UP के नेताओं का कितना असर पड़ेगा बिहार चुनाव पर

बस कुछ ही दिन शेष हैं बिहार के विधानसभा चुनाव में ऐसे में सारी पार्टियां अपने पूरे जोश के साथ चुनाव प्रचार कर रही है और लगभग हर पार्टी जीतने का वादा कर रही है,सब नेताओं के मुद्दे अलग है कोई रोजगार की बात कर रहा है,कोई हिंदुत्व की बात कर रहा है,कोई जाति की बात कर रहा है,सबका वोट बैंक अलग-अलग है और सारे नेता अपने वोट बैंक इकट्ठा करने के चक्कर में अपने मुद्दे को लेकर बात कर रहे हैं ऐसे में उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज नेता बिहार में चुनाव प्रचार के लिए रैलिया कर रहे हैं जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिहार में रैली की,उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सपा मुखिया अखिलेश यादव भी बिहार जाने वाले हैं,उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी बिहार में प्रचार कर चुके हैं और कई ऐसे बड़े नेता और कार्यकर्ता जो बिहार में अपने-अपने पार्टियों के प्रचार प्रसार में लगे हैं,तो प्रश्न यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश के इन नेताओं का प्रभाव बिहार के विधानसभा चुनाव में पड़ेगाhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं कितना असर होगा:
ऐसा कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के नेताओं का बिहार में असर सीमित होगा लेकिन महत्वपूर्ण होगा, योगी आदित्यनाथ एनडीए को मजबूत करने में लगे हैं तो वही अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन को जिताने में लगे है,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि भले ही उत्तर प्रदेश के बड़े नेता बिहार में आ रहे हैं चुनाव प्रचार करने लेकिन बिहार की जनता अपने स्थानीय मुद्दों को ही सर्वोपरि रखकर चुनाव लड़ेगी,UP के नेता क्या कह रहे हैं,क्यों कह रहे हैं इस पर बिहार की जनता ज्यादा फोकस नहीं कर रही है,वैसे भी योगी जी का चेहरा एक हिंदूवादी चेहरा के रूप में देखा जाता है और वह हिंदुत्व को लेकर ही आगे बढ़ते हैं वही अखिलेश यादव को एक एंटी हिंदू के रूप में दर्शाया जाता है
ऐसा कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के नेताओं का बिहार में असर सीमित होगा लेकिन महत्वपूर्ण होगा, योगी आदित्यनाथ एनडीए को मजबूत करने में लगे हैं तो वही अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन को जिताने में लगे है,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि भले ही उत्तर प्रदेश के बड़े नेता बिहार में आ रहे हैं चुनाव प्रचार करने लेकिन बिहार की जनता अपने स्थानीय मुद्दों को ही सर्वोपरि रखकर चुनाव लड़ेगी,UP के नेता क्या कह रहे हैं,क्यों कह रहे हैं इस पर बिहार की जनता ज्यादा फोकस नहीं कर रही है,वैसे भी योगी जी का चेहरा एक हिंदूवादी चेहरा के रूप में देखा जाता है और वह हिंदुत्व को लेकर ही आगे बढ़ते हैं वही अखिलेश यादव को एक एंटी हिंदू के रूप में दर्शाया जाता है
आईए जानते हैं योगी का कितना असर पड़ेगा बिहार चुनाव पर:
हम सबको पता है कि योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में है,यही कारण है कि हिंदुत्व के एजेंट को साथ लेकर योगी चलते हैं और आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं,बिहार के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जैसे सीमांचल जहां योगी आदित्यनाथ का प्रचार भाजपा को मजबूत बना सकता है,क्योंकि सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी चुनाव पर ज्यादा फोकस कर रही है क्योंकि वह गढ़ हिंदू मुसलमानों का गढ़ माना जा रहा है ऐसे में योगी का प्रचार भाजपा के हिंदू वोटरों को एकजुट करेगा,भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को सख्त, भ्रष्टाचार मुक्त और विकासशील कहती है,जो खासकर मध्यमवर्गीय लोग और युवाओं को बहुत प्रभावित करता है,परंतु कुछ लोगों का यह भी कहना है की बिहार में हिंदू मुस्लिम समीकरण प्रभावित नहीं है यहां जातियों का प्रभाव बहुत अधिक है इसलिए योगी आदित्यनाथ का हिंदूवादी चेहरा शायद ही भाजपा को मजबूत कर सके, क्योंकि बिहार में इस विधानसभा चुनाव में रोजगार, शिक्षा,पलायन,भ्रष्टाचार इन्हीं सब मुद्दों पर बात हो रही है,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बिहार में बिहारी की बात होनी चाहिए कोई अन्य राज्य से नेता आएगा उनकी बातें बिहारी कतई नहीं सुनेंगे
