गीता vs क़ुरान क्या पढ़ाया जाए स्कूल में

अभी आपने देखा की कैसे आई लव मोहम्मद का पोस्टर जारी कर कुछ युवाओं ने जुलूस निकाला,कुछ लोगों का कहना है की कुछ मुस्लिम युवक जुलूस निकालते समय हिंदू पोस्टर को फाड़ रहे थे जिसकी वजह से हिंसा शुरू हो गया कुछ नामजद लोगों पर FIR भी हुआ,अब हिंसा इतना बढ़ गया कि आई लव मोहम्मद के पोस्टर के बाद आई लव योगी,आई लव अखिलेश के भी पोस्टर लगाए गएhttp://news4hourslatest.in
एमके स्टालिन का क्या कहना है:
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रोफेट मोहम्मद की 1500वीं कार्यक्रम में कहां की इस्लामिक स्टडीज की शिक्षाएं स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल हो, स्टालिन का साफ-साफ कहना है कि जिस तरीके से हिंदुओं के गीता को पढ़ाया जाता है उसी तरीके से इस्लामिक स्टडीज भी कराई जाए, एक तरीके से देखा जाए तो इस्लामी ग्रंथ को पढ़ने के लिए स्टालिन कह रहे हैं
क्या कारण था एमके स्टालिन के कहने का:
एमके स्टालिन और डीएमके यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सरकार मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की,उनके हितों की रक्षा करती है,इसलिए उनके धर्म की भी जानकारी सबको होनी चाहिए,नबी की शिक्षाएं स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल की जाए,जाहिर सी बात है स्टालिन का यह भाषण अल्पसंख्यकों को मुसलमान को आकर्षित करेगा उनका वोट बैंक स्टालिन की तरफ परिवर्तित होगा,कुछ पार्टिया का कहना है की स्टेलिन साफ-साफ यह कहना चाहते हैं कि कुरान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए,या फिर संक्षेप में कहा जाए तो स्टालिन का इरादा है कि स्कूल के पाठ्यक्रमों में इस्लाम से जुड़ी सारी चीज़ पढ़ाई जाए, इस पर उनकी पार्टी ने काफी प्रशंसा किया लेकिन विपक्षियों का कहना है कि यह मात्र एक चुनावी चाल है और कुछ नहीं,एमके स्टालिन ऐसी मीठी-मीठी बात करके सिर्फ कुछ जाति विशेष को टारगेट कर रहे हैं और वोट बैंक इकट्ठा करने की कोशिश में लगे है, एमके स्टालिन की पार्टी (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)) के नेताओं का कहना है कि यह कदम एक सार्थक कदम है और सभी धर्म की जानकारी बच्चों को होनी चाहिए
गीता Vs कुरान:
हिंदुओं का सबसे पवित्र ग्रंथ है गीता वही मुसलमानोे का सबसे पवित्र ग्रंथ है कुरान,गीता और कुरान पर सालों साल डिबेट होते रहे हैं और हो भी रहे हैं और आगे भी होंगे क्योंकि अलग-अलग पार्टी को अपना अलग-अलग वोट बैंक इकट्ठा करना रहता है इसलिए वह धर्म विशेष को अपना निशाना बनाते हैं,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है योगी आदित्यनाथ जो की एक हिंदुत्व का चेहरा है उत्तर प्रदेश के भाजपा मंत्रियों का कहना है कि गीता को स्कूल के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए वही असदुद्दीन ओवैसी मुसलमानों के हितैषी हैं उनका कहना है कि कुरान को स्कूलों में शामिल करना चाहिए,भाजपा कहती है की गीता को शामिल करना चाहिए पाठ्यक्रम में वहीं अन्य कुछ विपक्षी पार्टियों का कहना है कुरान को शामिल करना चाहिए पाठ्यक्रम में और इन्हीं दोनों की लड़ाई में जो आम जनता है वह पीस रही है क्योंकि सबको अपना वोट बैंक इकट्ठा करना है अगर बीजेपी हिंदुत्व का एजेंडा लेकर नहीं चलेगी तो उसे चुनाव से बेदखकल होना पड़ेगा और वहीं अगर दूसरी पार्टी मुसलमान को साथ लेकर नहीं चलेगी तो उनका भी हर्ष बुरा होगा इसलिए सबका सबका अलग-अलग वोट बैंक है,अब बात है पढ़ाई की तो अगर गीता या कुरान में बहस हो रहा है तो सबसे पहले बहस होना चाहिए कि संविधान पर क्योंकि यह देश संविधान से चलता है ना की गीता और कुरान से, लेकिन हां अपनी आत्मा की संतुष्टि के लिए,अपने जीवन शैली को और बेहतर बनाने के लिए आप गीता या कुरान पढ़ सकते हैं,लेकिन अगर समाज में रहना है और समाज के अनुसार चलना है तो आपको बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का संविधान पढ़ना पड़ेगा,संविधान की किताब हाथ में लेकर चलने से या जनता को दिखाने से संविधान समझ में नहीं आता उसके लिए आपको पढ़ना पड़ेगा,हिंदुओं का कहना है की गीता में जो लिखा है वह हर वर्ग के लिए है और सबको पढ़ना चाहिए और मुसलमान का कहना है कि कुरान हमें जीने की राह दिखाता है इसलिए कुरान को भी पढ़ना चाहिए और यही कारण है आज के युवा हिंदू -मुस्लिम में फंसे हुए हैं,अभी आपने देखा कैसे आई लव मोहम्मद का पोस्टर जारी करते हुए जुलूस निकाले गए उसके बाद लगातार पोस्टर निकलने शुरू हो गए,आई लव योगी,आई लव अखिलेश आखिर यह सब क्या है, यह देश को किस राह में ले जा रहा है,अगर देश की युवा यही करेंगे तो देश की कभी तरक्की नहीं होगी और हिंदू मुस्लिम में कभी एकता नहीं होगी केवल और केवल वैमनस्य का भाव एक दूसरे के प्रति पैदा होगा,इसलिए नेताओं की बातों में ना आकर आप आत्म मंथन करिए और हर लोगों के प्रति प्रेम रखिए,सौहार्द रखिए तभी जाकर जीवन सफल बनेगा धन्यवाद