आखिर क्या सच में वंदे मातरम में कांग्रेस ने संशोधन किया था

वंदे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया जिसे बीजेपी ने विभाजनकारी मानसिकता वाला बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वंदे मातरम के कुछ महत्वपूर्ण छंदों को 1937 में कांग्रेस ने हटा दिया और यह बात प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में कहा और वह भी इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में जहां स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया,वंदे मातरम के बोल थोड़े कठिन है और शुद्ध भाषा में लिखे हुए,यह गीत भारत के आजादी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना जिसे आज भी गाने पर गर्व होता है,लेकिन हाल फिलहाल के दिनों में यह वंदे मातरम विवादों से घिरा हुआ है हालांकि कांग्रेस ने कहा किया निर्णय उसे समय के नेता और विचारधारकों के राय पर आधारित था कांग्रेस का कहना है कि रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा था कि पहले दो छंद को स्वीकार किया जाएगाhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं पूरा मामला क्या है:
वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रगीत पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया लेकिन मोदी ने कहा कि वंदे मातरम के संशोधन ने विभाजन के बीज बोये थे यानी कि कांग्रेस ने संशोधन करके वंदे मातरम के कुछ छंदों को हटाया,आपको बता दे की वंदे मातरम छह छंदों में लिखा हुआ है लेकिन उसमें से दो छंद गाया जाता है बाकी चार छंदों को ऐसा कहा गया कि यह हटाया गया जो,दो छंद है जिसे गया जाता है वह है
“सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्॥
शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्॥
इन छंदों में भारत माता की प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन है जिसमें नदी,खेत,जल,पेड़ पौधे इन सब का वर्णन किया गया है,वही जो छंद हटाए गए हैं वह हैं
(तीसरा पद्य)
कोटि-कोटि कंठ कल-कल-निनाद-कराले,कोटि-कोटि भुजैर्धृत खड़्ग-करवाले,अबला केनो मा एतो बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,रिपुदलवारिणीं मातरम्॥
(चौथा पद्य)
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम्,नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्,सुजलां सुफलां मातरम्॥
(पाँचवाँ पद्य)
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,धरणीं भरणीं मातरम्॥
(छठा पद्य)
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्॥
इन छंदों में भारत माता को दुर्गा,सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में दर्शाया गया है और उनका वर्णन किया गया है इसमें कुछ मुस्लिम नेताओं का कहना था कि यह मूर्ति पूजा के लिए छंद लिखा गया है जो कि हमारे प्रतिकूल है इसलिए हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे और राष्ट्रीय एकता का हवाला देते हुए कांग्रेस ने यह कहा कि इसके दो छंद गाये जाएंगे बाकी चार छंदों को हटाया जाएगा क्योंकि बाकी चार छंदों में धार्मिक प्रतीकों का वर्णन किया गया है जो एक विशेष समुदाय के लिए है,यानी की जिस छंद में भारत माता का वर्णन है उसे रखा गया है और जिस छंद में हिंदू देवी देवताओं का वर्णन है उसे हटाया गया है,1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा यह गीत लिखा गया बाद में उनके उपन्यास आनंद मठ में 1882 में इसे शामिल किया गया तब उन्होंने यह नहीं सोचा था कि इस गीत के कुछ छंद हटा दिए जाएंगे,1950 में इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया लेकिन कुछ समुदायों के विरोध के कारण तत्कालीन सरकार ने चार छंद हटा दिए गए, क्या 1875 में जब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा तो उस समय क्या देश में हिंदू मुसलमान नहीं थे,क्या उस समय यह गान नहीं गाया जाता था,यही कारण है कि आज देश में हिंदू मुसलमान निरंतर राजनीति का हिस्सा रहा है और रहेगा
यह देश हमेशा हिंदू मुसलमान की राजनीति में उलझा रहा है धर्म की बात करते हैं तो बीजेपी सामने आ जाती है,कास्ट की बात करें तो कांग्रेस सामने आ जाती है ऐसे, ऐसे में हिंदू मुस्लिम की राजनीति में आज देश फस चुका है और देश का भविष्य कहां जा रहा है यह नेता नहीं सोच रहे है बस किसी तरीके से गद्दी मिल जाए चाहे उसका तरीका कितना ही गलत क्यों ना हो कोई फर्क नहीं पड़ता,आज प्रधानमंत्री मोदी ने जी राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का मुद्दा छेड़ दिए है,उनके कहने का तात्पर्य यह है कि कांग्रेस हिंदुओं की हितैषी नहीं है वह हमेशा मुसलमान का साथ देती है और आज भी कांग्रेस का वही हाल है कि मुसलमान को छोड़कर हिंदुओं को टारगेट करती है,खैर आपको क्या लगता है कि क्या वंदे मातरम के पूरे 6 छंद को गाया जाना चाहिए या फिर दो छंदों को गाया जाना चाहिए,या फिर यह बीजेपी का केवल मूल मुद्दों से ध्यान भटकने का मुद्दा है,धन्यवाद