आपको ये भी सोचना चाहिए की उस रेस्टोरेंट में यह देखना चाहिए कि वहां हिंदू खा रहा है कि मुसलमान खा रहा है कि सिख खा रहा है कि कोई और खा रहा है अगर अपने धर्म के लोग खा रहे हैं तो आपका फर्ज बनता है कि समझाएं उसे कि आप ना खाएं लेकिन ये आप लोग से होगा नहीं और केवल फर्जी का हंगामा करना आपका एक मकसद है, भारत के सहिष्णुता को बिगाड़ कर रख देना यह कहां तक सही है

यह हिंदुस्तान है जो हिंदू चाहेगा वही होगा:
हिंदू रक्षा दल के एक कार्यकर्ता ने यह नारा लगाया कि यह हिंदुस्तान है यहाँ हिन्दू जो चाहेगा वही होगा यह सरासर गलत है यह देश संविधान से चलता है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी धर्म को लेकर चलने वाला यह देश है, ऐसे में उत्तेजित होकर यह नारा लगाना अनैतिक है,नारा कोई भी लगे चाहे वह हिंदू लगाए या मुसलमान लगाए या कोई और धर्म लगाए लेकिन यह गलत है इस तरह की भावनाओं से देश की अश्मिता को ठेस पहुंचता है, यह देश ना तो कट्टर हिंदुओं का है ना तो कट्टर मुसलमान का है यह देश सनातनियों का है जिसमें सभी धर्म आ जाते हैं

भोलेनाथ के कार्टून पर कोई टिप्पणी नहीं:
कुछ साल पहले भोलेनाथ के रंग रूप का एक पोस्टर वायरल हुआ था जिसमे एक आदमी बैठा हुआ है और गांजा फूंक रहा है और नशा कर रहा है, कर में त्रिशूल, कंठ में सर्प लिए हुए बैठा है, उस पर हिंदू रक्षा दलों ने कोई आपत्ति नहीं की क्या वह हमारे देवी देवताओं का अपमान नहीं है क्या वह भोलेनाथ का अपमान नहीं है, क्या हम अपनी धर्म की रक्षा इस तरह से करेंगे कि यह पोस्ट में भगवान को उल्टा सीधा दर्शा दिया गया उस पर चुप है और एक रेस्टोरेंट पर जाकर हंगामा कर रहे हैं, यह सरासर अपने धर्म का अपमान है, धर्म की आड़ में कहीं हंगामा करना, कहीं झगड़ा करना क्या यही उद्देश्य है, जी रेस्टोरेंट पर हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने जाकर हंगामा किया उन्हें समझना चाहिए कि वह रेस्टोरेंट तो अपना काम कर रहा है वहां तो रोजी-रोटी का उनका सवाल है, खुला है खुला रहने दीजिए आप मत जाइए, अगर आपके अंदर इच्छा शक्ति है कि मुझे नहीं खाना है तो रेस्टोरेंट खुला रहे या बंद रहे आपसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, अगर आपको इतनी दिक्कत है आप प्रशासन से उसे बात को कहिए, हंगामा करना यह गैर कानूनी है

इसलिए यह कोशिश करना चाहिए कि अगर आपको कोई चीज बुरी लग रही हो तो उसे आसानी से बिना हंगामा के किया उसका निवारण करें, ना कि कानून को अपने हाथ में लेकर जो इच्छा हो वह कहें यह सभी के लिए है केवल एक पक्ष के लिए नहीं

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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