Donald Trump:ट्रंप चाचा कभी ईरान तो कभी इजराइल के साथ:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी इजराइल के साथ थे तो अब ईरान के साथ है,ट्रंप ईरान के परमाणु सेंटर को लेकर चर्चा में थे,अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमला कर दिया हैं,उसने स्टील्थ बॉम्बर और बंकर बस्तर की सहायता से ईरान के फोर्डों,इस्फहान और नतांज परमाणु केंद्रों को नष्ट कर दिया हैं,हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से ये ऐलान किया है की ईरान के तीन परमाणु केंद्र पूरी तरह से नष्ट कर दिए गए हैhttp://news24hourslatest.in
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा है की ईरान में शांति होगी या फिर त्रासदी,इतना कुछ करने के बाद अब अमेरिका ने बोला है की ईरान को अब युद्ध समाप्त करने के लिए सोचना चाहिए,ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा की अगर ईरान ने अमेरिकी सेना के खिलाफ कोई कार्यवाही की तो इसका अंजाम और बुरा होगा,जहां कुछ दिन पहले ही अमरीका ने ईरान पर जोरदार हमला किया वही आज वैश्विक मंच पर अमेरिका ईरान के साथ देने आगे आ गया है वो भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर
आइए जानते है अमेरिका ने ईरान की कैसे मदद की:
1-अमेरिका ने ईरान को 30 बिलियन डॉलर (लगभग 2.57 लाख करोड़) की सहायता की है और ये भी कहा है की
ये सहायता केवल ईरान अपने बिजली उत्पादन के लिए करे ना की परमाणु संवर्धन के लिए,और ये भी स्पष्ट बोला है की ये धनराशि अमेरिका द्वारा नही बल्कि अरब देशों के सहायता से दी जाएगी
2-जमा हुए भी फंड(जो की अरबों में है)को मुक्त करना,आपको बता दे ईरान का विदेशी बैंको में लगभग 6 अरब डॉलर की धनराशि जमा हैं जिसे मुक्त करने की बात अमेरिका कर रहा है
3-जो भी प्रतिबंध लगाए गए थे उसमे ईरान को राहत मिली है,क्योंकि इससे ईरान की आर्थवयस्था बाधित हो रही थी,आपको पता ही होगा ईरान की अर्थव्यवस्था ज्यादातर तेल पर टिकी हुई है
4-ईरान को अपने साथ वैश्विक मंच पर बुलाना बातचीत करने के लिए
अमेरिका ने साफ साफ ईरान को के भी दिया है की ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरीके से बंद करे लेकिन ईरान के कुछ एयर ही कहना है ईरान ने कहा है की वो न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) पर हस्ताक्षर किया है इसलिए उसको पाने परमाणु संवर्धन पर अधिकार होना चाहिए,ये सारे प्रस्ताव ट्रंप ने ईरान को ऑफर किए है ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला करने के बाद,क्योंकि ईरान और इजराइल दोनो देश ईरान के परमाणु अड्डों को पूरी तरह से बर्बाद करना चाहते थे,यहां तक की जर्मनी, इटली,ऑस्ट्रेलिया जैसे देश को भी ये डर सताने लगा था कि ईरान अगर परमाणु बम बनाने लगे तो हमला भी कर सकता है
आइए जानते है पूरा समझौता:
आपको बता दे की ईरान ने अन्य देशो के साथ (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी) मिलकर एक संधि की थी की वो अपना परमाणु का प्रोजेक्ट अपने ही देश तक सीमित रखेगा,और अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस जर्मनी को ये वादा केभी किया था अंतराष्ट्रीय निरीक्षण से भी ईरान पीछे नहीं हटेगा,इतना सब होने के बाद ईरान ने परमाणु प्रोजेक्ट को अपने तक ही सीमित रखा
अमेरिका ने रुख बदला:
ईरान और अन्य देशों के बीच संधि होने के बावजूद,अमेरिका ने अपने को इस संधि से बाहर कर लिया और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिए और नतीजा ये हुआ की ईरान ने भी कुछ नियम का उलंघन करना शुरू कर दिया जैसे कि यूरेनियम संवर्धन को 60% तक बढ़ा दिया और यही कारण है की आज अमेरिका ईरान के तीन परमाणु अड्डों पर फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान पर जमकर हवाई हमले किए,आपको ये भी बता दे की अमेरिका ने जो ईरान पर हमला किया था उसमे 30,000 पाउंड के मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बमों का इस्तेमाल किया था
आपको बता दे की ईरान का जो भूमिगत संरचना था जिसमे परमाणु सेंटर थे वो बहुत ही मजबूत थे,ईरान ने दावा किया था की अमेरिका के जोरदार हमले के बाद भी उनके परमाणु अड्डों को उतना नुकसान नहीं पहुंचा,लेकिन अमेरिका ने भी ये दावा किया था की उसने ईरान के तीनों परमाणु अड्डों को ध्वस्त कर दिया
ईरान के क्या दावा है :
ईरान ने दोनो देशों के हमले का मुहतोड़ जवाब दिया है,ईरान ने अमेरिका के हमले का जवाब भी दिया,ईरान ने उनके एयरबेस पर हमला किया और इजराइल पर भी खूब मिसाइल और ड्रोन से हमला किया,ईरान ने ये दावा किया है की हम परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली उत्पादन,और अन्य लाभों के लिए कर रहे है ना की किसी देश पर हमला करने के उद्देश्य से कर रहे हैं
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ये वीडियो भी देखे:”आखिर ये यूरेनियम इतना खतरनाक क्यों होता है ?”https://youtu.be/fPYp2CxLarw?si=mPjwSuHXnw_G_oVn