हलफनामा तो नहीं लेकिन ये दे सकते हैं राहुल गांधी

वोट चोरी का संगीन आरोप नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाया है,पिछले कई दिनों से यह चर्चा का विषय बन गया है विपक्ष और उसके गठबंधन के नेता यह चाहते थे कि चुनाव आयोग इस पर बोले तो चुनाव आयोग इस पर अब खुलकर बोल दिया है,या तो राहुल गांधी हलफनामा दे नहीं तो देश से माफी मांगेhttp://news24hourslatest.in
चुनाव आयोग vs राहुल गांधी:
राहुल गांधी का जो चुनाव आयोग पर सवाल है उस पर चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि यह निराधार आरोप चुनाव आयोग पर लगाया जा रहा है और यह संविधान के खिलाफ है,अब धीरे-धीरे मामला खुल के सामने आ रहा है,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपो को निराधार बताते हुए यह कहा की मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य कमियों को दूर करना है ज्ञानेश कुमार ने यह कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का एकमात्र उद्देश्य है जो भी कमियां सामने दिख रही है उनका निवारण करना, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप एक चिंता का विषय बन गया है
मुख्य बातें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की:
1-ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम कर रहा है,जो भी विपक्षी दल वोट चोरी या अन्य कोई आरोप लगा रहे हैं उसका कोई सबूत नहीं है,वह निराधार है और राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए हैं उसके लिए उन्हें हलफनामा देना पड़ेगा या फिर देश से माफी मांगी पड़ेगी
2- मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि यह समस्या गंभीर है कि बिहार में SIR को लेकर गलत संदेश फैलाया जा रहा है,चुनाव आयोग ने सभी दलों को अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए 15 दिन का समय भी दिया है,लेकिन विपक्ष और और उनके गठबंधन साथी चुनाव आयोग की बातों को नजरअंदाज करते हुए जनता के बीच में है और जब समय निकल जाएगा तो कहेंगे कि चुनाव आयोग ने मुझे जवाब नहीं दिया
3- चुनाव आयोग का यह भी कहना है कि विपक्ष यह संविधान पर भी आरोप लगा रहा है अगर उन्हें कोई दिक्कत महसूस हो रही हो तो 45 दिन के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं,यह वोट चोरी का आरोप निराधार है,राहुल गांधी की धमकियों से चुनाव आयोग करने वाला नहीं है,अगर राहुल गांधी को आरोप की जांच करनी है तो हालतनामा लिख कर दे वरना सात दिन के अंदर देश से माफी मांगे
4-ज्ञानेश कुमार का का कहना है कि चुनाव आयोग ना तो किसी पक्ष में है, ना विपक्ष में है, समकक्ष में है, इसलिए जो भी आरोप लगाया जा रहे हैं वह निराधार हैं,उन्होंने कहा, “जमीनी स्तर पर सभी मतदाता, सभी राजनीतिक दल और सभी बूथ स्तरीय अधिकारी मिलकर पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं,सत्यापन कर रहे हैं, हस्ताक्षर कर रहे हैं और वीडियो प्रशंसापत्र भी दे रहे हैं।
5-मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “कुछ मतदाताओं ने दोहरे मतदान का आरोप लगाया। जब सबूत मांगा गया तो कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे झूठे आरोपों से न तो चुनाव आयोग और न ही कोई मतदाता डरता है। जब चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर भारत के मतदाताओं को निशाना बनाकर राजनीति की जा रही
6- मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि चुनाव आयोग नीडर होकर बिना किसी भेदभाव के अमीर, गरीब,बुजुर्ग,जवान काम करता है,उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में 7 करोड़ मतदाता चुनाव आयोग के साथ है, इसलिए ना तो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर और मतदाताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना चाहिए
दोस्तों प्रेस कॉन्फ्रेंस तो चुनाव आयोग ने कर दिया, उन्होंने राहुल गांधी को सीधा-सीधा जवाब दिया है या तो वह देश से माफी मांगे या फिर हलफनामा लिखकर दें क्योंकि यह गंभीर मुद्दा है बिना हलफनामे के जांच नहीं होगी, मेरा कहना है कि चोर ने अगर चोरी की है तो उसे सजा तो मिलेगी ही परंतु जिसने यह आरोप लगाया कि उसने चोरी की है और उसे प्रमाण लिखित रूप में मांगा जा रहा है और वह पूरा आश्वस्थ है कि चोरी हुई है तो लिख कर देने में क्या हर्ज है,अगर साधारण बातों में और समझिए कि अगर आप किसी को पैसा देते हैं किसी के माध्यम से उसमें भी आप एफिडेविट लगाते हैं,आधार कार्ड लेते हैं, डेट लिखते हैं और धनराशि लिखते हैं कि मैं इतनी धनराशि दी और इतने दिन में मुझे वापस चाहिए, और यह आरोप जो राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाया यह तो बहुत ही गंभीर आरोप है और आरोप की जांच भी होनी चाहिए क्योंकि पता तो चले कि भाजपा ने कितनी चोरी की है,कि है कि नहीं की है,की चोरी के दम पर आज प्रधानमंत्री मोदी बने हैं,तो राहुल गांधी को लिखकर दे देना चाहिए हलफनामे में की जांच होनी चाहिए, आखिर इस पर राहुल गांधी पीछे क्यों भाग रहे हैं,क्या उनको डर लग रहा है कि अगर कुछ आरोप सिद्ध नहीं हुआ तो उन्हें जेल भी हो सकती है यह भी प्रावधान है,आप चुनाव आयोग के पास जाइए मिलकर बात करिए,जनता चुनाव आयोग नहीं है जनता केवल वोट देगी जो भी निर्णय लेना है वह चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को लेना है,पक्ष हो या विपक्ष हो जनता के बीच में इसलिए जाता है ताकि उन्हें मोटिवेट करके सत्ता हासिल की जा सके,ठीक है आप केंद्र सरकार के योजनाओं का पूर्ण रूप से जनता में जाकर विरोध कर सकते हैं परंतु चुनाव आयोग के ऊपर आरोप लगाएंगे तो चुनाव आयोग से जवाब मांगे ना जनता के बीच जाने की क्या जरूरत है,अगर जनता वोट ही ना दे तब क्या करेंगे, अगर वोट चोरी हुई है तो यह तो भाजपा की सरकार में भी हुई होगी और कांग्रेस की सरकार में भी हुई होगी ऐसा तो है नहीं कि कांग्रेस दूध की धुली है,तो आप चुनाव आयोग के निर्णय पर अपना जवाब दें जनता इसका इंतजार कर रही है, जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल