1 साल में 37 लाख मामले कुत्तों के काटने से हुए:6 राज्यों में

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया है की आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम में रखने का,दूसरी तरफ छह राज्यों के आंकड़े सामने आए हैं आवारा कुत्तों के काटने के, एक सर्वे के मुताबिक एक साल में 37 लाख से अधिक मामले आए हैं कुत्तों के काटने के, जिसमें कुछ इंसान गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं और कुछ की तो मौत हो जाती हैhttp://news24hourslatest.in
डॉग बाइट केसेस:
देश के विभिन्न राज्यों में डॉग बाइट के मामले काफी हद तक बढ़ गए हैं,आपको बता दे की 2024 में डॉग बाइट के सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र, तमिलनाडु में देखने को मिले,वही दिल्ली और NCR रीजन में आवारा कुत्ते लोगों की जान की समस्या बन गए है,कब किसको दौड़ा लेते हैं, कब किसको काट लेते हैं,इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता,छोटे-छोटे बच्चे इसका काफी शिकार होते हैं,इसी को संज्ञान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर रीजन में जो आवारा कुत्ते हैं उनको शेल्टर होम में डालने का निर्णय लिया है,माननीय सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि इसमें भावनाओं को नहीं देखा जा सकता आम लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है
लाखों लोग होते हैं कुत्ते काटने का शिकार:
पशुपालन विभाग के तरफ से जो आंकड़े जारी किए गए हैं उनमें यह देखा गया है कि कुत्तों के काटने के मामले लाखों में है एक साल में,जिसमें महिलाएं,बुजुर्ग, छोटे बच्चे काफी हद तक शामिल है
किन राज्यों में है सबसे अधिक मामले:
अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो साल 2025 में जनवरी के महीने में 4000 ऐसे कैस आएं जो कुत्ते काटने के द्वारा हुए हैं,वही दिल्ली में 2024 में 25000 से ज्यादा डॉग बाइट के कैस आए हैं,महाराष्ट्र में 4 लाख 85 हजार से ज्यादा मामले सामने आए,बिहार में दो लाख 63 हजार, आंध्र प्रदेश में दो लाख 45 हजार और असम में एक लाख 66 हजार मामले सामने आए
भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से कुत्ते के काटने और उससे होने वाले रेबीज बीमारी के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं,जैसे की राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP),जिसमें राज्यों को रेबीज के लिए बजट देना,एंटी रेबीज वैक्सीन मुहैया कराना,ट्रेनिंग प्रोग्राम और रेबीज हेल्पलाइन जारी करने जैसे काम होते
2019 की पशु जनगणना के अनुसार:
2019 के पशु जनगणना के अनुसार भारत में कुल डेढ़ करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे,दिल्ली में 5 लाख कुत्तों की संख्या दर्ज हुई थी,वही उत्तर प्रदेश में 20 लाख से ज्यादा कुत्तों की संख्या दर्ज हुई थी,वही महाराष्ट्र में 15 लाख कुत्तों की संख्या दर्ज हुई थी
जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक के आंकड़े:
जनवरी 2024 से लेकर दिसंबर 2024 तक कुत्ते के काटने के कुल 3717336 मामले सामने आए इसका साफ मतलब यह है कि करीब 37 लाख से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने काटा है, इसी आंकड़ों के मुताबिक बताएं तो साल भर में 50 से ज्यादा मोतें हो गई है और सबसे ज्यादा रेबीज की कैस भी सामने आए हैं,मंत्रालय ने जो रिपोर्ट जारी की है उसमें 15 साल से कम बच्चों की संख्या सबसे अधिक है,और आपको यह भी बता दें कुत्ते के काटने के कारण जो रेबीज हो रहे हैं जिन्होंने एंटी रबीज वैक्सीन नहीं लगाया है, जिन्होंने इंजेक्शन लगवाया है वह तो बच गए जिन्होंने नहीं लगाया उनको तो कोई बचा ही नहीं सका
रेबीज कुत्ते के काटने की बीमारी और उसका समाधान:
आपको बता दे कुत्ते काटने से जो बीमारी होती है वह रेबी है जो लाइलाज बीमारी होती है अगर वक्त पर उसे सही ना किया जाए,आप लोग को पता होगा कि हाल ही में कबड्डी खिलाड़ी बृजेश सोलंकी की मौत रेबीज के कारण हुई थी कुत्ते काटने के बाद, क्योंकि उन्होंने एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया था,और आपको यह भी बता दें कि एक छोटे से कुत्ते के बच्चे को बचाने की कोशिश में उनकी जान चली गई और उन्होंने एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया और कुछ महीनो बाद उसका प्रभाव इतना दुखदाई हो गया कि उनकी मृत्यु हो गई, रेबीज 100% घातक बीमारी है यह बात आप ध्यान में रखिएगा,अगर कुत्ते काटने के बाद तुरंत एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाए आपने और लापरवाही की तो मौत निश्चित है
