क्या बीजेपी कर्नाटक में कांग्रेस को तोड़ सकती है

इस समय कर्नाटक की स्थिति बहुत बुरे दौर से गुजर रही है,कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया है कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने हाईकमान के निर्देश पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को अपने घर बुलाया है सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि यह मामला शांत करने के लिए दोनों की बैठक हुई है, ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी कर्नाटक में कांग्रेस को तोड़कर अपनी सरकार बनाने की चाहत में हैhttp://news24hourslatest.in
क्या कांग्रेस टूटेगी:
कर्नाटक में डीके शिवाकुमार और सिद्दारमैया के बीच की खींचतान चल रही है दोनों के अपने-अपने समर्थन मे अपने-अपने दावे कर रहे हैं लेकिन इन दोनों में किसका पलड़ा भारी है,कौन बनेगा कर्नाटक का मुख्यमंत्री हालांकि कहा जा रहा है सिद्दारमैया की कुर्सी सुरक्षित है और अभी डीके शिवाकुमार CM नहीं बनने जा रहे हैं लेकिन इन सब के बिच मे डीके शिवाकुमार अगर चाहे तो अपने विधायकों के दम पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन सकते हैं लेकिन कैसे?कर्नाटक में डीके शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बीच जो चल रहा है उसको लेकर राजनीति गर्म है इस बीच भाजपा ने दावा किया सिद्दारमैया कर्नाटक में कांग्रेस सरकार गिरा सकते है, BJP नेता सुनील कुमार ने अविश्वास प्रस्ताव तक की बात कहि है ऐसे में समझना जरूरी है कि कर्नाटक का पूरा गेम क्या है दरअसल कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सिट यानी किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 113 सीट चाहिए ऐसे में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की आंधी चली और पार्टी में 135 सिट अपने नाम कर ली बीजेपी तमाम कोशिशें के बाद भी 66 सीट जीत पाई,जनता दल सेक्युलर के खाते में गई सिर्फ 19 सिट,अब अगर बीजेपी और जीडीएस की सिट जोड़ दी जाए तो कुल मिलाकर 85 सिट बनती है इसका मतलब यह है कि गठबंधन बहुमत से 28 सिट दूर है,अगर किसी तरह 28 सिमट जुड़ती है तो बीजेपी जीडीएस गठबंधन 113 के बहुमत तक पहुंचे जायेगा, पूरा समीकरण तब बदल सकता है जब डीके शिवाकुमार कांग्रेस से नाराज हो जाए और बागी हो जाए,अगर वह करीब 30 विधायकों को अपने साथ कर लेते हैं तो कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो सकता है शिवकुमार महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे बन सकते हैं बगावत के बाद मुख्यमंत्री पद तक पहुंच सकते हैं,हम सबको याद होगा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे किस तरीके से सरकार में आए थे आपको बता दे की एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में बहुत विद्रोह किया,लेकिन कर्नाटक मे इस पर अभी तक कोई अधिकारी या स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है हालांकि खुद शिवकुमार दावा करते हैं कि उनके पास करीब 138 विधायकों का दावा कितना सच है या आने वाले दिनों की राजनीति ही तय कर पाएगी लेकिन इन सब के बीच में अलग-अलग मतों की एंट्री भी हो गई है जवाब दिया इस बीच धार्मिक गुरुओं के इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप में से जाति का टकराव में बदल दिया कांग्रेस का अंदरूनी संकट अब तक सिर्फ पॉलिटिकल नेताओं तक ही सीमित माना जा रहा था लेकिन अब मतों की एंट्री हो गई है वहीं दूसरी जाति के नेताओं की तरफ से भी अप्रत्यक्ष चेतावनी आई मतों की एंट्री से मुख्यमंत्री बदलने का मुद्दा क्यों फूट पड़ रहा है यह भी समझना जरूरी है कि अभी फिलहाल सिद्दारमैया की कुर्सी सुरक्षित है और डीके शिवकुमार को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा समर्थन,ऐसे में उनके सीएम पद को छोड़ना मुश्किल है ऐसे में सवाल यह है कि क्या सिद्दारमैया बने रहेंगे या डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा,दरअसल कांग्रेस पार्टी के सूत्रों ने कहा है कि सिद्दारमैया की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है क्योंकि वह एक बहुत बड़े ओबीसी नेता है,सिद्दारमैयाको अन्य समुदाय और पार्टी के 137 विधायकों में से 100 से ज्यादा का मजबूत समर्थन है ऐसे में उनकी सहमति के बिना नेतृत्व परिवर्तन मुश्किल है,कर्नाटक कांग्रेस के भीतर डीके शिवकुमार की दावेदारी आंतरिक समर्थन की कमी के कारण आज फिर भी दिख रही है क्योंकि उन्हें राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वह कलिंगा जाति का समर्थन प्राप्त है जिनके वोट ने 2023 के जितने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी,इधर भाजपा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है हालांकि शिवकुमार के बीच चल रही है कि ज्यादा कुछ ना करें या ऐसा कुछ ना कहे जो उनके खिलाफ इस्तेमाल कुल मिलाकर सिद्दारमैया खुद पद नहीं छोड़ेंगे जब कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड योजना चाहते हैं
कर्नाटक में भी इस समय कांग्रेस में अंदरूनी फुट हो चुकी है जिसकी वजह से कांग्रेस बैक फुट पर आ रही है कुछ लोगों का कहना है कि बीजेपी शिवकुमार को तोड़कर अपने में खेमे में शामिल कर सकती है तो ऐसे में क्या फिर सिद्दारमैया की सरकार बन पाएगी,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
