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आखिर PK सबकी पढ़ाई क्यों देख रहे है

आखिर PK सबकी पढ़ाई क्यों देख रहे है

आखिर PK सबकी पढ़ाई क्यों देख रहे है

राजनीति में जब कोई रणनीतिकार जैसे प्रशांत किशोर अपने विपक्ष के नेताओं की डिग्री पूछते हैं,उनकी पढ़ाई पूछते हैं तो जरूर उसके कुछ गहरे मायने हैं यह केवल सामाजिक धरना या सार्वजनिक बयान नहीं है बल्कि इसमें कुछ और ही दिखाने की कोशिश है जिसे जनता को बहुत बारीकी से समझना होगा,आईए जानते हैं प्रशांत किशोर सबकी डिग्री के माध्यम से क्या दर्शाना चाहते हैंhttp://news24hourslatest.in
1-विश्लेषण,आंकड़ों,सर्वेक्षण पर पकड़:
सबकी डिग्री देखना,सब की पढ़ाई पूछना यह संकेत देता है कि रणनीतिकार यानी कि प्रशांत किशोर हर वर्ग,हर तबका की चिताओं की आकांक्षाओं को समझना चाहते हैं,बल्कि चुनाव में यह अहम मुद्दा होना भी चाहिए कि हमारा जनप्रतिनिधि कहां तक पढ़ा है तभी वह शिक्षा, बेरोजगारी,स्वास्थ्य,रोजगार पर बात कर सकता है, प्रशांत किशोर का यह पूछने का मतलब है कि वह बहुत सारी डेटा अपने माध्यम से इकट्ठा कर रहे हैं,जिसे जनता के बीच लाकर दर्शना चाहते हैं
2-हर वर्ग का ध्यान रखना:
प्रशांत किशोर के कहने का मतलब है कि वह हर, वर्ग हर समुदाय का ध्यान रख रहे हैं और इससे यह संदेश जाता है कि प्रशांत किशोर पक्षपाती नहीं है,वह दलित,पिछड़ा,अल्पसंख्यक हर वर्ग को अपने साथ लेकर चलना चाहता है इसमें जनता को यह विश्वास हो जाता है कि उसका जनप्रतिनिधि उनकी हर समस्याओं को चाहे वह स्वास्थ,हो रोजगार,हो महंगाई हो,पलायन हो दूर करना चाहता है, जिसे आसान शब्दों में कहें तो समावेशी राजनीति करने का यही तरीका है
3-क्या खेल खेलना चाहते है प्रशांत किशोर है:
प्रशांत किशोर की यह चाल क्या जनता समझ नहीं पा रही है,प्रशांत किशोर विपक्षी पार्टियों को ये कहना चाहते हैं कि तुम कुछ भी कहो लेकिन हमारी जो नजर है वह हर पार्टी पर है और ये संदेश जाएगा जनता में की प्रशांत किशोर बहुत सक्रिय नेता हैं,प्रशांत किशोर विपक्ष की पार्टियों पर,जनता पर बराबर रूप से दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और जनता उनकी बातों को पकड़ भी रही है
4-जनता का अत्यधिक भरोसा जितना:
हर इंटरव्यू में प्रशांत किशोर कभी तेजस्वी यादव को नौवीं फेल कहते हैं,तो कभी सम्राट चौधरी को हाई स्कूल किस वर्ष में किए हैं यह पूछते हैं प्रशांत किशोर के यह करने का मतलब है कि वह पढ़ाई को लेकर उन युवाओं को आकर्षित करना चाहते हैं जिसके बल पर युवा आगे बढ़ते हैं,सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक बुनियादी राजनीतिक रणनीति है की जनता में भरोसा दिलाना कि वह हर मुद्दे को लेकर चल रहे हैं, कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं है जो उनसे छूट जाए
5-जनता की जागरूकता:
प्रशांत किशोर पढ़ाई को लेकर एक मुद्दा बनाए हुए हैं और वह यह समझ गए हैं कि बिहार के युवा को अगर आकर्षित करना है तो पढ़ाई को मुद्दा बनाना पड़ेगा इसीलिए वह तेजस्वी यादव को नोेवी फेल कहते हैं तो सम्राट चौधरी की कभी हाई स्कूल की डिग्री मांगते हैं, प्रशांत किशोर रणनीतिकार है वह जनता की नबज पकड़ने में माहिर है इसलिए वह महिलाओं में जाते हैं तो महिलाओं की समस्या को उजागर करते हैं,जब युवाओं में जाते हैं तो रोजगार की समस्या को उजागर करते हैं यानी कि हर क्षेत्र में अलग-अलग मुद्दे को पकड़ कर चलते हैं कोई मुद्दा उनसे वंचित न रह जाए
6-इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है:
प्रशांत किशोर के पढ़ाई वाले मुद्दे पर जनता का कहीं नकारात्मक प्रभाव ना पड़ जाए क्योंकि बिहार में दलित समुदाय सबसे अधिक है वह चाहता है कि उसे रोजगार मिले चाहे उनका जनप्रतिनिधि पढ़ा लिखा हो या ना हो अगर वह रोजगार की बात करता है तो कहीं ना कहीं उसे लाभ मिल सकता है, लेकिन अगर वह केवल अपनी पढ़ाई की, डिग्री की बात करेगा तो जनता में कहीं यह भावना ना पैदा हो जाए कि हमारा जनप्रतिनिधि खुद के पढ़ाई की बात कर रहा है,दूसरों की पढ़ाई की बात कर रहा है लेकिन बिहार की जनता के बारे में नहीं सोच रहा है तो इसका नकारात्मक प्रभाव भी बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के पार्टी पर पड़ सकता है
प्रशांत किशोर ने जो पढ़ाई, डिग्री को लेकर मुद्दा बनाया है वह यह दर्शाता है की प्रशांत किशोर सर्वेक्षण और आंकड़ों पर आधारित राजनीति करना चाहते हैं,साधारण शब्दों में कहे तो समावेशी राजनीति करना चाहते हैं जिसमें हर चीज को चाहे महंगाई हो,रोजगार हो,पलायन हो सब मुद्दे को लेकर चलना चाहते हैं,वह युवाओं की आवाज बनकर चलना चाहते हैं,खैर अब देखना है कि प्रशांत किशोर का यह जो मुद्दा है वह विपक्ष के नेताओं पर कितना वार करता है, जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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