बिहार में चुनाव हो और जाति की बात ना हो,असंभव

बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं जैसे उम्मीदवार घोषित होने की प्रक्रिया, नामांकन की प्रक्रिया,अब सारी पार्टियां चुनाव के आखिरी छोर पर प्रचार प्रसार करने में लगी है,तेजस्वी यादव महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री घोषित हो चुके हैं और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी महागठबंधन की तरफ से उपमुख्यमंत्री घोषित हो चुके हैं परंतु अभी एनडीए गठबंधन में थोड़ा सा असमंजस है कि मुख्यमंत्री कौन होगा पहले एनडीए गठबंधन में यह था कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे परंतु अब एनडीए के नेताओं के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है की मुख्यमंत्री कोई और भी हो सकता है,फिलहाल पक्ष विपक्ष सारी पार्टियों के नेता जमीनी स्तर पर उतर चुके हैं और अपने अलग-अलग गयोजनाओं से जनता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं अब किस पार्टी ने किस जाति को टिकट दिया है सबसे बड़ा सवाल बिहार का यही है क्योंकि बिहार में हिंदू मुसलमान की राजनीति नहीं होती है जाति आधारित राजनीति होती हैhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं किस पार्टी ने किस जाती को टिकट दिया है:
बिहार में चुनाव हो और जाति की बात ना हो ऐसा असंभव है,क्योंकि अगर जाति की बात नहीं की गई तो बिहार में चुनाव जीतना भी बहुत मुश्किल है ऐसे में सारी पार्टियां अपने-अपने वोट बैंक इकट्ठा करने में लगी है दलित,पिछड़ा,अति पिछड़ासवर्ण,मुस्लिम सबको सपने अपने-अपने तरीके से टिकट दिया है
1-महागठबंधन की बात करते है
•राष्ट्रीय जनता दल:राष्ट्रीय जनता दल ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जिसमें सें 51 यादव जाती को टिकट दिया है और 18 मुस्लिम कैंडिडेट है कहने का तात्पर्य यह है कि लगभग 50% के आसपास मुस्लिम और यादवों को राष्ट्रीय जनता दल ने टिकट दिया है जिसे हम MY समीकरण भी कहते हैं,अनुसूचित जाति को 19 से 20 टिकट दिया गया है,अति पिछड़ा वर्ग को 12 सिम दी गई है
•कांग्रेस:कांग्रेस ने 61 सीटों मे लगभग 19 सीटों पर सवार उम्मीदवार घोषित किया है जिसमें आठ भूमिहार, 6 ब्राह्मण,पांच राजपूत शामिल,मुस्लिम की बात करें तो पांच उम्मीदवार मुस्लिम के भी हैं कांग्रेस के,बात करें दलित,पिछड़ों की तो लगभग 10% टिकट दलित,पिछड़ा,अति पिछड़े समुदाय के लोगों को दिया गया है
2-बात करें एनडीए गठबंधन की तोे:
• जनता दल यूनाइटेड:नीतीश कुमार ने 101 सीटों में 74 सिट अन्य पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग से आए हुए उम्मीदवारों को दिया जिसमें विशेष कर कुशवाहा समाज,कुर्मी समाज के लोगों को 24 सिट दिया है,15 टिकट अनुसूचित जाति और एक टिकट अनुसूचित जनजाति को दिया है,22 टिकट समान श्रेणी वालों को दिया गया है
•भारतीय जनता पार्टी:भारतीय जनता पार्टी ने 101 सीटों में 61 सीट सवर्ण जातियों को दिया है जिसमें राजपूत को 21,भूमिहार को 16,ब्राह्मणों को 11, कायस्थ को एक टिकट,भारतीय जनता पार्टी ने 11 अति पिछड़ा वर्ग को टिकट दिया है,20 अन्य पिछड़ा वर्ग को टिकट दिया है,पांच अनुसूचित जाति और जनजाति को टिकट दिया है,मुसलमान की बात करें तो बीजेपी ने एक भी सीट मुसलमान को नहीं दिया है
बिहार में जातिगत वोटरों की संख्या देखा जाए तो इसमें राजपूत 3 सें 4 प्रतिशत है,भूमिहार दो से तीन प्रतिशत है,ब्राह्मण तीन से चार प्रतिशत हैं,वैश्य 2 से 3% है, दलित 19 से 20% है,अति पिछड़ा 36% है,यादव जाति के 14 से 15% लोग हैं,कोयारी 4 से 5 % है, मुस्लिम समुदाय के लोग 17 से 18% है, यह थी बिहार में जातियों की संख्या की कौन कितने प्रतिशत है ऐसा कहा जा रहा है कि एनडीए गठबंधन और इंडिया गठबंधन ने अति पिछड़े वर्ग को इस बार काम सिम दी है,भाजपा ने सबसे अधिक सवर्ण जाती को टिकट दिया है,भाजपा ने लगभग 7% अति पिछड़ी जाति के लोगों को टिकट दिया है,बीजेपी ने मुसलमान को एक भी सीट नहीं दिया है बिहार में मुसलमान की संख्या 19 से 20% है,वही जनता दल यूनाइटेड ने सिर्फ चार मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है,बात करें छोटे दलों की जिन्हे सत्ता की चाबी भी कहा जाता है क्योंकि अगर यह दल पार्टी से नाराज हो गई तो सरकार बनाना भी मुश्किल हो जाता है पार्टियाे के लिए कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती है पार्टियाे के पास कि उन्हें एक या दो सीट चाहिए सरकार बनाने के लिए तो ऐसे छोटे घटक दल ही काम आते हैं इसलिए इनको नजरअंदाज करना हर पार्टी के लिए बहुत खतरे का सबक बन सकता है आपने देखा कैसे इंडिया गठबंधन ने मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का उम्मीदवार बताया है जबकि उन्हें पार्टी की तरफ से मात्र 6 सिट दी गई है,विकासशील इंसान पार्टी ने दो राजपूत उम्मीदवारों को टिकट दिया है वहीं लोजपा(रामविलास) पांच राजपूत को टिकट दिया,अब देखते हैं कि यह जातीय समीकरण किस पार्टी पर भारी पड़ता है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