हम सबको पता है कि योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में है,यही कारण है कि हिंदुत्व के एजेंट को साथ लेकर योगी चलते हैं और आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं,बिहार के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जैसे सीमांचल जहां योगी आदित्यनाथ का प्रचार भाजपा को मजबूत बना सकता है,क्योंकि सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी चुनाव पर ज्यादा फोकस कर रही है क्योंकि वह गढ़ हिंदू मुसलमानों का गढ़ माना जा रहा है ऐसे में योगी का प्रचार भाजपा के हिंदू वोटरों को एकजुट करेगा,भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को सख्त, भ्रष्टाचार मुक्त और विकासशील कहती है,जो खासकर मध्यमवर्गीय लोग और युवाओं को बहुत प्रभावित करता है,परंतु कुछ लोगों का यह भी कहना है की बिहार में हिंदू मुस्लिम समीकरण प्रभावित नहीं है यहां जातियों का प्रभाव बहुत अधिक है इसलिए योगी आदित्यनाथ का हिंदूवादी चेहरा शायद ही भाजपा को मजबूत कर सके, क्योंकि बिहार में इस विधानसभा चुनाव में रोजगार, शिक्षा,पलायन,भ्रष्टाचार इन्हीं सब मुद्दों पर बात हो रही है,कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बिहार में बिहारी की बात होनी चाहिए कोई अन्य राज्य से नेता आएगा उनकी बातें बिहारी कतई नहीं सुनेंगे
क्या असर पड़ेगा अखिलेश यादव का:
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं फिलहाल वह सपा के मुखिया हैं,इनका चेहरा यादवो को और कुछ हद तक मुसलमान को एकजुट कर सकता है, अखिलेश यादव के प्रचार से लालू यादव के परिवार को मजबूती मिल सकती है,अखिलेश यादव जहां खुद को एक युवा नेता के तौर पर पेश करते हैं वहीं बिहार के युवा रोजगार,शिक्षा,पलायन,सड़क,बिजली,पानी इन सब की बात कर रहे हैं और अखिलेश यादव भी इन्हीं मुद्दों को लेकर बिहार में इंडिया महागठबंधन का प्रचार कर रहे हैं,अखिलेश यादव का प्रचार बिहार में अल्पसंख्यक और अति पिछड़े वर्ग को प्रभावित कर सकता है,परंतु कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अखिलेश यादव अपने दम पर मुख्यमंत्री नहीं बने हैं मुलायम सिंह यादव की देन है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं यह परिवारवाद वाला फैक्टर इंडिया गठबंधन को नुकसान भी पहुंचा सकता है, और दूसरी बात अखिलेश यादव भी बाहरी नेता है इसलिए बिहार की जनता शायद उनके बातों को गंभीरता से न ले क्योंकि बिहारीयों का कहना है कि बिहार में बिहारी ही रहने चाहिए,उत्तर प्रदेश में जब अखिलेश यादव का शासन था तो युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ा यह बहुत बड़ा मुद्दा बिहार में साबित हो सकता है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव युवाओं को रोजगार दे नहीं पाए और बिहार में रोजगार की बात कर रहे हैं
कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ का प्रचार भाजपा को धार्मिक और संगठनात्मक दृष्टि से लाभ पहुंचा सकता है, वही अखिलेश यादव का चेहरा यादवों को,अति पिछड़ा वर्ग को लाभ पहुंचा सकता है अब देखना है की यूपी के बड़े नेताओं का कितना असर पड़ता है बिहार के चुनाव पर,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं फिलहाल वह सपा के मुखिया हैं,इनका चेहरा यादवो को और कुछ हद तक मुसलमान को एकजुट कर सकता है, अखिलेश यादव के प्रचार से लालू यादव के परिवार को मजबूती मिल सकती है,अखिलेश यादव जहां खुद को एक युवा नेता के तौर पर पेश करते हैं वहीं बिहार के युवा रोजगार,शिक्षा,पलायन,सड़क,बिजली
कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ का प्रचार भाजपा को धार्मिक और संगठनात्मक दृष्टि से लाभ पहुंचा सकता है, वही अखिलेश यादव का चेहरा यादवों को,अति पिछड़ा वर्ग को लाभ पहुंचा सकता है अब देखना है की यूपी के बड़े नेताओं का कितना असर पड़ता है बिहार के चुनाव पर,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल