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क्या कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है उपमुख्यमंत्री का

क्या कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है उपमुख्यमंत्री का

क्या कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है उपमुख्यमंत्री का

 

बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और आखिरकार बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन ने राष्ट्रीय जनता दल के नेता,बिहार के विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर दिया, और वही विकासशील इंसान पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा भी घोषित कर दिया गया है और खास बात यह है कि तेजस्वी यादव को महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत थे, अभी तक यह शोर हो रहा था कि महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरा क्यों नहीं घोषित हो रहा है उसके लिए विपक्षी दल सवाल भी पूछ रहे थे,विपक्षियों का कहना है कि आखिर कांग्रेस इतना क्यों नहीं समझ पा रही है कि तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री होंगे?क्या कांग्रेस तेजस्वी यादव को सपोर्ट करने में पीछे हट रही है या फिर कोई और मजबूरियां है,कुछ लोगों का कहना है कि महागठबंधन में एक जुटता नहीं है वह केवल चुनाव लड़ रहे हैं एनडीए को हराने के लिएhttp://news24hourslatest.in
क्या मजबूरी है कांग्रेस की:
जैसे ही अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया तमाम सारे सवाल कांग्रेस पर भी उठने लगे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस की पूर्ण इच्छा नहीं थी कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री घोषित किया जाए क्योंकि कांग्रेस के पास कोई विकल्प ही नहीं है अकेले दम पर वह चुनाव लड़ नहीं सकती,एनडीए में जा नहीं सकती तो ऐसे में लालु के साथ कांग्रेस होली ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लाज बच जाए,कांग्रेस को अभी गठबंधन की राजनीति के धर्म का मर्म जानना है आखिर कांग्रेस यह क्यों नहीं समझ रही है कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ही मुख्य विपक्षी दल है और तेजस्वी यादव उस पार्टी के सर्वे सर्वा है,एक तरफ से देखा जाए तो कांग्रेस ने केवल महागठबंधन में एक जुटता लाने के लिए तेजस्वी यादव को CM चेहरा घोषित किया है,आपको बता दे कांग्रेस से कहीं अधिक बड़ी पार्टी है राष्ट्रीय जनता दल बिहार में,कांग्रेस ने इस घोषणा में काफी देरी की महागठबंधन के एक जुटता में भ्रम फैलाया और समर्थकों के बीच भी शंशय फैलाने का काम किया
कांग्रेस को पहले ही तेजस्वी को सीएम घोषित कर देना चाहिए:
चुनाव के आखिरी पड़ाव में कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया अभी तक पार्टी में दरार पैदा हो गई थी मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर,हालांकि अभी भी उम्मीदवार को लेकर पार्टी में दरार पैदा है अगर कांग्रेस यही काम पहले कर देती तो उनके समर्थकों में,कार्यकर्ताओं में एक जोश रहता प्रचार करने का,वह तेजस्वी के नाम पर वोट मांग सकते थे लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं किया,क्या कांग्रेस को ऐसा लग रहा था कि इस महागठबंधन में तेजस्वी यादव के अतिरिक्त कोई और चेहरा है जो मुख्यमंत्री पद का दावेदार हो सकता है,कांग्रेस को अगर अपनी थोड़ी बहुत इज्जत भी बचानी है तो राष्ट्रीय जनता दल के साथ चलना पड़ेगा,कांग्रेस ये भूल गई है कि अपनी महत्व बचाए रखने के लिए उसे राष्ट्रीय जनता दल पर निर्भर होना पड़ रहा है और ऐसी निर्भरता अन्य राज्यों में छोटे-छोटे दलों के साथ कांग्रेस ने कर रखा है,क्योंकि अपने दम पर कांग्रेस चुनाव जीत नहीं सकती,भीड़ इकट्ठा नहीं हो पाती है यही कारण है कि वह अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने में काफी भरोसा कर रही है
क्या कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है उपमुख्यमंत्री का:
तेजस्वी यादव के साथ-साथ विकासशील इंसान पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी भी बिहार के डिप्टी सीएम का चेहरा घोषित हो चुके हैं और लंबे समय से वह इसकी मांग भी कर रहे थे,मात्र 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और मांग थी उपमुख्यमंत्री पद की,आपको बता दे कि कांग्रेस वीआईपी सें चार गुना अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है लेकिन कांग्रेस के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो बिहार का उपमुख्यमंत्री बन सके हालांकि अशोक गहलोत ने यह कहा है कि और भी डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे तो हो सकता है उसमें कोई कांग्रेस का आदमी हो,फिलहाल कांग्रेस की औकात विकासशील इंसान पार्टी से भी कम है,अब जरा सोचिए कांग्रेस किस आधार पर जनता में अपना विश्वास कायम करेगी,एक नेता बड़े पद पर नहीं घोषित हो पा रहा है और बिहार के छोटे-छोटे दल कांग्रेस पर हावी हो गए हैं,बताइए भारत की सबसे पुरानी पार्टी जिन्होंने 65 साल देश पर राज किया आज उनकी हालत यह है कि बिहार के एक छोटे से पार्टी के आगे भी कांग्रेस की कोई औकात नहीं है, आखिर कांग्रेस की रणनीति क्या है कि लोगों को समझ में नहीं आ रही है,आपको बता दे कि इस महागठबंधन में 12 प्रत्याशी ऐसे हैं जो महागठबंधन का हिस्सा है लेकिन एक दूसरे के खिलाफ ही लड़ रहे हैं कहीं कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार आमने-सामने हैं,तो किसी सीट पर विकासिल इंसान पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने है,ऐसे में जनता का भरोसा धीरे-धीरे गिरेगा और इससे महागठबंधन को चुनाव मे मुसीबत भी हो सकती है,खैर अब देखते हैं की बिहार की जनता किसको अपना नेता मानती है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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