Bihar News:सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

बिहार में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर जो बवाल हो रहा है अब वो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है,आपको बता दे की चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है,ADR कि कहना है कि चुनाव आयोग के इस फैसले को पूरी तरह से रोक लगा दी जाए,सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर चुनाव आयोग से सीधा सवाल किया है आखिर ये कौन सा समय है पुनः निरीक्षण करने का जबकि विधानसभा चुनाव सर पर हैhttp://news24hourslatest.in
बिहार न्यूज:
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि चुनाव आयोग के इस कदम से कोई परेशानी नहीं है,लेकिन ये समय नहीं है जांच परताल करने का,क्योंकि विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है ऐसे में वोटर लिस्ट को लेकर संशोधन करना उचित नहीं है,सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना कोई गलत नही है लेकिन चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने पर सवाल है,सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सब कुछ समय सीमा शीन ही करना चाहिए,अगर चुनाव आयोग को मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना ही था तो इतनी देरी क्यों की,ठीक चुनाव से पहले ये सब करना न्यायसंगत नहीं है,आपको बता दे की इस केश की सुनवाई जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जायामल्या बागची कर रह है
जस्टिस सुधांशु धूलिया ने क्या कहा:
चुनाव आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि चुनाव आयोग के इस फैसले में कोई समस्या नहीं है,समस्या समय का है,क्यों की जिन लोगों का नाम समय सूची से हटा गया है उनके पास पर्याप्त समय नहीं होगा अपील करने का,जस्टिस धूलिया का कहना है कि इस प्रक्रिया में कुछ गलत नही है,लेकिन ये संविधान के खिलाफ है किसी को चुनाव से पहले उसके मतधिकार से वंचित कर दिया जाए और उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त समय ना दिया जाए
आखिर आधार कार्ड से क्या दिक्कत है :
चुनाव आयोग के वकील का कहना है कि सिर्फ आधार कार्ड से नागरिकता साबित नही होती इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आखिर आधार कार्ड को मान्यता क्यों नही दी जा रही है ,उन्होंने आगे कहा की ये काम गृह मंत्रालय का है,इसमें चुनाव आयोग को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण का क्या कहना है:
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण याचीकर्ता के रूप में सवाल किया की चुनाव आयोग का कहना है कि आखिरी बार रिवीजन २००३ में हुआ था उसके बाद अब होने की बात हो रही है जब चुनाव नजदीक है,इस अंतराल कितने चुनाव हो चुके उस समय चुनाव आयोग कहा था,अब चुनाव आयोग क्यों जागा है जब कुछ ही महीने शेष है चुनाव में,आखिर चुनाव आयोग आधार को प्रमाण के तौर पर क्यों नही के रही है,आखिर आधार के सत्यापन को क्यों नही स्वीकार कर रही है,जाहिर सी बात है की वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने चुनाव आयोग के फैसले पर बढ़ा प्रश्न उठाया है जिसका जवाब चुनाव आयोग नही दे पा रहा है
याचिकाकर्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या दलील पेश की:
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील दी की किसी भी व्यक्ति को मतदाता सूची से बाहर करना संविधान के खिलाफ है और जब चुनाव आयोग से पूछा जाता है तब चुनाव आयोग नोटिस जारी करता है,चुनाव आयोग ने 5 से 6 करोड़ लोगों को निलंबित कर दिया है
भारतीय निर्वाचन आयोग का क्या कहना है : जैसे सुनवाई हुई ECI ने सुप्रीम कोर्ट में ये दलील दी की आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है चुनाव आयोग ने ये आस्वस्थ किया है की किसी भी मतदाता का नाम बिना किसी उचित प्रकिया से वोटर लिस्ट से नही हटेगा,चुनाव आयोग का कहना है की ये उनका अधिकार है की वो विशेष गहन पुनरीक्षण करें ताकि सभी वोटरों की प्रक्रिया पूरी हो सके और मतदाता अपना बहुमल्य मर डाल सके,चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ है की क्या कोई कार्यवाही करें के लिए चुआंव आयोग के पास कितना समय होना चाहिए तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्या चुनाव आयोग ६ मांमहीने में अंदर सारी प्रक्रिया पूरी कर लेंगे
अब देखना है की चुनाव आयोग सुप्रीम के जवाब पर क्या प्रतिक्रिया देता है
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