क्या राहुल गांधी बिहार की जातीय समीकरण को पकड़ लिए हैं:Bihar Vidhansabha Chunav

जैसा कि सबको पता है कि बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं सारी पार्टियां चाहे वह इंडिया गठबंधन हो या फिर एनडीए गठबंधन हो,अपनी ताकत पुरजोर तरीके से झोंक दी है,कभी राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगाकर जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं तो वही अमित शाह इसे घुसपड़िया यात्रा का करार देकर एनडीए को मजबूत करना चाहते हैं, परंतु बिहार की असली सच्चाई क्या है आईए जानते हैंhttp://news24hourslatest.in
बिहार का जातीय समीकरण:
आप कुछ भी प्रचार कर लो बिहार में लेकिन बिहार की राजनीति का सच है जातीय समीकरण,बिहार में किसी दल या नेता की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस जाति के लोग को जोड़ सकता है,अब तक जो भी सरकारे आई बिहार में चाहे वह नीतीश कुमार की हो, चाहे वह लालू प्रसाद यादव की हो,सबने अपने-अपने जातीय वोट बैंक पर बहुत कड़ी मेहनत की है,हर दल के नेता अपने जाति के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया,परंतु क्या आज की कांग्रेस बिहार में जातीय समीकरण को समझ लिया है,क्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार में दलित समाज,चमार, जाटव इन सब जातियों के लोगों को समझ रहे हैं,क्योंकि बिहार में सवर्ण जातियों की संख्या लगभग 26% है जो कि कांग्रेस का वोट बैंक भी माना जाता है,लेकिन अब यह वोट बैंक भी बिखरा पड़ा हुआ है,राहुल गांधी लगातार अल्पसंख्यक और दलितों को भी अपने साथ जोड़ने में लगे हुए हैं,आपको बता दे कि बिहार में दलितों की संख्या 19% है,राहुल गांधी तेजस्वी यादव के साथ मिलकर सभी जातियों में अपनी पेठ बनाना चाहते हैं,आपको बता दे की कांग्रेस का पुराना वोट बैंक सवर्ण जातियाँ रही हैं। राहुल गांधी उनके बीच “कांग्रेस का गौरवशाली अतीत” और “सामाजिक बराबरी” का संदेश देकर दोबारा भरोसा पाने की कोशिश कर रहे हैं।
आईए जानते हैं पार्टियों की जातीय समीकरण:
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बहुत अहम रोल प्ले करता है क्योंकि हर नेता का अपना-अपना वोट बैंक है खासकर बिहार में,जैसे यादव और मुस्लिम इनका पारंपरिक वोट जाता है राजद को,वही कुर्मी एनडीए के आधार हैं,और ऐसा कहा जाता है कि ब्राह्मण और सवर्ण कांग्रेस के मुख्य वोट बैंक है लेकिन अभी आज की डेट में देखा जाए तो यह वोट बैंक बिखरा पड़ा हुआ है,और जो दलित और महादलित है बिहार के वह निर्णायक भूमिका निभाते हैं बिहार में सरकार बनाने की
राहुल कि अब तक की यात्रा:
बिहार में कांग्रेस का कोई मजबूत चेहरा नजर नहीं आता लिहाजा राहुल गांधी के अलावा लोग किसी और को नहीं देखते हैं,एक तरह से देखा जाए तो पहले राहुल गांधी की छवि अस्थिर थी और केवल चुनावी मौसम वाली छवि थी परंतु अब जो राहुल गांधी में परिवर्तन आया है वह सराहनीय है जनता का थोड़ा विश्वास राहुल गांधी में जगह है क्योंकि वह लगातार लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं,लेकिन अभी भी राहुल गांधी को स्थानीय नेतृत्व और स्थाई जानदार बनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी,राहुल गांधी लंबे समय तक केवल दिल्ली के नेता कह जाते थे लेकिन अब राहुल गांधी में जो परिवर्तन आया है वह पूरा देश देख रहा है,विगत कुछ वर्षों में राहुल गांधी में जनता परिवर्तन देख रही है,भारत जोड़ो यात्रा,वोट अधिकार यात्रा,संविधान बचाओ यात्रा के तहत राहुल गांधी ने लोगों में अपनी छवि को सुधार है,राहुल गांधी की सबसे खास बात युवाओं को जोड़ना,लगातार मुद्दा उठाते रहना कभी शिक्षा पर, रोजगार पर,भ्रष्टाचार पर यह एक बहुत बड़ा फैक्टर है,जिससे कि युवाओं में लोकप्रियता बनी रहती है,राहुल गांधी के नेतृत्व में ही 10 साल कांग्रेस विपक्ष के नेता के तौर पर गायब थी,राहुल गांधी के नेतृत्व में ही कांग्रेस 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे कम सिट लेकर आई,शायद यही सब कारण है कि राहुल गांधी ने आत्ममंथन किया और यह समझा कि लोगों के बीच रहना कितना आवश्यक रहता है
राहुल की बिहार की राजनीति क्या कहती है:
बिहार में अक्टूबर नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस राजद के साथ गठबंधन करके बिहार में चुनाव लड़ेगी,आपको बता दे कि बिहार में कांग्रेस की पकड़ मजबूत नहीं है वहां जेडीयू और राजद जैसी पार्टियों की पकड़ मजबूत है लिहाजा कांग्रेस को राजद के साथ गठबंधन करना पड़ा,राहुल गांधी फिलहाल तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रहे हैं ऐसे में एक छवि बनाना बिहार के लोगों में राहुल गांधी के लिए बहुत कठिन साबित हो सकता है क्योंकि तेजस्वी यादव खुद एक युवा चेहरा के रूप में बिहार की जनता के बीच में है
राहुल गांधी लगातार अब जनसंपर्क में जुड़ चुके हैं चाहे हो विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव हो जनता के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं संसद में,अभी बिहार में उन्होंने वोट अधिकार यात्रा की जिसमें काफी भीड़ जुटी हुई थी, लेकिन कांग्रेस का कमजोर संगठन, आरजेडी का प्रभाव जनता के बीच में यह सारे अहम सवाल खड़े होते हैं,राहुल गांधी को बिहार की जनता में अपनी छवि बनाने के लिए अभी और मेहनत करनी पड़ सकती है इसीलिए वह बिहार के दूसरे युवा चेहरा तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन में है क्योंकि बिहार में तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और नये में नाम ले तो प्रशांत किशोर को लोग ज्यादा पसंद करते हैं,अब देखते हैं कि बिहार की जनता किसको अपना मुख्यमंत्री बनाती है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल