युद्ध के बीच में अचानक सीजफायर क्यों?

ये बड़ा सवाल है की चार दिन तक चले इस युद्ध में अचानक सीजफायर क्यों,क्यों अमेरिका को को इसका ऐलान करना पड़ा की दोनो देशों के बीच समझौता हो गया है,केंद्र सरकार और मंत्री गण क्या कर रहे थे जबकि ये अपने देश का मामला है इसमें अमेरिका क्यों कूद पड़ा,http://news24hourslatest.in
भारत पाकिस्तान के बीच सीजफायर घोषित हो चुका है,पाकिस्तान इसको एक जश्न की तरह मना रहा है,पाकिस्तान के लोग सड़कों पर निकल कर जश्न मना रहे है जैसे पाकिस्तान ने युद्ध जीत लिया है,अपनी नाकामी को छिपाने के लिए वो जश्न मना रहे है,लेकिन भारत के लोगों के मन में कुछ और ही चल रहा है,उनका कहना है की ऐसा क्या हो गया की चलते युद्ध में सीजफायर करना पड़े,भारतीयों के मन में आक्रोश है इस चीज को लेकर,भारत के लोगों का कहना था कि इस बार पाकिस्तान को ऐसा सबक सीखना है की कोई आतंकवादी घटना करने से पहले सौ बार सोचे,
इस विषय पर भारत के पीएम मोदी ने भी कुछ नहीं बोला है,ना ही कोई मंत्री का बयान आया है,आखिर ये आग इतनी जल्दी ठंडी कैसे हो गई,भारतीय सेना अपने पूरे एक्शन में थी,पाकिस्तान के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दे रही थी फिर अचानक ऐसा क्या हुआ की आर्मी को शांत करना पड़ा,क्या इसमें अमेरिका का हाथ है,बताया जा रहा है की अमेरिका की वजह से पाकिस्तान को आईएमएफ ने इतना बड़ा कर्ज दिया है जबकि भारत इसका जमकर विरोध किया था,क्या अमेरिका भीतर भीतर पाकिस्तान का साथ दे रहा है,
भारत में लोगों का कहना है की भारतीय मीडिया और सरकार कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे है,उनका कहना है की पीएम मोदी के इतना कड़ा तेवर आखिर ठंडा कैसे हो गया,क्या इसमें बाहरी ताकतें भी है,कुछ लोग तो कह रहे है की ये सब अमेरिका का करवाया हुआ है और भारत अमेरिका का रिश्ता खराब न हो इसलिए भारत ने अमेरिका के कहने पर सीजफायर की घोषणा की,
कहानी पूरी ये है की जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था,और पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया और अमेरिका से मदद मांगे लगा तो अमेरिका ने भी यही कहा था कि कोई देश आतंकवाद के खिलाफ समझौता नहीं करेगा,लेकिन जैसे ही भारत पाकिस्तान के परमाणु अड्डों पर हमला करना शुरू किया वैसे ही अमेरिका पूरी तरीके से बदल गया और भारत से बात कर युद्ध को विराम देने को कहा,आपको बता दे भारत की ये पहली फौज है जो किसी परमाणु देश के घर में घुस कर हमला लिया और ये बात अमेरिका अच्छे से जान गया था की भारत अब रुकने वाला नही है इसलिये उसने सोचा की दोनो देशों से बात कर के मामले को ठंडा किया जाए,अमेरिका नही चाहता है की पाकिस्तान के परमाणु अड्डों पर भारत हमला करे,क्योंकि अमेरिका कभी भी पाकिस्तान और चीन के जरिए ही भारत पर दबाव बना सकता है,इससे केवल अमेरिका को ही फायदा होगा,अमेरिका खुद को बादशाह बनने के लिए कुछ भी कर सकता है,अमेरिका पाकिस्तान का सिर्फ उसे करना जनता है जब उसका काम समाप्त हो जाता है तो फिर वो उस देश की भूल जाता है,बर्बाद कर देता हैं,अमेरिका और पाकिस्तान का रिश्ता भी पुराना है,भले ही अमेरिका ने पाकिस्तान में घुस कर ओसामा बिन लादेन को मारा था और पाकिस्तान उसका कुछ बिगाड़ भी नही पाया था,दरअसल अमेरिका पाकिस्तान और चीन दोनो से बिजनेस करना चाहता है और ये नही चाहता के भारत आत्मनिर्भर बने,अमेरिका का डर ये है की अगर भारत भी हथियार बनाने लगेगा तो अमेरिका का क्या होगा,क्योंकि अगर भारत हथियार बनाने लगेगा तो दूसरे देश भी भारत से हथियार खरीदने लगेंगे तो इसमें अमेरिका का घाटा हो जायेगा,इसलिए अमेरिका दोनो देशों के बीच आकर खड़ा हो गया है,सबको लगता है अमेरिका को बहुत परवाह है हर देश की लेकिन ये बात सच नही है,उससे सिर्फ और सिर्फ अपना दिखता हैं और किसी का नही,अमेरिका ने जो पाकिस्तान को कर्ज दिया है उसे वसूल भी करना भी करना है और अगर भारत पाकिस्तान को बर्बाद कर देगा तो फिर पाकिस्तान अपना कर्ज कैसे चुकाएगा,पाकिस्तान को कर्ज देने का अमेरिका का मकसद बस इतना है की पाकिस्तान अमेरिका के आगे नतमस्तक हो जाए,और अमेरिका अपना कारोबार करता रहे,अमेरिका ने अपनी टीम यानी नासा को पाकिस्तान के रावलपंडी में भेजा है ताकि परमाणु रेडिएशन कली जांच हो सके,बताया जा रहा है की भारत ने पाकिस्तान के जो परमाणु अड्डों पर बमबारी की है उससे पाकिस्तान में रेडिशन फैल गया है,
अब देखना है की भारत का अगला कदम क्या होगा,क्या युद्ध विराम पूर्ण रूप से लगेगा या फिर कोई एक्शन भारत लेगा,क्योंकि भारत के लोगों का कहना है की पाकिस्तान सुधरने वाला नही है,आखिर पाकिस्तान ने युद्ध विराम के बाद भी भारत पर हमला किया वो अलग बात है की भारतीय सेनाओं ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया|
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