Bihar Vidhansabha Chunav:चुनाव आयोग Vs पक्ष Vs विपक्ष

इन दिनों बिहार में चुनाव आयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट के फैसले को लेकर सभी पार्टियों में एक चिंता का विषय बन गया है,कुछ महीने बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं,जिसको लेकर सभी पार्टियां धरातल पर खूब मेहनत कर रही है की कैसे जनता को लुभा सके,एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला चालू है,इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा की इस चुनाव में मैच फिक्सिंग भी हो सकती है,चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के दबाव में आकर फैसला ले सकता है,वोटर लिस्ट को लेकर तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा किएhttp://news24hourslatest.in
चुनाव आयोग ने क्या कहा:
1-आगमी बिहार विधानसभा सभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पर पड़े प्रश्न उठाए गए है लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने ऐसा आदेश पारित किया है की दोनो पार्टी पक्ष और विपक्ष परेशान नजर आ रही है,चुनाव आयोग का कहना है की बिहार के 8 करोड़ मतदाताओं का रिवेरीफिकेशन होगा,दरअसल चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से वोटर का रेवरिफिकेशन का आदेश दिया है जिसके तहत वोटरों को अपना सत्यापित करना होगा,तय सरकारी दस्तावेज दिखाने होंगे और जिसके पास सरकारी दस्तावेज नहीं होंगे उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जायेंगे और चुनाव आयोग ने ये भी कहा है की सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से सत्यापित नही होगा और वोटरों को रिवेरीफिकेशन करने की अंतिम तिथि 26 जुलाई निर्धारित की गई है,ऐसे में जनता को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है,चुनाव आयोग ये भी कहना है की अगर किसी को कोई भी आपत्ति है तो उसके लिए उसे 1 सितंबर तक का समय मिलेगा
2-बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने एक नया फैसला जारी कर दिया है,चुनाव आयोग का कहना है की जो भी बूथ लेवल ऑफिसर है वो घर घर जाकर गड़ना पत्रों में इनफॉर्मेशन जमा करेंगे,चुनाव आयोग का कहना है की मतदाता सूची का ड्राफ्ट 1 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा,चुनाव आयोग ने साफ साफ कहा है कि बिहार में मतदाता सूची का वेरिफिकेशन बहुत जरूरी है क्योंकि ये वेरिफिकेशन 2003 के बाद नही हुई,चुनाव आयोग के अनुसार जो मतदाता 1 जनवरी, 2003 की मतदाता सूची में शामिल थे, उन्हें सिर्फ़ ये Enumeration Form यानी गणना पत्र भरकर जमा करना है. उन्हें कोई सबूत नहीं देना होगा. बिहार में ऐसे 4.96 करोड़ मतदाता हैं. चुनाव आयोग ने 2003 की ये वोटर लिस्ट अपनी वेबसाइट पर डाल दी है
चुनाव आयोग के मुताबिक:
चुनाव आयोग के मुताबिक 2003 के बाद लोगों में बहुत बदलाव हुआ है कहने का तात्पर्य ये है की कितने लोग गांव शहरों में गए है,कितने नए वोटर भी जुड़े होंगे,प्रवास काफ़ी तेज़ हुआ है,बिहार के लोग दूसरे राज्यों गए हैं, दूसरे राज्यों के लोग बिहार आए हैं.कई नागरिक 18 साल पूरा करने के बाद नए मतदाता बने हैं,और जितने लोगों की इस 22 साल के दौरान मृत्यु हुई है उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है,इसलिए चुनाव आयोग का कहना है कि री वेरिफिकेशन बहुत जरूरी है ताकि जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है उन्हें वोटर लिस्ट के नाम से बाहर किया जाए
विपक्ष का क्या तर्क है :
चुनाव आयोग के इस फैसले से विपक्ष काफी नाराज है,उनका कहना है कि चुनाव आयोग ये निर्णय जल्दबाजी में ले रहा है जिसकी वजह से लाखों सही मतदाता भी लिस्ट से बाहर हो जाएंगे,विपक्ष का कहना है कि 26 जुलाई तक अपने या अपने माता-पिता की जन्मतिथि या जन्मस्थान के सबूत जुटाना सभी लोगों के लिए संभव नहीं होगा,आरोप लगाते हुए विपक्ष का कहना है कि इसी बहाने चुनाव आयोग एनआरसी लाने की कोशिश में है,लेकिन चुनाव आयोग विपक्ष के सभी प्रश्नों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्य मुद्दा है निष्पक्ष चुनाव कराने का
पक्ष का क्या कहना है:
चुनाव आयोग के इस फैसले से सत्ता पक्ष या एनडीए में भी परेशानी दिखने लगी है,एनडीए का कहना है चुनाव आयोग ने अपने इस फैसले से इस चुनाव में रायता फैला दिया है,मतलब एनडीए का कहना है की वोटिंग लिस्ट को लेकर है,कुछ अखबारों में छपा है की बिहार में बीजेपी के गठबंधन की पार्टी यानी नीतीश की जेडीयू या चिराग की एलजेपी या अन्य पार्टियां इस बात से काफी डरें है की चुनाव आयोग ने महज विधानसभा चुनाव के कुछ पहले ही आखिर ऐसा निर्णय क्यों लिया,बीजेपी और सहयोगी पार्टी को डर है की चुनाव आयोग के इस फैसले से कही नए वोटर भी न बहक जाए,लोक जन सकती पार्टी के नेता चिराग पासवान का कहना है की इससे वोटर भी छूट सकते है,सत्ता पक्ष का कहना है की चुनाव आयोग ने जो 11 दस्तावेज मांगे है वोटर रिवेरीफिकेशन करने के लिए उसे वोटर कहा से लायेंगे क्योंकि ज्यादातर लोग को अशिक्षित है,गरीब है
कार्यकर्ताओं का तर्क:
चुनाव आयोग के इस फैसले सबसे अधिक परेशान है तो पार्टी के कार्यकर्ता क्योंकि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को ही इस काम में लगा रही है की एक एक लोग वोटर लिस्ट ने होने चाहिए ताकि उनका वोट बैंक न खराब हो,घर घर जाकर दस्तावेज के बारे में जानकारी देना बहुत बड़ा टास्क है
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