कैसे होता है उपराष्ट्रपति पद का चुनाव?

पहले की प्रक्रिया में उपराष्ट्रपति के चुनाव में और आज की प्रक्रिया में बहुत अंतर है, पहले क्या होता था लोकसभा और राज्यसभा के मेंबर्स के द्वारा किसी को उपराष्ट्रपति चुन लिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है, अब उपराष्ट्रपति हो या राष्ट्रपति हो उनके चुनाव की एक खास प्रक्रिया होती है,आईए जानते हैं राष्ट्रपति से कितना अलग होता है यह उपराष्ट्रपति का चुनाव, किस प्रकार उपराष्ट्रपति को चुना जाता है, उपराष्ट्रपति का चुनाव राष्ट्रपति के चुनाव से बिल्कुल अलग होता है, उपराष्ट्रपति के चुनाव में दोनों सदनों के नेता मिलकर वोटिंग करते हैं यानी लोकसभा और राज्यसभाhttp://news24hourslatest.in
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में अंतर:
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के चुनाव में जनता का कोई इंवॉल्वमेंट नहीं होता है, यानी जनता सीधे इनका चुनाव नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चयन करते हैं, आपको बता दें कि राष्ट्रपति के चुनाव में सांसद और विधायक दोनों वोट करते हैं बल्कि उपराष्ट्रपति के चुनाव में सिर्फ सांसदों को ही वोटिंग का अधिकार होता है
उपराष्ट्रपति का चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति से होता है इसकी वोटिंग को सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम भी कहा जाता है, वोटिंग के दौरान वोटर को अपने पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है,वैलेट पेपर से वोटिंग होती है और उस पर प्राथमिकता दी जाती है, जैसे जो पहली पसंद है उसे एक नंबर दिया जाता है,दूसरी पसंद है उसे दो और तीसरी पसंद है उसे तीन, इसको समझने का आसान तरीका है अगर तीन लोग उपराष्ट्रपति के चुनाव में खड़े हैं तो वोटर को अपनी पहली पसंद के अनुसार वोट करना होता है
अब कैसे वोटो की गिनती होती है?
उपराष्ट्रपति की वोटो की गिनती बिल्कुल अलग होती है जैसा कि हम सबको पता है की जनता की इसमें कोई भागीदारी नहीं होती है,जनता जिस प्रतिनिधि को चुनती है वह अपने हिसाब से वोट करते हैं और उपराष्ट्रपति को चुनते हैं, वोट डाल दिए जाने के बाद जितने भी सदस्य वोट डाले हैं उनकी संख्या को दो से भाग दिया जाता है, और फिर उसमें एक जोड़ा जाता है, उदाहरण के तौर पर अगर चुनाव में 700 सदस्यों ने वोट डाले तो इसको दो से भाग कर दिया जाता है यानी टोटल वोट हुए 350, अब इसमें एक जोड़ा जाता है जो हुए 351, और अब चुनाव जीतने के लिए 351 वोट मिलना जरूरी है, और जब वोटिंग खत्म हो जाती है तो पहले राउंड की गिनती शुरू होती है जिसमें यह देखा जाता है की पहली प्राथमिकता वाले उपराष्ट्रपति को कितने वोट मिले है, अगर पहले ही गिनती में प्राथमिकता के अनुसार सबसे ज्यादा वोट अगर किसी को मिले हैं तो उसे ही विजेता मान लिया जाता है उसे पद के लिए, और अगर ऐसा नहीं होता है तो गिनती दोबारा शुरू होती है, और उसके बाद जिसे न्यूनतम वोट मिले हैं उसे बाहर कर दिया जाता है, ऐसा भी है कि जो बाहर हुए हैं उनका जो वोट संख्या है वह दूसरे वाले उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिया जाता है इसके बाद देखा जाता है कि दूसरा उम्मीदवार उन ट्रांसफर वोटो के आधार जितनी वोट चाहिए उतनी संख्या पर पहुंचता है या नहीं, और इन दोनों के वोट से मिल जाने पर जो कोटे के बराबर अगर वोट आ जाते हैं तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है, अगर कोई विजेता नहीं बनता है तो फिर से वही प्रक्रिया दोहराई जाती है, प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है जब तक की कोई एक उम्मीदवार जीत न जाए, और इतनी सारी प्रक्रियाएं होने के बाद भारत को मिलता है उसका उपराष्ट्रपति
आर्टिकल 63 और 66 क्या है:
1-राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति यह जो संवैधानिक पद है यह संविधान के तहत अलग-अलग अनुच्छेद में आता है, आपको बता दें कि अनुच्छेद 63 में यह कहा गया है कि भारत में एक उपराष्ट्रपति होंगे, तो उपराष्ट्रपति होंगे तो उनका निर्वाचन भी होगा और उपराष्ट्रपति का यह निर्वाचन अनुच्छेद 66 के तहत आता है, भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्य से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा
2- आपको बता दे कि उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन या किसी राज्य के विधान मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होता है, और अगर किसी राज्य के विधान मंडल का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति निर्वाचित होता है तो उसके बाद उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है वह केवल एक उपराष्ट्रपति रहेगा बाकी उसे कोई पद नहीं मिलेगा,
3- उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए उसे भारत का नागरिक होना चाहिए,35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो और किसी भी पद पर निर्वाचित न हो, और अगर कोई व्यक्ति भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है तो वह भी राष्ट्रपति निर्वाचित होने के पात्र नहीं होगा