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कांग्रेस की जीत का मंत्र दलित और पिछड़ा:

कांग्रेस की जीत का मंत्र दलित और पिछड़ा:

कांग्रेस की जीत का मंत्र दलित और पिछड़ा:
कांग्रेस की जीत का मंत्र दलित और पिछड़ा:

2014 के बाद से कांग्रेस की सरकार निरंतर गिर रही है, हर राज्य में कांग्रेस को बड़े-बड़े पार्टियों से गठबंधन करके चुनाव लड़ना पड़ रहा है, कांग्रेस लगातार कोशिश में है कि कैसे बीजेपी को हर राज्य से हटाया जाए इसके लिए वह राज्य की पार्टियों से गठबंधन भी कर रही है, और सड़कों पर भी उतर रही है, उत्तर प्रदेश के रायबरेली से लोकसभा के सांसद, कांग्रेस के गद्यावर नेता, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, कभी 3000 किलोमीटर की पैदल यात्रा, कभी खाट सभा तो कभी संविधान बचाओ आंदोलन, लेकिन जनता अभी इसे अभी पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं कर रही है, जनता की राय के अनुसार अभी राहुल गांधी इतने परिपक्य्व नहीं है प्रधानमंत्री पद के लिए, लेकिन आपको बता दे की पूरी कांग्रेस पार्टी इस नेता पर डिपेंडेंट हैhttp://news24hourslatest.in

एक दौर था कांग्रेस का:
एक दौर था जब कांग्रेस का बोलबाला था,बाकी कोई पार्टियां उतनी नहीं टिकती थी, 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी के हत्या के बाद जब राजीव गांधी को अचानक प्रधानमंत्री पद का दावेदार बना दिया गया तो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में शोक संवेदना गुजती रही, और 514 सीटों में कांग्रेस को 404 सीटे जीत मिली और राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, हालांकि यह पद ज्यादा दिन तक नहीं टिका रहा, पद भार संभालते ही 1989 में एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले के बीच राजीव गांधी ने अपना सत्ता को दिया, जिसका परिणाम यह हुआ की 1984 के बाद कभी भी कांग्रेस अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी या लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं कर सकी, 1984 में राजीव गांधी के हटने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने

कांग्रेस उसके बाद लगातार गिरती रही, जिस राज्य में कांग्रेस की पार्टी थी उस राज्य में भी कांग्रेस अपनी सत्ता खो दी,अब क्या है स्थिति की कांग्रेस पार्टी को पुनर्जन्म की आस है, कांग्रेस के नेताओं को यह पता चल गया है कि अब उन्हें कुछ नया करना पड़ेगा तब जाकर उनकी कहीं सरकार बन सकती है, राहुल गांधी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कोई ना कोई नया एजेंडा लेकर आना पड़ेगा अगर बीजेपी को हराना है, राहुल गांधी को समझ गया मैं आ गया कि हिंदुत्व के एजेंडे को अगर लेकर चलेंगे तो कहीं ना कहीं सरकार बनाने में कामयाब दिख सकते हैं, भाजपा हिंदुत्व के विचारधारा को लेकर चलती आ रही है और चलती जाएगी और इसी कारण लोगों का विश्वास बीजेपी से जुड़ा है

आज की स्थिति में कांग्रेस बहुत पीछे है:
आपको बता दे की 2014 के बाद जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर अभिशिक्त हुए, तो हिंदुओं में एक नई आस जगी, हिंदुत्व को बड़ा बल मिला, यह बात कांग्रेस नहीं समझ पाई, और भाजपा इसी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ती रही और लगातार जीतती रही, बीजेपी की विचारधारा आरएसएस से जुड़ी है जो की एक हिंदुत्व संगठन है जो पूरे हिंदुओं को लेकर चलता है, ऐसा कोई संगठन कांग्रेस के पास नहीं है और ना ही वह किसी संगठन से जुड़े हैं और यह बात भी राहुल गांधी को समझ में आ गई कि हिंदुत्व का चेहरा लेकर अगर वह चलेंगे या कोई ऐसी विचारधारा लेकर चलेंगे जिसे हिंदुत्व प्रभावित हो तो ही कुछ हो सकता है, हालांकि राहुल गांधी इस एजेंडे पर काम किए, 3000 किलोमीटर की पैदल यात्रा,खाट सभाएं की सब लोगों से मिले अपनी विचारधाराओं को थोड़ा बदला लेकिन अभी भी उन्हें पूर्णता सफलता नहीं प्राप्त हुई है

कांग्रेस क्या चाहती है अब:
2024 का चुनाव भी बहुत खास था भाजपा सत्ता में आई, और राहुल गांधी को यह लगा कि जब तक वह हिंदू समाज के ओबीसी और दलित तबके को अपनी तरफ आकर्षित नहीं करेंगे तब तक वह एक मजबूत सरकार केंद्र में नहीं बना पाएंगे, बीजेपी ने यही किया उन्होंने दलित समाज,ओबीसी समाज सबको अपनी तरफ आकर्षित किया और आज केंद्र मैं उसकी सरकार है, राहुल गांधी का जो संविधान बचाओ आंदोलन था वह सिर्फ दलितों और पिछड़ों को जोड़ने के लिए था, उनका कहना था कि दलित को कभी भी बराबरी का दर्जा नहीं मिला जो कि बाबा साहब अंबेडकर ने उन्हें दिया है, राहुल गांधी का यह एजेंडा उन्हें ताकत देगा और बीजेपी को यह नुकसान भी पहुंचा सकता है, बीजेपी भी इस बात को भली-भांति समझ गई है कि अब कांग्रेस हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर आगे चल रही है वह दलित,ओबीसी सबको लेकर चलना चाहती है, कांग्रेस की तीन बड़ी विचारधारा जो लोगों को जोड़ने में काफी मदद की,पहला है भारत जोड़ो यात्रा,दूसरा है जाति जनगणना और तीसरा संविधान बचाओ, इन तीन विचारधारा जिससे कांग्रेस अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलित को जोड़ने में काफी हद तक सफल हुई है, और इसी एजेंडे पर कांग्रेस आगे भी चलती रहेगी, लेकिन अभी भी कांग्रेस को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी अगर बीजेपी को हराना है तो, कांग्रेस को पता है कि बीजेपी अब अपने हिंदुत्व के एजेंडे को और मजबूत कर रही है दलित, ओबीसी,अल्पसंख्यक सबको लेकर साथ चलने का और कवायत तेज हो चुका है

अब देखना यही है कि भाजपा के हिंदुत्व और कांग्रेस के हिंदुत्व को जनता कितना स्वीकार करती है और आगामी जितने भी चुनाव हैं चाहे वह विधानसभा के चुनाव हो, चाहे वह 29 के लोकसभा के चुनाव हो उसमें कांग्रेस खुद को कितना मजबूत करेगी यह देखना दिलचस्प होगा, हर लेटेस्ट खबर के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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